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देश में कोवैक्सीन की किल्लत पर भारत बायोटेक कंपनी के बाद कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इस पर चिंता जाहिर की है। पी चिदंबरम ने कहा कि वैक्सीन सप्लाई, उत्पादन और ग्राहकों की सूची का कैग ऑडिट होना चाहिए। पी चिदंबरम (फाइल फोटो) देश में कोरोना वायरस की दूसरी भले ही धीमी पड़ गई हो लेकिन वैक्सीन को लेकर आ रहे नए-नए बयान चिंताजनक हैं। हाल ही में भारत बायोटेक कंपनी ने कहा कि वैक्सीन की सप्लाई और उत्पादन की प्रक्रिया जटिल है, इसलिए कोवैक्सीन की किल्लत देखी जा रही है। इस पर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने वैक्सीन सप्लाई का कैग ऑडिट करने की सलाह दी है। पी चिदंबरम ने ट्वीट कर लिखा कि "लापता टीके" का रहस्य हर दिन गहराता जा रहा है। टीकों के एक बैच के उत्पादन के लिए आवश्यक 'लीड टाइम' के बारे में भारत बायोटेक के बयान ने भ्रम को और बढ़ा दिया है। उन्होंने आगे कहा कि 'क्षमता' एक चीज है और 'उत्पादन' एक अलग चीज है। हम दो घरेलू निर्माताओं द्वारा अब तक उत्पादित वास्तविक मात्रा के बारे में जानना चाहेंगे। एक बार जब हम वास्तविक उत्पादन को जान लेते हैं, तो हमें बताया जाना चाहिए कि तारीख-वार क्या आपूर्ति की गई है और किसे? इतना ही नहीं पी चिदंबरम ने कहा कि दो घरेलू निर्माताओं की क्षमता, उत्पादन, प्रेषण, आपूर्ति और ग्राहकों की सूची के सीएजी द्वारा संचालित पूर्ण-स्कोप ऑडिट को निर्देशित करना उचित रहेगा। टीकों की कमी पर जनता का गुस्सा सड़कों पर आने से पहले अब लापता टीकों के रहस्य को सुलझाना जरूरी है। इसके अलावा पी चिदंबरम ने कहा कि मैं रिलायंस ग्रुप, एचसीएल और अन्य द्वारा अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों, व्यापार भागीदारों आदि के टीकाकरण करने के एलान का स्वागत करता हूं और कॉरपोरेट्स को बधाई देता हूं। पी चिदंबरम ने आगे कहा कि कॉरपोरेट हमें यह भी बताएं कि उन्हें टीकों की आपूर्ति कहां से मिलेगी? राज्य सरकारें घरेलू या विदेशी किसी भी निर्माता से आपूर्ति प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं तो, कॉरपोरेट को अपनी आपूर्ति कहां से मिलने की उम्मीद है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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कांगड़ा के जिला मुख्यालय धर्मशाला में सत्ताधारी दल भाजपा में बड़ी फूट सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी ने ही नामांकन भरने के अंतिम दिन समर्थकों व बैंड बाजों सहित नोमीनेशन भर दिया। इतना ही नहीं टिकट की दावेदारी कर रहे भाजपा जनजातीय मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन सिंह नैहरिया ने भी अपने समर्थकों सहित कचहरी चौक में सभा कर नोमिनेशन कर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोंक दी है। ऐसे में जनता चर्चा कर रही है कि यहां भाजपा बुुरी तरह से बिखर गई है। बीजेपी की हालत ऐसी है कि न तो कोई मंडल को संभालने वाला है न ही पार्टी पदाधिकारियों को पार्टी के पुराने कार्यकर्ता व पदाधिकारी भी कुछ विपिन नैहरिया के साथ दिखे तो कुछ मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी के साथ खड़े दिखे। भाजपा में ओबीसी और जनजातीय वोटरों का ध्रुवीकरण कांग्रेस की राहें आसान करने वाला हो सकता है। पूर्व में दोनों ही समुदाय संगठित थे और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलता रहा है। लेकिन इस वार प्रत्याशी बदलने के बाद पार्टी को संभालने के लिए वरिष्ठ नेताओं का आभाव साफ नजर आया, जिसका असर यह है कि कार्यकर्ता अपनी अपनी राह पर चल पड़े हैं। नोमिनेशन भरने के अंतिम दिन का माहौल देख कर सभी हैरत में थे। एक तरफ अनिल चौधरी कंधों पर सवार होकर जा रहे थे तो दूसरी ओर विपिन नैहरिया के समर्थक नारे लगा रहे थे। जबकि भाजपा ने राकेश चौधरी को अपनी प्रत्याशी बनाया हुआ है। इससे पहले विधायक विशाल नैहरिया के समर्थक भी विरोध स्वरूप नारे लगाते रहे। हालांकि विशाल नैहरिया इस सारी सियासी तस्वीर से गायव दिख रहे हैं। भाजपा की आपसी फूट से विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ता खूब मजे ले रहे हैं। विपक्ष के कार्यकर्ता भाजपा के हालात पर खूब चुटकियां ले रहे हैं। उधर भाजपा के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण नाग का कहना है कि टिकट मांगना सबका अधिकार है और जब हाईकमान या प्रदेश नेतृत्व निर्णय ले लेता है, उस निर्णय के साथ सभी कार्यकर्ताओं को चलना चाहिए। जिन भी पार्टी के पदाधिकारियों ने नामांकन भरे हैं उनसे बातचीत चल रही है है सबकुछ जल्द ठीक हो जाएगा।
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शायद, जल्द ही समय आएगा जब युवापाठ्यपुस्तकों तक पृष्ठों के माध्यम से फिसल जाएगा। और इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। लड़कों और लड़कियों अब, अगर वे किताबें पढ़ते हैं, तो अधिकांश भाग के लिए, इलेक्ट्रॉनिक संस्करण में। क्या इसके लिए उन्हें अपमानित करना उचित है? बिल्कुल नहीं। प्लस हैं। लेकिन, ई-बुक कैसे चुनें? उपयोगी टिप्स - इस लेख में। यदि आप सार्वजनिक परिवहन में हर दिन घिरे लोगों पर ध्यान देते हैं, तो हम देखेंगेः ई-बुक्स लगभग सब कुछ यातायात जाम में पढ़ा जाता है! रास्ते में "समय को मारने" का एक शानदार तरीका उपयोगी है। इस प्रारूप की किताबें आधुनिक बाजार जीतती हैं। इसके साथ, करने के लिए कुछ भी नहीं है। और, क्या यह इसके लायक है? हम में से लगभग सभी गैजेट हैं,अद्यतित मोबाइल फोन। "युद्ध और शांति" की मात्रा की तुलना में पृष्ठ को प्रदर्शन पर बदलना आसान है। क्या आपने ई-बुक खरीदने के बारे में सोचा है? सही कदम डिजिटल प्रारूप में ऐसी एक पुस्तक हजारों कार्यों को समायोजित कर सकती है। स्कूली बच्चों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण क्या है। Http://portativ.ua/ पर देखो आपको सबसे दिलचस्प और प्रासंगिक जानकारी मिल जाएगी। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से दिलचस्प होगा जो पहली बार ई-बुक खरीदने जा रहे हैं। जल्दी करो! आपको पढ़ने के लिए आरामदायक, सुविधाजनक होना चाहिए। कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कितना आश्चर्यजनक हो सकता है, इलेक्ट्रॉनिक पुस्तक में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप जो पढ़ते हैं उसकी सामग्री नहीं है, लेकिन स्क्रीन। आपको अपनी आंखों को पेंच नहीं करना चाहिए, असहज महसूस करना चाहिए। खैर, अगर आपके पास एक रंगीन स्क्रीन के साथ ई-बुक के लिए पर्याप्त पैसा है। यदि नहीं, तो विशेष स्टोर के विक्रेता से परामर्श लें। वह निश्चित रूप से आपको बताएगा कि कौन सा मॉडल खरीदने के लिए सबसे अच्छा है। एक महत्वपूर्ण तर्क रोशनी की उपस्थिति है। आप नहीं जानते कि आप किन स्थितियों को पढ़ना चाहते हैं, है ना? इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हाथ में ले लो। इसे संभालने के लिए सुविधाजनक होना चाहिए, "आपकी बात"। सेटिंग्स बदलें, इंटरफ़ेस के साथ मज़ा लें। किसी भी काम की कुछ पंक्तियों को पढ़ें, यह अनिवार्य नहीं होगा। आपको महसूस करना चाहिए कि यह ई-बुक आपके लिए सही है। बहुत सारे मॉडल हैं। और आपको अपने लिए सबसे अच्छा चुनना होगा! कृपया, ज़ाहिर है, ध्यान देंनिर्माता। गुणवत्ता पर कंजूसी मत करो। हाथों से एक ई-पुस्तक खरीदने मत करो। विशेषता दुकानों में टहलें। एक नज़र, जिस पर मॉडल ऑनलाइन स्टोर में स्टॉक कर रहे हैं ले लो। याद रखें कि जो वास्तव में तलाश कर रहे हैं उन लोगों के लिए, हमेशा खुद के लिए एक सभ्य विकल्प मिल जाएगा।
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These Zodiac Sign will Become Rich मेष- शनि और सूर्य ग्रह की युति मेष राशि के लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इन दोनों ग्रहों के मिलने से राशि के लोगों की आमदनी में जबरदस्त वृद्धि हो सकती है। कमाई के नए नए रास्ते बनेंगे और पहले से किए गए निवेश में भी अच्छा खासा लाभ हो सकता है। नौकरी करने वालों को पदोन्नति के साथ ही वेतन वृद्धि या इन्क्रीमेंट भी मिलने की उम्मीद है। व्यापारियों को भी अच्छे मुनाफे के साथ व्यापार में किया गया निवेश लाभ देगा। शेयर बाजार, सट्टा के काम में लगे हुए लोग कमाई कर सकेंगे। वृष- वृष राशि लोगों के लिए सूर्य और शनि देव मिलकर करियर और व्यवसाय में लाभ दिलाएंगे। इस राशि के लोगों को नई नौकरी का ऑफर भी मिल सकता है। आपके अधिकारी कार्य से प्रसन्न होकर पदोन्नति करने और वेतन बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं। मकर- सूर्य और शनि की युति मकर राशि वालों के लिए भी जबरदस्त लाभदायक सिद्ध हो सकती है। आर्थिक दृष्टि से आपको मजबूती प्राप्त होगी और मनोकामना पूरी होगी। यदि कहीं आपका पैसा फंसा हुआ था तो वह भी मिल सकेगा, कोशिश करते रहें। व्यापारियों के लिए समय अनुकूल रहेगा, अच्छी कमाई होने से पैसे की बचत भी कर सकेंगे और भविष्य के लिहाज से किसी बड़े स्तर पर निवेश भी कर सकेंगे। वाणी का ही उपयोग शानदार लाभ दिलाएगा, जिसमें मीडिया, फिल्म लाइन, मार्केटिंग और शिक्षण व्यवसाय से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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Madhubala Biopic: बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा मधुबाला (Madhubala) ने अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से हर किसी को दीवाना बनाकर रखा था. उनकी हर फिल्म हिट साबित होती थी और ऑडियन्स की उनसे नजर नहीं हटती थी. उनकी हर मुस्कान पर लोग फिदा हो जाते थे. मधुबाला का फिल्मी सफर जितना खूबसूरत रहा है उतनी ही उनकी पर्सनल लाइफ रही थी. मधुबाला की जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं है. उनकी जिंदगी पर कई फिल्ममेकर फिल्म बनाना चाहते हैं. मधुबाला की बहन मधुर भूषण उनकी बायोपिक बनाना चाहती हैं. मधुबाला की बायोपिक को लेकर उनके पति किशोर कुमार (kishore Kumar) के बेटे अमित कुमार (Amit Kumar) को कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें कोई ऑब्जेक्शन नहीं है. मधुबाला हिंदी सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता व गायक किशोर कुमार की दूसरी पत्नी थीं. किशोर कुमार की पहली पत्नी रुमा गुहा के बेटे अमित कुमार ने मधुबाला की बायोपिक को लेकर अपनी राय रखी है. ईटाइम्स को दिए इंटरव्यू में अमित कुमार ने कहा- क्यो नहीं? बायोपिक तो सबका बनता है आजकल. मेरे पिता की बायोपिक पर भी हमने काम करना शुरू किया है. अमित कुमार ने बताया कि वह अपने पिता पर बायोपिक बनाने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा अभी तक मैं इसे लेकर कुछ कहूंगा नहीं, जब तक इस पर सब होगा नहीं. ये कार्ड्स पर है, अभी हम करेंगे तो तरीके से करेंगे. हम अपना प्रोडक्शन हाउस बनाएंगे और फिल्म बनाएंगे क्योंकि जो हमे पता है वो किसी को पता नहीं है. जो होगा एक बार होगा अगर मधुजी पर बायोपिक बन रही है तो क्यों नहीं ,बननी चाहिए. मधुबाला की बायोपिक को लेकर लंबे समय से खबरें आ रही हैं. अभी तक इस बायोपिक को लेकर अभी तक ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई है. फैंस को मधुबाला की जिंदगी के बारे में जानना है और वह उनकी बायोपिक का इंतजार कर रहे हैं.
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यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Comupimet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Comupimet की खुराक अलग हो सकती है। क्या Comupimet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती महिलाओं के लिए Comupimet सुरक्षित है। क्या Comupimet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Comupimet का कोई भी बुरा प्रभाव स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर नहीं पड़ता है। Comupimet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? किडनी के लिए Comupimet नुकसानदायक नहीं है। Comupimet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Comupimet से आपके लीवर पर कोई दबाव नहीं पड़ता है और यह लीवर के लिए सुरक्षित भी है। क्या ह्रदय पर Comupimet का प्रभाव पड़ता है? हृदय के लिए Comupimet हानिकारक नहीं है। क्या Comupimet आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Comupimet को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Comupimet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? हां, Comupimet को लेने के बाद आपको चक्कर या नींद नहीं आती है, तो आप वाहन को चलाने व मशीन पर काम करने का काम भी कर सकते हैं। क्या Comupimet को लेना सुरखित है? हां, Comupimet आपके लिए सुरक्षित है। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Comupimet इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, मस्तिष्क विकार में Comupimet का उपयोग कारगर नहीं है। क्या Comupimet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Comupimet को खाने के साथ लेना सुरक्षित है। जब Comupimet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? कई दवाओं को शराब के साथ नहीं लिया जाता है। अगर आप Comupimet को शराब के साथ लेने वाले है तो इन दोनों की मात्रा पर डॉक्टर से राय जरूर ले लेनी चाहिए। Comupimet बैक्टीरियल और प्रोटोज़ोआ कोशिकाओं की डीएनए संरचना पर असर कर उनको खत्म करती है। प्रिस्क्राइब की गई खुराक और समयावधि में Comupimet से पैथोजन के कारण हुआ इंफेक्शन पूरी तरह से खत्म हो जाता है। जी नहीं, Comupimet के कारण किडनी को नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि, बेवजह Comupimet की बहुत ज्यादा खुराक लेने पर किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। जी हां, Comupimet एंटी-बायोटिक दवा है। Comupimet का इस्तेमाल बैक्टीरियल और प्रोटोज़ोअल संक्रमण के इलाज में किया जाता है। Comupimet के कारण बांझपन नहीं होती है। Comupimet से बांझपन के संबंध के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर के निर्देशानुसार Comupimet लेनी चाहिए। अचानक Comupimet खाना बंद ना करें या प्रिस्क्राइब की गई समयावधि से ज्यादा समय तक Comupimet ना खाएं। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Bactroban (mupirocin)
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भारतीय सेना के कैंपों और यूनिटों में घुसने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। बेहद सख्त फरमान जारी किया गया है, हर किसी के लिए पढ़ना जरूरी है। दरअसल, सेना ने अपनी संवदेनशील और अति संवेदनशील यूनिटों की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है। ये वे यूनिटें है, जो सेना की अति महत्वपूर्ण यूनिटों की फेहरिस्त में शुमार हैं और दुश्मन देशों की निगाहें भी विभिन्न माध्यमों से इन यूनिटों की हलचल व जासूसी करवाने पर टिकी रहती हैं। इतना ही नहीं, इन यूनिटों में घुसपैठ की कोशिशें भी हो चुकी है। इसी के मद्देनजर सेना ने इन महत्वपूर्ण यूनिटों की सुरक्षा और कड़ी करने की दिशा में काफी सख्ती दिखाई है, जिसके अंतर्गत सेना ने आदेश जारी किया है कि यदि ऐसे यूनिटों में कोई घुसने का प्रयास करता है तो उसे गोली मार दी जाए। सेना की ओर से इस बाबत 'शूट एट साइट' के आदेश दिए गए हैं। सेना ने ये आदेश इन महत्वपूर्ण यूनिटों के बाहर चस्पा भी कर दिए हैं। सेना ने कैंटोनमेंट इलाके में फोटोग्राफी भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी है। ऐसा करने वाले के खिलाफ भी सख्ती से निपटा जाएगा। दरअसल, सेना के छावनी इलाके सिविल इलाकों की अपेक्षाकृत ज्यादा खूबसूरत और हरे-भरे होते हैं, इसलिए यहां से गुजरने या सैर-सपाटे के लिए आने वाले लोग यहां लगाए गए टैंकों, एयरक्राफ्ट्स, राइफल्स लिए जवानों के बुतों इत्यादि को कैमरे में कैद करते हैं। सेना के एक आला अफसर का कहना है कि सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी भी सिक्योरिटी के लिहाज से ठीक नहीं है, इसलिए सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी पूरी तरह से बैन कर दी गई है। सेना अपनी अति संवेदनशील यूनिटों को पूरी तरह से कवर करेगी। इन यूनिटों की अच्छी तरह से फेंसिंग की जाएगी। यदि यूनिटों के कई एग्जिट प्वाइंट है तो वहां भी जवानों की गश्त बढ़ाई जाएगी, लेकिन इन यूनिटों में आवाजाही के लिए एक ही एग्जिट प्वाइंट रखा जाएगा।
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सही और सक्षम भाषण की कला सभी के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह भाषण कई लोगों के लिए आवश्यक है, विशेष रूप से जिनकी गतिविधियां सक्रिय संचार से जुड़ी हैं - बातचीत, बड़े दर्शकों के सामने प्रदर्शन, ग्राहकों के साथ संचार। सक्षम रूप से वितरित भाषण - सुंदर और सूचनात्मक रूप से संतृप्त, तार्किक रूप से निर्मित और अभिव्यक्तिपूर्ण। दुर्भाग्यवश, आधुनिक विद्यालय एक साक्षर और स्पष्ट भाषण बनाने के लिए थोडा समय देता है, और नतीजा यह है कि कई लोगों को उनकी मूल भाषा की समृद्धि का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने में असमर्थता है। साक्षर भाषण के नियमों में टौटोलॉजी ("नृत्य नृत्य", "युवा लड़का", "एक प्रश्न पूछें"), परजीवी शब्दों ("सामान्य रूप से", "बोलने के लिए", "जैसे", "छोटा") के व्याख्यान से बाहर निकलने के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, आपको उन शब्दों से छुटकारा पाना चाहिए, जिनके अर्थ आप नहीं जानते हैं, साथ ही रूसी एनालॉग वाले विदेशी शब्दों के अन्यायपूर्ण उपयोग से भी। कुछ शब्दों के तनाव और जेनेरा के लिए देखें। मध्यम प्रकार के शब्द के रूप में "कॉफी" का उपयोग करने के प्रवेश के बावजूद, शिक्षित लोग सकारात्मक रूप से इसकी सराहना करने की संभावना नहीं रखते हैं। और यदि "अंगूठी" शब्द में तनाव पहले अक्षर पर पड़ता है, और "बार्मन" शब्द में - दूसरे पर, यह आपको एक अशिक्षित व्यक्ति देगा। भाषण रंगीन रूपकों, मूल तुलनाओं, विवरण, कहानियों और अफवाहों में भाषण में प्रयोग करें - ये सभी टूल आपकी कहानी को जीवंत और सुंदर बनाने में मदद करेंगे। साक्षर भाषण कैसे सीखें? सबसे अच्छा साहित्यिक भाषण शास्त्रीय कथाओं द्वारा पढ़ाया जाता है। पढ़ना आपको शब्दावली का विस्तार करने, वाक्यांशों को खूबसूरती से बनाने का तरीका सीखने, शब्दों के साथ अपने विचारों और भावनाओं को आसानी से व्यक्त करने की अनुमति देता है। और, इसके अलावा, पढ़ना और लिखना, इसे और अधिक साक्षर और अधिक कल्पनाशील बनाना। सही ढंग से वितरित भाषण सीखने के लिए एक तानाशाह की मदद से जरूरी है। एक साहित्यिक काम या फिल्म की अपनी रीटेलिंग लिखने का प्रयास करें। फिर रिकॉर्ड सुनें, भाषण त्रुटियों को ढूंढें - शब्द परजीवी, पुनरावृत्ति, खराब शब्द वाक्यांश। भविष्य में, आप जो कह रहे हैं उसका ट्रैक रखने की कोशिश करें, और इन त्रुटियों को अनुमति न दें। नए शब्दों को सीखने के बाद, अपना अर्थ जानने और सक्रिय शब्दावली में प्रवेश करने का प्रयास करें। हालांकि, अपने भाषण को बहुत जटिल शब्दों से तृप्त करने से बचें - यह आपको एक अच्छा वार्तालाप नहीं करेगा।
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यूपी के कैबिनेट मंत्री व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार में उपेक्षा के बाद भी गठबंधन धर्म निभाऊंगा। मैं जो भी हूं, अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के बल पर हूं। गाजीपुर जिले के कासिमाबाद स्थित महाराणा प्रताप सभागार में कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे बदनाम करने में लगे हैं। मैं यह साजिश सफल नहीं होने दूंगा। कहा कि मैं जो कुछ भी हूं, कार्यकर्ताओं और पार्टी की वजह से हूं। अभी से आप लोग हर बूथ पर लग जाएं। सरकार में मेरी उपेक्षा से आपको घबराना नहीं है। मैं गठबंधन धर्म निभाते हुए निष्ठापूर्वक कार्य करता रहूंगा। कहा कि मैंने क्षेत्र की सड़कों का प्रस्ताव सरकार को दिया है। सड़कों पर ध्यान देना सरकार का काम है। कहा, मेरे प्रयास से सिंगेरा में फायर ब्रिगेड स्टेशन एवं तहसील परिसर में निरीक्षण गृह का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग का मैं मंत्री हूं, मुझसे पहले प्रदेश की जनता इस विभाग को जानती तक नहीं थी। मैंने इस विभाग को पुनर्जीवित कर आज इस स्थिति में ला दिया है कि यह प्रदेश में चर्चा का विषय बना है। उन्होंने पिछड़ों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पिछड़ों का आरक्षण तीन श्रेणी में बांट कर देना चाहिए। कहा कि पार्टी पूरे प्रदेश में हर बूथ, हर सेक्टर पर दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी की मजबूती के लिए लग जाना चाहिए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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गोपालगंज जिले के उचकागांव थाना के चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली एक युवती से दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर शव को गंडक नहर में फेंक दिया गया। मंगलवार की दोपहर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर गंडक नहर पुल के समीप युवती का शव बरामद किया गया। युवती की शव की पहचान नहीं हो सकी है। वहीं शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना के बाद पुलिस ने नहर से शव को निकाला और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि युवती की हत्या के पहले दुष्कर्म किया गया है। उसके गले में दुपट्टा लपेटा गया हुआ है जबकि दोनों हाथ को कपड़ा से बांधा गया है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि महिला का दुपट्टा से गला घोंट कर हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए गंडक नहर में फेंक दिया गया है। जो कहीं से बहते हुए मकसूदपुर पुल के पास आकर फंस गया है। पुल के समीप शव मिलने की सूचना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। बरामद शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। लेकिन शव को देखने से प्रतीत हो रहा है कि युवती चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली मजदूर है। वह आदिवासी क्षेत्र की बतायी जा रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थानाध्यक्ष अब्दुल मजीद ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हत्या या दुष्कर्म की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस इसकी गहराई से जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है. जिसमें शादी के बाद पहली बार ससुराल पहुंची दुल्हन का घरवाले बड़े ही शानदार तरीके से वेलकम करते हुए दिख रहे हैं. हर लड़की का यह सपना होता है कि उसकी शादी यादगार हो. शादी को यूनिक बनाने के लिए तरह-तरह के आइडिया सोचे जाते हैं. आपने सोशल मीडिया पर शादी की कई वीडियो देखी होगी. कई बार शादी की वीडियो इतनी फनी होती है कि हंसी आ जाती है. वहीं कई बार ऐसे वीडियो भी वायरल हो जाते हैं जिन्हें देखने के बाद सीधा मुंह से - 'WOW' ही निकलता है. हम सभी जानते हैं कि दुल्हन जब भी अपने ससुराल पहुंचती है तो उसके स्वागत में ससुराल वाले कोई कमी नहीं छोड़ते. दुल्हन के घर में प्रवेश पर लोग कलश में चावल रखकर बाएं पैर से एंट्री करवाते हैं. इन दिनों इसी तरह का वीडियो छाया हुआ है. वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि दुल्हन का उसके ससुराल में शानदार स्वागत किया जाता है. फूलों से फर्श सजाया होता है. इतना ही नहीं, फर्श को फूलों से सजाया गया है. दुल्हन की ऐसी ग्रैंड वेलकम बेहद ही कम ही देखी जाती है. दुल्हन के साथ दूल्हा भी साथ चल रहा होता है और वह अपनी दुल्हनिया का GRAND WELCOME देख काफी खुश नजर आ रही है. सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को हजारों व्यूज मिल चुके हैं. लोग ना सिर्फ इस वीडियो को पसंद कर रहे हैं बल्कि इस पर तरह-तरह के कमेंट और रिएक्शन दे रहे हैं. लोगों का कहना है कि इस तरह का वेलकम हर लड़की का सपना होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर weddingworldpage नाम के पेज पर शेयर किया गया है.
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एकाधिक माइलोमा एक ऑन्कोलॉजी है जो अस्थि मज्जा में कोशिकाओं से विकसित होती है। यह रोग काफी दुर्लभ है, और इसलिए इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। फिर भी, यह जानना कि यह किस प्रकार की बीमारी है, और यह स्वयं कैसे प्रकट हो सकता है, यह आवश्यक है। प्लाज्मा कोशिकाओं में उत्पादित प्रोटीन के लिए धन्यवाद, मानव शरीर विभिन्न बीमारियों और संक्रमणों का प्रतिरोध करता है। जब रोग एकाधिक माइलोमा होता है, प्लाज्मा कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं में बदल जाती हैं और सक्रिय रूप से विकसित होने लगती हैं। एकाधिक माइलोमा पुराने और मध्यम आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। जोखिम क्षेत्र में ज्यादातर पुरुष होते हैं, इस बीमारी से महिलाएं कम प्रभावित होती हैं। माइलोमा के साथ, लोग हड्डियों, प्रतिरक्षा, और गुर्दे की समस्याओं से ग्रस्त हैं, जो काफी खराब हो सकते हैं। लेकिन यह भी दर्ज किया गया था कि जब बीमारी बहुत शांत और अनजान थी, और कुछ योजनाबद्ध परीक्षा के दौरान इसे मौके से निर्धारित करना संभव था। बेशक, देर से चरण में पाए गए कई माइलोमा को बहुत कठिन (शब्द की भौतिक और वित्तीय भावना दोनों में) माना जाता है। इसलिए, मायलोमैटोसिस (माइलोमा के लिए एक और आम नाम) एक अप्रिय आश्चर्य नहीं है और समय पर पाया गया था, नियमित चिकित्सा परीक्षाओं को अनदेखा करना और कम से कम एक बार पूरी परीक्षा लेने के लिए सबसे अच्छा नहीं है। शरीर की विशेषताओं के आधार पर, एकाधिक माइलोमा के मुख्य लक्षण भिन्न हो सकते हैं। बीमारी के शुरुआती चरणों में खुद प्रकट नहीं हो सकता है। जब मायलोमैटोसिस अधिक सक्रिय रूप से विकसित होना शुरू होता है, तो इससे पीड़ित व्यक्ति को कम से कम अभिव्यक्तियों में से एक महसूस करना होगा। एकाधिक माइलोमा के मुख्य लक्षण हैंः - कमजोरी; - तेज वजन घटाने; - गुर्दे की समस्याएं (विशेष रूप से, विफलता); - थकान; - विभिन्न संक्रमणों के क्रोनिक रूपों का विकास (साइनसिसिटिस, निमोनिया और अन्य)। कई माइलोमा की घटना का सटीक कारण अब तक निर्धारित नहीं किया गया है, हालांकि दुनिया भर के मरीजों की संख्या प्रभावशाली अंक तक पहुंच जाती है। संभवतः, सब कुछ संक्रमण से शुरू होता है और एक कैंसर एकल सेल में बदल जाता है। उसके बाद, यह स्वस्थ कोशिकाओं को सक्रिय रूप से साझा और स्थानांतरित करना शुरू कर देता है। एकाधिक माइलोमा के लिए कोई विशिष्ट भविष्यवाणियां देने के लिए और यह कहने के लिए कि एक रोगी कितना जीवित रह सकता है, बहुत मुश्किल है, क्योंकि वसूली कई कारकों पर निर्भर करती है। उपचार की प्रभावशीलता बीमारी के चरण, रोगी के सामान्य स्वास्थ्य, उसकी उम्र, ट्यूमर प्रक्रिया की गतिविधि और बहुत कुछ प्रभावित करती है। माइलोमा के इलाज की आवश्यक विधि भी बीमारी के चरण और मानव प्रतिरक्षा पर निर्भर करती है। शुरुआती चरणों में, जब बीमारी का निदान पहले से ही किया जाता है, लेकिन फिर भी खुद को प्रकट नहीं होता है, तो डॉक्टर के निरीक्षण के लिए पर्याप्त है। अन्य मामलों में, आमतौर पर निम्नलिखित उपचार प्रशासित होते हैंः - कीमोथेरेपी , विशेष हार्मोनल दवाओं के सेवन के साथ, प्रक्रिया के दुष्प्रभावों को निष्क्रिय (जहां तक संभव हो)। - इम्यून थेरेपी आपको जितनी देर तक केमोथेरेपी के प्रभाव को बनाए रखने की अनुमति देती है। - सर्जिकल हस्तक्षेप भी स्वीकार्य है। सच है, केवल बड़े ट्यूमर शल्य चिकित्सा हटा दिए जाते हैं। - यदि आवश्यक हो, अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण और स्टेम रक्त कोशिकाएं हो सकती हैं। एकाधिक माइलोमा के साथ, लोक उपचार निश्चित रूप से आवश्यक नहीं माना जा सकता है, लेकिन कुछ विधियां वास्तव में शरीर का समर्थन करती हैं। उदाहरण के लिए, एक सबर के मादक टिंचर को प्रभावी माना जाता है, इसे दिन में तीन बार एक महीने के दौरान पीना आवश्यक है। और comfrey और blackcorn के साथ संपीड़न हड्डियों में दर्द से छुटकारा पा जाएगा।
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देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये लागू किये लॉकडाउन में मिली छूट के बाद अब अनेक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में भी शांति के बाद अब शूटिंग शुरू हो रही है. वहीं कपिल शर्मा भी अपने शो द कपिल शर्मा शो की शूटिंग शुरू कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया था कि सेट पर एंट्री करने से पहले लोगों को सैनिटाइज किया जा रहा है. उनका टेम्प्रेचर भी चेक होता है. अब शो में जज की भूमिका निभाने वाली अर्चना पूरन सिंह ने शूटिंग के दौरान का वीडियो शेयर किया है, जिसमें सभी मास्क, फेस शील्ड और ग्ल्वस पहनकर शूटिंग करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को अर्चना पूरन सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. इसमें कृष्णा अभिषेक और राजीव ठाकुर रिहर्सल करते दिखाई दे रहे हैं. ऑडियंस भी है. पूरी टीम ने गाइडलाइंस को फॉलो करते हुए मास्क, ग्ल्व्स और पीपीई किट भी पहना हुआ है. अर्चना पूरन सिंह ने वीडियो में बताया कि पूरे सेट को सैनिटाइज किया गया है. यहां तक कि कोरोना से बचाव के लिए वो खुद अपने मेकअप का टचअप करती दिखाई दे रही हैं. इसके साथ उन्होंने नई फोटो शेयर लिखा है कि अब यही नया नॉर्मल है. लंबे समय बाद शूटिंग शुरू कर वो बहुत एक्साइडेट हैं.
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जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा है कि आतंकी बैखलाहट और हताशा में पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहे हैं। शोपियां में तीन पुलिसकर्मियों की अपहरण के बाद हत्या के मामले में उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बौखलाहट में हैं। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने पुलिसकर्मियों को साफ्ट टारगेट समझते हुए निशाना बनाया है। डीजीपी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है कि दो एसपीओ और एक पुलिस कॉन्स्टेबल को गोली मार दी गई। यह आतंकी संगठनों की निराशा का परिणाम है। घटना के बाद पुलिसकर्मियों के इस्तीफे से जुड़ी खबरों को उन्होंने अफवाह बताया। डीजीपी ने कहा कि इससे बचना चाहिए। पुलिस जनता के लिए काम करती है, किसी को चोट पहुंचाने के लिए पुलिस काम नहीं करती। एसपीओ पुलिस फोर्स के लिए अहम हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि हमारे दो एसपीओ और एक पुलिस कांस्टेबल को शहीद किया गया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से आतंकियों को भारी नुकसान उटाना पड़ा है। इसलिए वैसे संगठन निराशा में हमले कर रहे हैं। आतंकियों को सबसे छोटे लेवेल पर एसपीओ साफ्ट टारगेट नजर आते हैं खासकर तब जबकि वे छुट्टी पर घर गए हों। यह कायरतापूर्ण हरकत है। उसकी समाज के हर वर्ग की ओर से निंदा हो रही है। उन्होंने कहा कि एसपीओ को अपनी पसंद का काम करने का अधिकार है। एसपीओ अवाम की खिदमत कर रहे हैं। एसपीओ के इस्तीफों पर उन्होंने कहा कि इन अफवाहों पर यकीन नहीं किया जाना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो हम इस पर गौर करेंगे। हम एसपीओ की सुरक्षा की गांरटी देते हैं और उनके लिए कई कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। एसपीओ लोकल हैं और इनके घर परिवार इसी क्षेत्र में हैं। आए दिन यह लोग घर के काम आदि से घर जाते हैं। इस क्रम में अपहरण के बाद उनकी हत्या की जाती है तो यह निंदनीय है। दोषी लोगों की जल्द पहचान कर ली जाएगी और उनके खिलाफ खटोर कार्रवाई होगी।
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'मैं अपना दुखड़ा किसे सुनाऊँ?' शाम के धुँधलके का समय है। सड़क के खंभों की रोशनी के चारों ओर बर्फ की एक गीली और मोटी परत धीरे-धीरे फैलती जा रही है। बर्फबारी के कारण कोचवान योना पोतापोव किसी सफेद प्रेत-सा दिखने लगा है। आदमी की देह जितनी भी मुड़ कर एक हो सकती है, उतनी उसने कर रखी है। वह अपनी घोड़ागाड़ी पर चुपचाप बिना हिले-डुले बैठा हुआ है। बर्फ से ढका हुआ उसका छोटा-सा घोड़ा भी अब पूरी तरह सफेद दिख रहा है। वह भी बिना हिले-डुले खड़ा है। उसकी स्थिरता, दुबली-पतली काया और लकड़ी की तरह तनी सीधी टाँगें ऐसा आभास दिला रही हैं जैसे वह कोई सस्ता-सा मरियल घोड़ा हो। योना और उसका छोटा-सा घोड़ा, दोनों ही बहुत देर से अपनी जगह से नहीं हिले हैं। वे खाने के समय से पहले ही अपने बाड़े से निकल आए थे, पर अभी तक उन्हें कोई सवारी नहीं मिली है। 'ओ गाड़ी वाले, विबोर्ग चलोगे क्या?' योना अचानक सुनता है, हड़बड़ाहट में वह अपनी जगह से उछल जाता है। अपनी आँखों पर जमा हो रही बर्फ के बीच से वह धूसर रंग के कोट में एक अफसर को देखता है, जिसके सिर पर उसकी टोपी चमक रही है। 'विबोर्ग!' अफसर एक बार फिर कहता है। 'अरे, सो रहे हो क्या? मुझे विबोर्ग जाना है।' चलने की तैयारी में योना घोड़े की लगाम खींचता है। घोड़े की गर्दन और पीठ पर पड़ी बर्फ की परतें नीचे गिर जाती हैं। अफसर पीछे बैठ जाता है। कोचवान घोड़े को पुचकारते हुए उसे आगे बढ़ने का आदेश देता है। घोड़ा पहले अपनी गर्दन सीधी करता है, फिर लकड़ी की तरह सख्त दिख रही अपनी टाँगों को मोड़ता है और अंत में अपनी अनिश्चयी शैली में आगे बढ़ना शुरू कर देता है। योना ज्यों ही घोड़ा-गाड़ी आगे बढ़ाता है, अँधेरे में आ-जा रही भीड़ में से उसे सुनाई देता है, 'अबे, क्या कर रहा है, जानवर कहीं का! इसे कहाँ ले जा रहा है, मूर्ख! दाएँ मोड़!' 'तुम्हें तो गाड़ी चलाना ही नहीं आता! दाहिनी ओर रहो!' पीछे बैठा अफसर गुस्से से चीखता है। फिर रुक कर, थोड़े संयत स्वर में वह कहता है, 'कितने बदमाश हैं... सब के सब!' और मजाक करने की कोशिश करते हुए वह आगे बोलता है, 'लगता है, सब ने कसम खा ली है कि या तो तुम्हें धकेलना है या फिर तुम्हारे घोड़े के नीचे आ कर ही दम लेना है!' कोचवान योना मुड़ कर अफसर की ओर देखता है। उसके होठ जरा-सा हिलते हैं। शायद वह कुछ कहना चाहता है। 'क्या कहना चाहते हो तुम? 'अफसर उससे पूछता है। योना जबर्दस्ती अपने चेहरे पर एक मुस्कराहट ले आता है, और कोशिश करके फटी आवाज में कहता है, 'मेरा इकलौता बेटा बारिन इस हफ्ते गुजर गया साहब!' 'अच्छा! कैसे मर गया वह?' योना अपनी सवारी की ओर पूरी तरह मुड़ कर बोलता है, 'क्या कहूँ, साहब। डॉक्टर तो कह रहे थे, सिर्फ तेज बुखार था। बेचारा तीन दिन तक अस्पताल में पड़ा तड़पता रहा और फिर हमें छोड़ कर चला गया... भगवान की मर्जी के आगे किसकी चलती है!' 'अरे, शैतान की औलाद, ठीक से मोड़!' अँधेरे में कोई चिल्लाया, 'अबे ओ बुड्ढे, तेरी अक्ल क्या घास चरने गई है? अपनी आँखों से काम क्यों नहीं लेता?' 'जरा तेज चलाओ घोड़ा... और तेज...' अफसर चीखा, 'नहीं तो हम कल तक भी नहीं पहुँच पाएँगे! जरा और तेज!' कोचवान एक बार फिर अपनी गर्दन ठीक करता है, सीधा हो कर बैठता है और रुखाई से अपना चाबुक हिलाता है। बीच-बीच में वह कई बार पीछे मुड़ कर अपनी सवारी की तरफ देखता है, लेकिन उस अफसर ने अब अपनी आँखें बंद कर ली हैं। साफ लग रहा है कि वह इस समय कुछ भी सुनना नहीं चाहता। अफसर को विबोर्ग पहुँचा कर योना शराबखाने के पास गाड़ी खड़ी कर देता है, और एक बार फिर उकड़ूँ हो कर सीट पर दुबक जाता है। दो घंटे बीत जाते हैं। तभी फुटपाथ पर पतले रबड़ के जूतों के घिसने की 'चूँ-चूँ, चीं-चीं' आवाज के साथ तीन लड़के झगड़ते हुए वहाँ आते हैं। उन किशोरों में से दो लंबे और दुबले-पतले हैं जबकि तीसरा थोड़ा कुबड़ा और नाटा है। 'ओ गाड़ीवाले! पुलिस ब्रिज चलोगे क्या?' कुबड़ा लड़का कर्कश स्वर में पूछता है। 'हम तुम्हें बीस कोपेक देंगे।' योना घोड़े की लगाम खींचकर उसे आवाज लगाता है, जो चलने का निर्देश है। हालाँकि इतनी दूरी के लिए बीस कोपेक ठीक भाड़ा नहीं है, पर एक रूबल हो या पाँच कोपेक हों, उसे अब कोई एतराज नहीं... उसके लिए अब सब एक ही है। तीनों किशोर सीट पर एक साथ बैठने के लिए आपस में काफी गाली-गलौज और धक्कम-धक्का करते हैं। बहुत सारी बहस और बदमिजाजी के बाद अंत में वे इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि कुबड़े लड़के को खड़ा रहना चाहिए क्योंकि वही सबसे ठिगना है। 'ठीक है, अब तेज चलाओ! 'कुबड़ा लड़का नाक से बोलता है। वह अपनी जगह ले लेता है, जिससे उसकी साँस योना की गर्दन पर पड़ती है। 'तुम्हारी ऐसी की तैसी! क्या सारे रास्ते तुम इसी ढेंचू रफ्तार से चलोगे? क्यों न तुम्हारी गर्दन...!' 'दर्द के मारे मेरा तो सिर फटा जा रहा है,' उनमें से एक लंबा लड़का कहता है। 'कल रात दोंकमासोव के यहाँ मैंने और वास्का ने कोंयाक की पूरी चार बोतलें चढ़ा लीं।' 'मुझे समझ में नहीं आता कि आखिर तुम इतना झूठ क्यों बोलते हो? तुम एक दुष्ट व्यक्ति की तरह झूठे हो!' दूसरा लंबा लड़का गुस्से में बोला। 'भगवान कसम! मैं सच कह रहा हूँ!' 'हाँ, हाँ, क्यों नहीं! तुम्हारी बात में उतनी ही सच्चाई है जितनी इसमें कि सुई की नोक में से ऊँट निकल सकता है!' 'हें, हें, हें... आप सब कितने मजाकिया हैं!' योना खीसें निपोर कर बोलता है। 'अरे, भाड़ में जाओ तुम!' कुबड़ा क्रुद्ध हो जाता है। 'बुढ़ऊ, तुम हमें कब तक पहुँचाओगे? चलाने का यह कौन-सा तरीका है? कभी चाबुक का इस्तेमाल भी कर लिया करो! जरा जोर से चाबुक चलाओ, मियाँ! तुम आदमी हो या आदमी की दुम!' योना यूँ तो लोगों को देख रहा है, पर धीरे-धीरे अकेलेपन का एक तीव्र एहसास उसे ग्रसता चला जा रहा है। कुबड़ा फिर से गालियाँ बकने लगा है। लंबे लड़कों ने किसी लड़की नादेज्दा पेत्रोवना के बारे में बात करनी शुरू कर दी है। योना उनकी ओर कई बार देखता है। वह किसी क्षणिक चुप्पी की प्रतीक्षा के बाद मुड़कर बुदबुदाता है, 'मेरा बेटा... इस हफ्ते गुजर गया।' 'हम सबको एक दिन मरना है। 'कुबड़े ने ठंडी साँस ली और खाँसी के एक दौरे के बाद होठ पोंछे। 'अरे, जरा जल्दी चलाओ... खूब तेज! दोस्तो, मैं इस धीमी रफ्तार पर चलने को तैयार नहीं। आखिर इस तरह यह हम सबको कब तक पहुँचाएगा?' 'अरे, अपने इस घोड़े की गर्दन थोड़ी गुदगुदाओ!' 'सुन लिया... बुड्ढे! ओ नर्क के कीड़े! मैं तुम्हारी गर्दन की हड्डियाँ तोड़ दूँगा! अगर तुम जैसों की खुशामद करते रहे तो हमें पैदल चलना पड़ जाएगा! सुन रहे हो न बुढ़ऊ! सुअर की औलाद! तुम पर कुछ असर पड़ रहा है या नहीं?' योना इन शाब्दिक प्रहारों को सुन तो रहा है, पर महसूस नहीं कर रहा। वह 'हें, हें' करके हँसता है। 'आप साहब लोग हैं। जवान हैं... भगवान आपका भला करे!' 'बुढ़ऊ, क्या तुम शादी-शुदा हो?' उनमें से एक लंबा लड़का पूछता है। 'मैं? आप साहब लोग बड़े मजाकिया हैं! अब बस मेरी बीवी ही है... वह अपनी आँखों से सब कुछ देख चुकी है। आप समझ गए न मेरी बात। मौत बहुत दूर नहीं है... मेरा बेटा मर चुका है और मैं जिंदा हूँ... कैसी अजीब बात है यह। मौत गलत दरवाजे पर पहुँच गई... मेरे पास आने की बजाए वह मेरे बेटे के पास चली गई...' योना पीछे मुड़कर बताना चाहता है कि उसका बेटा कैसे मर गया! पर उसी समय कुबड़ा एक लंबी साँस खींच कर कहता है, 'शुक्र है खुदा का! आखिर मेरे साथियों को पहुँचा ही दिया!' और योना उन सबको अँधेरे फाटक के पार धीरे-धीरे गायब होते देखता है। एक बार फिर वह खुद को बेहद अकेला महसूस करता है। सन्नाटे से घिरा हुआ... उसका दुख जो थोड़ी देर के लिए कम हो गया था, फिर लौट आता है, और इस बार वह और भी ताकत से उसके हृदय को चीर देता है। बेहद बेचैन हो कर वह सड़क की भीड़ को देखता है, गोया ऐसा कोई आदमी तलाश कर रहा हो जो उसकी बात सुने। पर भीड़ उसकी मुसीबत की ओर ध्यान दिए बिना आगे बढ़ जाती है। उसका दुख असीम है। यदि उसका हृदय फट जाए और उसका दुख बाहर निकल आए तो वह मानो सारी पृथ्वी को भर देगा। लेकिन फिर भी उसे कोई नहीं देखता। योना को टाट लादे एक कुली दिखता है। वह उससे बात करने की सोचता है। 'वक्त क्या हुआ है, भाई? 'वह कुली से पूछता है। 'नौ से ज्यादा बज चुके हैं। तुम यहाँ किसका इंतजार कर रहे हो? अब कोई फायदा नहीं, लौट जाओ।' योना कुछ देर तक आगे बढ़ता रहता है, फिर उकड़ूँ हालत में अपने गम में डूब जाता है। वह समझ जाता है कि मदद के लिए लोगों की ओर देखना बेकार है। वह इस स्थिति को और नहीं सह पाता और 'अस्तबल' के बारे में सोचता है। उसका घोड़ा मानो सब कुछ समझ कर दुलकी चाल से चलने लगता है। लगभग डेढ़ घंटे बाद योना एक बहुत बड़े गंदे-से स्टोव के पास बैठा हुआ है। स्टोव के आस-पास जमीन और बेंचों पर बहुत से लोग खर्राटे ले रहे हैं। हवा दमघोंटू गर्मी से भारी है। योना सोए हुए लोगों की ओर देखते हुए खुद को खुजलाता है... उसे अफसोस होता है कि वह इतनी जल्दी क्यों चला आया। आज तो मैं घोड़े के चारे के लिए भी नहीं कमा पाया - वह सोचता है। एक युवा कोचवान एक कोने में थोड़ा उठकर बैठ जाता है और आधी नींद में बड़बड़ाता है। फिर वह पानी की बाल्टी की तरफ बढ़ता है। 'क्या तुम्हें पानी चाहिए?' योना उससे पूछता है। 'यह भी कोई पूछने की बात है?' 'अरे नहीं, दोस्त! तुम्हारी सेहत बनी रहे! लेकिन क्या तुम जानते हो कि मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा... तुमने सुना क्या? इसी हफ्ते... अस्पताल में... बड़ी लंबी कहानी है।' योना अपने कहे का असर देखना चाहता है, पर वह कुछ नहीं देख पाता। उस युवक ने अपना चेहरा छिपा लिया है और दोबारा गहरी नींद में चला गया है। बूढ़ा एक लंबी साँस ले कर अपना सिर खुजलाता है। उसके बेटे को मरे एक हफ्ता हो गया लेकिन इस बारे में वह किसी से भी ठीक से बात नहीं कर पाया है। बहुत धीरे-धीरे और बड़े ध्यान से ही यह सब बताया जा सकता है कि कैसे उसका बेटा बीमार पड़ा, कैसे उसने दुख भोगा, मरने से पहले उसने क्या कहा और कैसे उसने दम तोड़ दिया। दफ्न के वक्त की एक-एक बात बतानी भी जरूरी है और यह भी कि उसने कैसे अस्पताल जा कर बेटे के कपड़े लिए। उस समय उसकी बेटी अनीसिया गाँव में ही थी। उसके बारे में भी बताना जरूरी है। उसके पास बताने के लिए इतना कुछ है। सुनने वाला जरूर एक लंबी साँस लेगा और उससे सहानुभूति जताएगा। औरतों से बात करना भी अच्छा है, हालाँकि वे बेवकूफ होती हैं। उन्हें रुला देने के लिए तो भावुकता भरे दो शब्द ही काफी होते हैं। चलूँ... जरा अपने घोड़े को देख लूँ - योना सोचता है। सोने के लिए तो हमेशा वक्त रहेगा। उसकी क्या परवाह! वह अपना कोट पहन कर अस्तबल में अपने घोड़े के पास जाता है। साथ ही वह अनाज, सूखी घास और मौसम के बारे में सोचता रहता है। अपने बेटे के बारे में अकेले सोचने की हिम्मत वह नहीं जुटा पाता है। 'क्या तुम डटकर खा रहे हो?' योना अपने घोड़े से पूछता है... वह घोड़े की चमकती आँखें देखकर कहता है, 'ठीक है, जमकर खाओ। हालाँकि हम आज अपना अनाज नहीं कमा सके, पर कोई बात नहीं। हम सूखी घास खा सकते हैं। हाँ, यह सच है। मैं अब गाड़ी चलाने के लिए बूढ़ा हो गया हूँ... मेरा बेटा चला सकता था। कितना शानदार कोचवान था मेरा बेटा। काश, वह जीवित होता!' एक पल के लिए योना चुप हो जाता है। फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहता है, 'हाँ, मेरे प्यारे, पुराने दोस्त। यही सच है। कुज्या योनिच अब नहीं रहा। वह हमें जीने के लिए छोड़कर चला गया। सोचो तो जरा, तुम्हारा एक बछड़ा हो, तुम उसकी माँ हो और अचानक वह बछड़ा तुम्हें अपने बाद जीने के लिए छोड़कर चल बसे। कितना दुख पहुँचेगा तुम्हें, है न?' उसका छोटा-सा घोड़ा अपने मालिक के हाथ पर साँस लेता है, उसकी बात सुनता है और उसके हाथ को चाटता है। अपने दुख के बोझ से दबा हुआ योना उस छोटे-से घोड़े को अपनी सारी कहानी सुनाता जाता है।
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चंबा - चंबा के साहो क्षेत्र में पड़ने वाले जडेरा एवं बरौर सहित करीब पांच दर्जन गावं दो दिनों से अंधेरे में है। परीक्षा के दौरान एन वक्त पर बत्ती गुल होने से छात्रों के साथ अविभावकों की भी टेंशन बढ़ गई है। वर्षभर की कमाई के लिए आखिरी समय पर रिवाइज करने के वक्त बिजली न होने से दिये एवं अन्य साधनों के सहारे पढ़ाई करने पर काफी दिक्कते झेलनी पड़ रही हैं। क्षेत्रवासी मनोज, राहुल, सुधीर, विनोद, अनित, अजीत एवं बॅवी सहित अन्य का कहना है कि दो दिनों से बिजली न होने से लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में हर कार्य बिजली पर निर्भर होने से बिन बिजली के कई तरह के कार्य डिस्टर्व हो गए हैं। घरों में मनोरंज के साधन ठप पड़े हुए हैं। साथ ही लोगों को मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी कहीं ओर गांव में जाना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से बिजली की समस्या चल रही है। बार-बार कट के साथ कई दफा आधा-आधा दिन तक बिजली गुल रहती है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने बोर्ड से बिजली की सप्लाई सुचारू करने की मांग उठाई है, ताकि परीक्षा के दिनों में बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्व न हो।
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रेल मंत्रालय सभी रेलवे स्टेशनों और सभी यात्री गाडियों में फर्स्टएड चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कर रहा है, जिसके लिए सभी तरह की दवाओं, ड्रेसिंग सामग्री से युक्त मेडिकल बॉक्स और ऑक्सीजन सिलेंडर तथा डिलीवरी किट आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुशंसा के अनुसार ये वस्तुएं रेलगाड़ी अधीक्षक/गार्ड और स्टेशन मास्टर/स्टेशन अधीक्षकों के पास उपलब्ध कराई गई हैं। रेल यात्रा के दौरान बीमार हो जाने अथवा घायल होने की स्थिति में यात्री प्राथमिक उपचार के लिए रेलगाड़ी अथवा स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं। रेलगाडि़यों और स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों जैसे टिकट चेकिंग स्टाफ, रेलगाड़ी अधीक्षकों, गार्डों, स्टेशन मास्टर आदि को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने का समुचित प्रशिक्षण दिया गया है। यात्रा के दौरान गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति होने पर यात्रियों के रूप में मौजूद चिकित्सकों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। ऐसे चिकित्सकों को यात्रा में रियायत दी जाती है और टीटीई के पास उपलब्ध आरक्षण चार्टों में उनकी पहचान अलग से दर्शायी जाती है, जिसे डिब्बे में भी प्रदर्शित किया जाता है। चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए मार्ग में अगले स्टेशन पर रेलवे के चिकित्सक अथवा प्राइवेट प्रेक्टिशनर का भी प्रबंध किया गया है। स्टेशन मास्टरों के पास निकटवर्ती रेलवे/सरकारी/प्राइवेट अस्पतालों/क्लिनिकों और एम्बुलेंस सेवाओं की सूची रखी गई है, जिसमें उनके पते, उपलब्ध सुविधाओं और फोन नम्बर आदि का ब्यौरा दिया गया है।
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है। हम तथाकथित हिंदी प्रेमियों के लिए यह स्वर्णकाल होता है जब हम उनके बारे में कुछ लिख कर अपनी कलम का लौहा मनवाने की फिराक में रहते हैं। गोष्ठियां होती हैं, सभाएं होती हैं, राज्य सरकारें भी दो-चार इनाम देकर औपचारिकताएं पूरी कर लेती हैं और अखबारों में फोटो के साथ खूबसूरत चेहरे छप जाते हैं कि 'मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई'। इस दौरान वे लोग भी 'दो शब्द' कहने से पीछे नहीं रहते जिन्होंने शायद ही कभी मुंशी प्रेमचंद की कोई पुस्तक पढऩे की जहमत उठाई हो। नवलेखन से जुड़े कलमकार भी शब्दों की जुगाली कर लेते हैं। हिंदी लेखन के इस मसीहा के बारे में लिखते हाथ कांपते हैं क्योंकि हमारा लेखन कोई लेखन नहीं बल्कि खुद का नाम चमकाने की चाहत में घिसाई गई कलम है। मोटी पोथियां लिखकर उनपर भारी भरकम कीमत की चिप्पी चिपका कर अपने चहेतों को समर्पित करना ही लेखन हो गया है। स्वयं केंद्रित ऐसा लेखन कितने दिनों तक याद रहता है और उसमें पीड़ा, दुख, आंसू, आह, मुस्कान, हर्ष, उन्माद, प्रेम, ईष्र्या के भाव कितने वास्तविक होते हैं। एक किताब प्रेस में होती है तो तीन की पांडूलिपि मेज की दराज में। कुछ पन्ने मित्रों, परिजनों को भी सौंप दिए जाते हैं कि तुम भी लेखन कर लो, आपका नाम भी पुस्तक के कवर आ जाएगा। खैर उनकी वे जाने लेकिन आज उनकी जयंती के मौके पर श्रद्धांजलि स्वरूप हम एक छोटा सा विमर्श कर लेते हैं। मुंशी प्रेमचंद जी हिंदी साहित्य के ऐसे हस्ताक्षर हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पढ़ते हुए मैंने जाना कि क्यों प्रेमचंद जी कथा सम्राट हैं। अलमारियों में धूल भरी पीले पड़ चुके पन्नों वाली उनकी किताबें हाथों में लेते हुए एक निकटता का अहसास होता है और सालों के फासले पल में घट जाते हैं। कौन मानेगा कि घोर गरीबी में जीवन बीताने के बावजूद उन्होंने अपने लेखन के प्रभाव को कमतर नहीं होने दिया। लेखन से ही जब चुल्हा जलने की नौबत हो तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि लेखक किस दबाव में काम कर रहा है। हालांकि ईश्वर को शायद यही स्वीकार था कि वे इसी स्थिति में रहें क्योंकि भरे हुए पेट से किसी भूखे का मनोविज्ञान नहीं समझा जा सकता। कैसा दिलचस्प है कि प्रेमचंद जी ने आठ दशक पहले जो लिखा है वह आज भी प्रासंगिक है और कहीं न कहीं नई हालात में वे सभी पात्र जिंदा हैं। उन्होंने समाज के यथार्थ को मन की आंखों से देखा और उसे पन्नों पर उतार दिया।
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अन्य लोगों में भी निर्बलता पाई जाती है । इसके विपक्ष में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है । यदि मनुष्यों का निर्णय उनके दावे के अनुसार न्याय संगत होता है और वे निर्णय पर अधिकढ़ता से स्थिर रह सकते हैं तो किसी प्रकार आंशिक में इसका कारण यह बतलाया जा सकता है कि वे अपनी इन शक्तियों को अनवरत व्यवहार में लाते हैं और वे सब बातों की जानकारी रखते रहते हैं । व्यवहार के कारण ही मनुष्य पूर्ण बनता है। इसी प्रकार स्त्री भी पूर्ण बन सकती है। संपत्ति कार और प्रबन्ध कार्य से अधिक संसर्ग तथा जीवन में अधिक उलट-फेरों से अधिक अनुभव होता है और स्त्रियों तथा पुरुषों को इससे इस सर्व-विदित सिद्धान्त के अनुसार शिक्षा मिलती है कि मनुष्य भूलों से सीखता है इस कारण यह अच्छा है कि स्त्रियाँ अपना उसी प्रकार परिचय प्राप्त करें जैसा दूसरे उनसे परिचय रखते हैं और वे आत्मतुष्टि के संसार में संतुष्ट बनकर ही न पड़ीं रहें । हम स्त्रियों को समय पर ही एक चेतावनी दे देना चाहते हैं जिसका सम्बन्ध प्रत्येक परिवार के अर्द्ध दुखद रूप । से है हम चाहे जो कुछ कहें किन्तु हमें यह बात चिन्तापूर्वक वा शोकपूर्वक स्वीकार करती ही पड़ेगी कि हमारी स्त्रियाँ अपने बच्चों के साथ कुछ क्रूरता का उपयोग करती हैं। यह बात नहीं है कि पुरुष भी जब तब क्रूर नहीं होजाते किन्तु स्त्रियाँ अपने बच्चों के रात दिन के नटखटपन के कारण तंग आजाने के
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डाली। वह एक चट्टान का सहारा लेकर उठने का प्रयत्न कर रही थी। चंद्रवर्मा ने उसे अपने हाथ का सहारा दिया और किसी तरह खड़ा किया । चंद्रवर्मा भी अचानक कापालिनी को वहाँ पाकर चकित रह गया। उसे कल्पना तक न थी कि वह उस प्रदेश में कापालिनी को देख सकेगा । उसे अपने समीप पाकर चंद्रवर्मा अत्यन्त प्रसन्न हुआ और एकटक उसकी आँखों में ताकता रह गया । "चंद्रवर्मा, मुझे जिस दुर्भाग्य देवी ने ग्रास रखा है, लगता है उसी ने तुम्हें भी अपने फन्दे में कस लिया है। मांत्रिक शंखु ने इस आखिरी क्षण में हमारे सारे प्रयत्नों पर पानी फेर दिया। इस वक्त हम दोनों ही अपनी पहले की असहाय स्थिति में आगये हैं। हमने अपने निजी स्थानों को छोड़ा, अनेक मुसीबतों और ख़तरों का सामना किया और किसी तरह शंखु के पहाड़ तक पहुँचे भी, पर अंत में हमें निराशा और दुख ही हाथ लगे हैं।" कापालिनी ने कहा । कापालिनी के मुख से ये बातें सुनकर चंद्रवर्मा समझ गया कि उसका प्रयत्न विफल हो गया है। वह सरोवर में उठ रही ऊँची लहरों की ओर देखने लगा जो मंत्रगृह के गिरने के कारण उत्पन्न हो रही थीं । उसने गहरा निःस्वास छोड़ा और कापालिनी से पूछा, "क्या मंत्रगृह के साथ अपूर्व शक्तिवाला वह शंख भी सरोवर में डूब गया है ? क्या इसी कारण तुम इतनी निराश हो गयी हो, कापालिनी !" "हाँ, यही सच है ! शंखु के मंत्र-गृह में अपूर्व शक्तियों वाला शंख ही नहीं, बल्कि अत्यन्त महान शक्तियों से सम्पन्न और भी अनेक चीजें थीं। पर मैंने केवल उस शंख की ही कामना की थी। मैं चाहती थी उन अपूर्व शक्तियों वाली दूसरी असंख्य वस्तुओं से मैं तुम्हें तुम्हारे राज्य को वापस दिलवा दूँगी। तुम उनकी सहायता से अपने शत्रुओं को आसानी से जीत सकते थे। पर खेद की बात है कि अब वे सब इस मंत्रगृह के साथ सरोवर के अतल में में चली गयी हैं। अब तुम और मैं फिर से अपनी पूर्व स्थिति में ही आगये हैं।" कापालिनी ने
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सलूणी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संघणी की बैठक का आयोजन बुधवार को परिसर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने की। बैठक के दौरान पाठशाला में रिक्त चल रहे अध्यापकों के पदों से छात्रों को पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। और प्रस्ताव पारित कर सरकार व शिक्षा विभाग से जल्द रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई गई। शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने बताया कि संघणी पाठशाला में रिक्त अध्यापकों के पदों को भरने का मामला निदेशालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही संघणी पाठशाला में अध्यापकों के पद भर दिए जाएंगे। उन्हांेने एसएमसी कमेटी से संयम बरतने का आग्रह भी किया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संघणी पाठशाला की एसएमसी ने अध्यापकों के रिक्त पदों के चलते अल्टीमेटम दिया था कि अगर पांच दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई अमल में न लाई गई तो परिसर को ताला लगा देंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार व शिक्षा विभाग की होगी। एसएमसी के इस कड़े फैसले की भनक लगते ही बुधवार को शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने सदस्यों संग बैठक कर विभागीय पक्ष रखा। बैठक में पाठशाला की प्रिंसीपल कुमारी रीता, एसएमसी अध्यक्ष विमला देवी के अलावा सदस्य नूर मोहम्मद, रमेश, महबूब मीर, मोहम्मद फारुक के अलावा अभिभावकों में जाकिर हुसैन, सिराजू मागरा, असलम हुसैन, रणधीर चंदेल व ओमप्रकाश मौजूद रहे।
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यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई। यूपी के बदायूं जिले में तहसील प्रशासन के सिस्टम और अफसरों से तंग आकर तहसील परिसर में बुजुर्ग किसान ने जहर खाया और उसकी जान चली गई। किसान की मौत के मामले में अंतिम संस्कार की नौबत आई तो परिजन अड़ गये हैं कि तहसील के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने मुकदमा नामजद नहीं किया तो परिजनो ने पुलिस चौकी घेरकर बरेली-बदायूं हाइवे पर जाम लगा दिया है। बतादें कि एक दिन पहले तहसील परिसर में बुजुर्ग ने सल्फास खाकर जान दे दी थी। शुक्रवार की दोपहर में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र क गांव नगला शर्की बुजुर्ग किसान रूम सिंह का शव पहुंच गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां हुईं, तो परिजन जवाहरपुरी पुलिस चौकी पर पहुंचे और नामजद मुकदमा दर्ज करने की मांग की। परिजनों ने नायब तहसीलदार, लेखपाल सहित आधा दर्जन अधिकारी-कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। जिसके पर प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिये और अज्ञात में मुकदमा दर्ज करने का सिटी मजिस्ट्रेट बृजेश कुमार व सीओ सिटी आलोक मिश्र, एसडीएम सदर एसपी वर्मा करने कहा। वहीं पूर्वमंत्री आबिद रजा भी पहुंच गये परिजनों की बात को सुना है। मगर मुकदमा नामजद नहीं हुआ तो जवाहपुरी पुलिस चौकी को घेर लिया और उसके सामने मुरादाबाद-फर्रूखाबाद हाईवे, बरेली-मथुरा हाईवे को जाम कर दिया है। दूर-दूर तक जाम लगा है और राहगीर परेशान हैं। वहीं भारी मात्रा में पुलिस फोर्स पहुंच गया है।
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राजस्थान में झुंझुनूं जिले के मंडावा में कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी एवं खींवसर उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) उम्मीदवार नारायण बेनीवाल निर्वाचित घोषित किये गये है। रालोपा उम्मीदवार नारायण बेनीवाल (फाइल फोटो) रीटा चौधरी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सुशीला सिंगड़ा को करीब तीस हजार मतों से हराया। इसी तरह बेनीवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार हरेन्द्र मिर्धा को चार हजार से अधिक मतों से हराया। मतगणना में मंडावा में कांग्रेस प्रतयाशी शुरु से ही आगे रही और अंतिम दौर तक बढ़त बनाते हुए विजयी रही जबकि खींवसर में रालोपा और कांग्रेस में कई दौर में उतार चढाव रहा और आखिर में रालोपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। मंडावा में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीनी हैं जबकि खींवसर में रालोपा ने अपनी सीट बरकरार रखी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी के लिए मंडावा सीट पर जीत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के लिए खुशी का मौका लेकर आई है। देश भर में भाजपा के पक्ष में चल रही लहर का भी यहां असर देखा नहीं गया। नागौर जिले के खींवसर में रालोपा ने सीट बरकरार रखी लेकिन उसका उम्मीदवार जीत के लिए पांच हजार का आंकड़ा भी नहीं छू पाया। कांग्रेस की जीत का फायदा पार्टी को शहरी निकायों के चुनाव में भी मिल सकेगा। गहलोत सरकार को भी कामकाज चलाने में आसानी होगी। भाजपा के लिए विधानसभा उपचुनाव ज्यादा शुभकारी नहीं रहे क्योंकि पार्टी ने जहां मंडावा सीट खो दी वहीं खींवसर में भी उसका समर्थित दल रालोपा के उम्मीदवार नारायण बेनीवाल बड़े अंतर से नहीं जीत पाये। यहां भाजपा की अंतरकलह भी सामने आई। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चुनाव प्रचार में अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही तथा नवनियुक्त पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर हो गया। इन चुनाव में राजे के गुट की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया गया है। रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल अपनी साख बचाने में सफल रहे जबकि उनका मंडावा सीट जीताने का दावा खोखला साबित हुआ।
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रूसी में, शब्द "औपचारिक" हैकई मूल्य औपचारिक - यह हो सकता है और जो कि प्रपत्र से मेल खाता है, अर्थात, इसकी विशेषता है, और इस तरह से यह केवल एक मामले के बाहरी अभिव्यक्ति को अपने अस्तित्व के नुकसान के लिए देखता है। औपचारिक रूप से अक्सर कुछ कहा जाता है जो केवल दिखावे के लिए ही मौजूद है लेकिन क्या यह हमेशा शब्द "औपचारिक" है जिसका नकारात्मक अर्थ है? औपचारिक संचार को एक अलग तरीके से संपर्क कहा जाता हैमास्क। कि है, यह एक ऐसी स्थिति है जब आप वार्ताकार के व्यक्तित्व के कारण सुविधाओं में नहीं लेते हैं, कोई बेहतर इसे समझने की इच्छा है। औपचारिक, एक नियम के रूप में, राजनयिक या अन्य व्यावसायिक संबंध हैं, जहां संपर्क मजबूर हो जाता है और आधिकारिक स्तर पर सख्ती से होता है। इस संचार के साथ वार्ताकारों, विनम्रता, नम्रता, शिष्टाचार का एक मुखौटा का उपयोग करते समय सावधानी से मानक मुस्कान, इशारों और उसके असली रवैया के शरीर की गतिविधियों का एक सेट के पीछे छिपा। औपचारिक संपर्क औपचारिक रूप से निकट से संबंधित हैसंबंध जिसमें प्रत्येक के पदों को अग्रिम में जाना जाता है वे नियमों द्वारा निर्धारित होते हैं और नियमों से परे किसी भी निकास की अनुमति नहीं देते हैं। इस वजह से, एक व्यक्ति उन लोगों के साथ व्यक्तिगत संबंधों से बच सकता है जो संपर्क के लिए अप्रिय या अवांछित लग सकते हैं। सब के बाद, औपचारिक संबंधों के साथ, वार्ताकार, जैसेनियम बाहरी लक्ष्य पर केंद्रित होता है (उदाहरण के लिए, खरीदार विक्रेता संबंध में), और इस मामले में संचार केवल लक्ष्य को प्राप्त करने का एक तरीका है, और वार्ताकार इसे प्राप्त करने का साधन है। वैसे, अधिक क्रमादेशित ऐसे "उपकरण" का व्यवहार है, इसका उपयोग करना आसान होता है, इसके साथ व्यावसायिक संपर्क बनाए रखने के लिए। यह कहा जाना चाहिए कि एक विकसित समाज के लिएऔपचारिक संबंधों अत्यधिक किफायती हैं। वे भावनात्मक ऊर्जा और समय की खोज करने की कोशिश कर रहा, वार्ताकार के बारे में राय के उत्पादन, में और इतने पर उसे रखने के लिए इच्छा की आवश्यकता नहीं है। एन वे आप तुरंत वांछित परिणाम तक पहुंचने के बाद तुरंत कार्रवाई करने के लिए थोड़े समय के लिए संपर्क बनाने और वार्ताकार के बारे में भूल करने के लिए अनुमति देते हैं। "औपचारिक" की स्थिति वाले संबंध -यह एक समुदाय को एकल जीव में बदलने का एक तरीका है उसी समय, जो कोई भी स्थापित नियमों से परे नहीं जाता है, ऐसे रिश्तों को शरीर के एक घटक में रूपांतरित कर दिया जाता है, बदले में सुरक्षा, स्थिरता और एकता की भावना होती है, जो औपचारिक संबंधों का एक अन्य पहलू होता है। यदि आप ऐसे संबंधों के ढांचे के भीतर संवाद करते हैं, तोपरिणाम, भले ही यह पूरी तरह से ज्ञात नहीं है या फिर जरूरी नहीं है, फिर भी उम्मीद के अनुसार हो सकता है या माना जाता है। और इसका मतलब है - आप एक निश्चित तरीके से इसका उत्तर देने के लिए पहले ही तैयार कर सकते हैं। सब के बाद, अक्सर परिणाम ही हमें डरा नहीं, अर्थात्कुछ वह अनजान हो सकता है, और कोई व्यक्ति पर्याप्त रूप से जवाब नहीं दे पाएगा इसलिए, "औपचारिक" संचार का एक एल्गोरिथ्म है जिससे हमें संबंधों को बनाए रखने की अनुमति मिलती है, बिना कई छोटी चीज़ों को परेशान करने और परिणाम की आशंका। वर्णित संबंध खुद को अधीनस्थ कर सकते हैंबल्कि संगठन बनाने वाले लोगों के बड़े समूह। यह एक ऐसा समुदाय है जहां रिश्ते स्पष्ट रूप से संरचित हैं और चार्टर, नियमों और आंतरिक नियमों के अधीन हैं - यह एक औपचारिक संगठन है। यहां व्यक्ति मुख्य रूप से एक कार्यात्मक के रूप में कार्य करता है प्रत्येक ऐसे संगठन संबंधों की समझदारी, उनकी विशिष्टता और प्रतिरूपता में निहित है। यह राज्य एक ही औपचारिक संगठन है जिसमें कड़े तरीके से संरचित संबंध हैं और विधान के रूप में क़ानून है जो हर चीज को नियंत्रित करता है। लेकिन एक नागरिक एक आधुनिक राज्य में रह रहा हैहमें समाज के मौजूदा कानून के दो विकल्पों को याद रखना होगाः औपचारिक और वास्तविक। औपचारिक कानून कानून (अक्सर अपूर्ण) और न्यायिक प्रणाली (अक्सर पूरी तरह से विकसित और स्वतंत्र नहीं) पर निर्भर है, और इसलिए सार्वजनिक जीवन की अभिव्यक्तियों के सभी प्रकारों से सामना नहीं कर सकता। असली अधिकार परंपराओं का एक सेट है, आम तौर पर स्वीकार किए जाते हैं व्यवहारिक रूढ़िवादी और सार्वजनिक जीवन की दोहरावपूर्ण घटनाएं। और इसलिए औपचारिक और अनौपचारिक कानून अक्सर ओवरलैप नहीं करते हैं, जिसमें आवेदन के विभिन्न क्षेत्रों हैं।
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पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसकी एक सप्ताह की मियाद सोमवार को खत्म हो गई। जिसके बाद सख्त रुख दिखाते हुए कांग्रेस हाईकमान उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। उन्हें नोटिस भेजने वाले कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि सुनील जाखड़ को एक हफ्ते का वक्त दिया था। यह समय बीत चुका है। एक-दो दिन के अंदर अनुशासन समिति की मीटिंग होगी। जो भी संवैधानिक परंपरा है, उस हिसाब से उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उनका कांग्रेस से निलंबन, निष्कासन या नोटिस होगा, इसका अंतिम फैसला कमेटी लेगी। जाखड़ को दिल्ली भी तलब किया जा सकता है। हालांकि पार्टी के रवैये से खिन्न जाखड़ पार्टी भी छोड़ सकते हैं। सक्रिय पॉलिटिक्स से वह पहले ही किनारा कर चुके हैं। जाखड़ को पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी के बारे में विवादित टिप्पणी को लेकर नोटिस जारी हुआ था। जाखड़ की कांग्रेस हाईकमान से ज्यादा उनके दूतों से नाराजगी है। जिन्होंने हाईकमान को गलत फीडबैक देकर पिछले चुनाव में कांग्रेस का बंटाधार करवा दिया। पहले नवजोत सिद्धू को प्रधान बनाने के लिए अचानक उन्हें कुर्सी से हटा दिया। इसके लिए कोई वजह तक नहीं बताई गई। इसके बाद कैप्टन को हटा उन्हें CM बनाने की बारी आई तो सिख-हिंदू कार्ड खेल दिया गया। कांग्रेस ने पंजाब में फिर सिख-हिंदू के सियासी संतुलन के लिए भारत भूषण आशु पर दांव खेला है। लुधियाना के दिग्गज हिंदू नेता और सरकार में मंत्री रहे आशू को वर्किंग प्रधान बनाया गया है। वह पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ काम करेंगे। हालांकि आशू को भी जाखड़ ग्रुप का ही माना जाता है। उनको राहुल गांधी तक प्रमोट कर मंत्री पद पर पहुंचाने के पीछे जाखड़ को ही माना जाता है। पंजाब में कार्रवाई पर कांग्रेस हाईकमान की बेबसी साफ नजर आती है। चुनाव के वक्त पटियाला से कांग्रेसी सांसद परनीत कौर को भी नोटिस जारी हुआ था। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले पति कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए खुलकर प्रचार किया। हालांकि कांग्रेस हाईकमान उन पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं दिखा सका। इसी तरह कपूरथला से विधायक और मंत्री रहे राणा गुरजीत के बेटे राणा इंद्रप्रताप ने सुल्तानपुर लोधी से कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बदले भी कांग्रेस कार्रवाई नहीं कर सकी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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मोदी सरकार की आपत्तियों के बावजूद पाकिस्तान कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात करने से बाज नहीं आ रहा है। कश्मीरी अलगाववादी गुट हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुक ने रविवार रात पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात की। माना जा रहा है कि मीरवाइज ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच हुई बातचीत पर इस्लामाबाद का रुख जाना। साथ ही उन्होंने कश्मीर की जमीनी हकीकत से बासित को अवगत कराया। पिछले साल अगस्त में पाक उच्चायुक्त के कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात से नाराज भारत ने विदेश सचिव स्तरीय वार्ता रद्द कर दी थी। श्रीनगर से दिल्ली पहुंचने के बाद मीरवाइज ने कहा कि यदि आप कश्मीर में हिंसा खत्म करना चाहते हैं तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसका सैन्य समाधान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि हिंसा के जरिए इसका समाधान नहीं निकल सकता है। उनका कहना है कि इसके समकक्ष हमें राजनीतिक प्रक्रिया की भी जरूरत है ताकि हम इसके समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकें। हुर्रियत का मानना है कि कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है, यह कुशासन या सुशासन की समस्या नहीं है। मीरवाइज का कहना है कि यह एक क्षेत्रीय विवाद नहीं है। यह जनता का मामला है। पहले इसके समाधान के दिशा में कुछ आगे बढ़ने दीजिए, कुछ राजनीतिक पहल होने दीजिए। हम इस प्रक्रिया का समर्थन करने को तैयार हैं।
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लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखक के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश(Click to expand) धर मस्मावृत्त च्िग्यारी का शिखिर सप्राण-सा हो उसे अपनी ओर आह्वान कर रहा है । इस चित्र की भाव-गरिमा से मैं अवाक रह गया । चित्र क्या था कलाकार की कूँची से उसके जीवन की कहानी और उसके त्याग की महस्वाकांदा कला के प्रति उसका सगवे आत्म-समपंण । मैं अभिभूत रह गया उस महान उद्देश्य से परे लघु जीवन की बात क्या ? फिर भी शंकालु मस्तिष्क सें प्रश्न उठदी आता---कला की शक्ति जीवन में किस प्रकार चरितार्थ हो ? कलाकार ने अपना उत्तर रेखा के स्तरों में शिख चिवपट स्थिर कर दिया था । प्रश्न करने पर उसने कहा-- ँपेरे ऑंगन में एक दीपक जलता हैं । उस दीपक का आलोक बहुन दूर से भी दिखाई पढ़ता हे ओर समीप से भी । दीपक की लौ के समीप आते जाने से प्रकाश को उज्ज्वलता मिलती है और ध्ष्टि को सुस्पष्ट॒ता । परन्तु यह दीपक को श्राप कर लेना नहीं हैं । प्रकाश के इस केन्द्र में हूं झवल अध्े ।....जो तेल और बत्ती को जलाती है । दीपक की लो प्रकाश की श्रोर देखनेवाद् पथिकों की चिन्ता नहीं करती श्रोर दीपक जलता रहने के लिए तेल और बत्ती का जलते रहना आवश्यक है । कलाकार का शरीर दारिद्य ओर अवसाद से चीख होता गया। परन्तु उसके नघ्रों की प्रखरता बढ़ती गई । वह अपनी साधना में रत था । जितना ही गहरा मूल्य वह अपनी इस झाराघना के लिए अदा ऋर रहा था उसी अनुपात से उसकी निष्टा बढ़ती जा रही थी । जद शरद तर बहुत सुबह उठने का अभ्यास मुझे नहीं हैं विशेषकर माघ की सर्दी में । परन्तु पिछले दिन धकावट अधिक हो जाने के कारण समय से एक घंटे पूव सो गया था इसलिए उठा भी कुछ पहले । समय होने सं बरामद में सा सामने फुववाढ़ी की ओर देख रहा था माली कुछ करना भी ह या नहीं ।
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मोय रुपराशि दी है वह अवश्य ही नारीहृदय को लुभानेवाले हैं। मेरे हृदय में वह लोभ न हुआ ऐसा नहीं है। किंतु में उस दमन करना जानती हूं, में भला बुरा समझती हूं मेरा हृदय इतना अबोध नही है कि में पवित्र सुखके बदले में अपवित्र सुख प्रहण करू, स्वर्गीय आनन्द देकर घृणित वस्तु करीदूं तथा सुवर्ण के बदले पीतल लूं ,, मिना- पुत्र के लिये यदि सम्राट अकबर तुम्हारे पिता से अनुरोध करे तो यह अवश्य तुम्हारा विवाह सलीम के साथ करदेंगे । तब क्या होगा ? मेहरउन्निसा ने हंस कर कहा- इसके लिये में निश्चित हूं। अकबर के समान न्यायपरायण वादशाह अब नागदा कन्या का विवाह दूसरी जगह कराने को कहेगा यह असंभव है और पिता स्वीकार कर उस विवाह सबंध को तोड़ें यह भी असंभव है।' आमिनी- तुमसे अधिक बुद्धिमान और कोई नहीं है। अपन ल ब त नहीं सोच सकता। किंतु देखना बहिन, इसका दुःखद परि शाम न होवे । नेहरउन्निसा ने अपने मुगोल नवमीत चिनिन्दित कमनीय हाथों को ऊपर उठाया और प्रेमाश्र पूर्ण मृग-भवनों से ऊपर की ओर इष्टिपात कर कहा, "उसकी इच्छा । श्रमिनी चली गई, जगद्विख्यात सुन्दरी मेहरडमिसा वहीं बैठे अपने सर्विष्य की भावनाओं में डूब गई। त्रयोदश परिच्छेद । हृदय का विनिमय । बुम्बक जिस प्रकार सोहे को खीचता है उसी प्रकार एक हम भी दूसरे को खीचता है, वैज्ञानिकों ने स्थिर किया कि तड़ित शक्ति विशेष के सहयोग से चुम्बक में आकर्षण -शक्ति पैदा होती है, चुम्बक वस्तुतः लोहा विशेष है। हृदय के संबन्ध में भी वही बात है। इस संसार में भी हृदयों कर आकर्षण है, किंतु कितने कितनों के लिये मरते वा जीते हैं। कितने कितनों को हंसाले वा रुलाते हैं ? हाथ ! इस संसार में कौन किसकी चिंता करता है सब हृदय यदि दूसरे को चाहते, सब यदि सत्रकी चिता करते तो मनुष्यों देवता, हो जाते, संसार स्वर्ग हो जाता । सब मनुष्य एक होना सीखकर सारी मंत्रणा तथा ज्वालाओं को दूर कर सकता, किंतु ऐसा नहीं होता - सब सब को नहीं चाहते। एक हृदय से निकली हुए पवित्र सहित स्पर्श से यदि दूसरा हृदय लोकित हो तो, वे दोनों परस्पर आकर्षण- सूत्र में गुथ आते हैं। उसी को लोग प्रेम, पाय, स्नेह, ममता इत्यादि कहते हैं, वस्तुतः सब एक ही प्रकार की वृत्ति है - सब हृदय काभार्षय नाम है। स्वार्थत्याग इसका कार्य है । इस स्वार्थ त्याग से अधिक पवित्र और महत् कार्य उस छोटे मनुष्य जीवन में और कुछ नहीं है। इस क्षण भंगुर जीवन में जिन्होंने जितना अधिक स्वार्थ त्याग किया वे उतने आर्तनयवर हो युगा युगान्तर के लिये मनुष्य के हृदयों के द्वारा देवताबों सदृय पुजे जाते है । जिन्होंने समरक्षेत्र में देश स्वाधीनता के लिये प्राण दिये हैं. जिन्होंने अझ लोगों के भ्रमभजनार्थ निरंतर शरीरपास कर कर्तव्य कर्म-पालन का परिचय दिया है, जो दुःखी मानव के विपद उद्धारार्थ अपना सुख भूल गये, वे सब स्वार्थत्याग के ही वीर थे व सब व्यक्ति साधारण के दुख दुखत्था और को देखकर दुखा हुए थे। यह ऐसे देवताओं का नाम कभी नहीं मिट सकता । जो Fथार्थ त्याग की महिमा नहीं जानता उसको हृदय पत्थर का चना है वह दृष्य नाम के अयोग्य है स्वार्थ त्याग ही धर्म की मूल बृत्ति है, समाज संस्थिति का आधार है। बिना प्रेम के स्वार्थत्याग नहीं हो सकता। पिता पुत्र के ऊपर प्रेम करता है इसलिये पुत्र के संतोष के लिये वह अपना सुख नहीं देखता जननी ममता के वश होकर आप भूषी रहकर संतान को खिलाती है। महात्मा बुद्ध देव cret मात्र के प्रेम में मुग्ध थे इसीलिये राजपाट छोड़ने से तनिकन हिचके सुकरात संत्य के प्रेम में पागल थी इसीलिये जीवन तक दे देने में करता नहीं हुआ महाराणा प्रताप देश प्रेम में मवये इसीलिये वन बन भटकने में कुछ भी चिंतित न हुए, चैतन्य देवने में मका तत्व समझा था इसीलिये और किसी सुद्ध में उनके हृदय में स्थान न पाया। राममोहन धर्म पम में मुग्ध थे इसीलिये किली समाजिक क्लेश को उन्होने क्लेश न खमझा। यह सब प्रेम के लिये स्वार्थ त्याग की घटनाएँ है, अतपस धर्मों का मूल प्रेम अर्थात् स्वार्थत्याग । जो धर्म प्रेम के पथ को बुड़ा कर दूसरे उपाय से मुक्ति का पथ दिखाता है, वह पशुओं का धर्म है वह मनुष्य के ग्रहण करने योग्य नहीं । प्रेम में ही मनुष्य की मुक्ति है. प्रेम में ही उन्नति है, प्रेम में ही विकास है, प्रेम में ही सामन्द है तथा
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"लौदा पारस मिल्या न पलट्या तो बच लिच अंतर जाना । अ माधु मंगति करता कपटी ना पटानी । पारण मिल कर हम न हूँवा जिन मिल जनपद माही । तो लिकोई कहिए पारस दोष म साँही । पर लगन जिज्ञा की स्थिति लिहुन भिन्न क्या विपरीत है। लगन जिजास लानशील प्राणी होता है। वामी जी ने मान जिनुओं की नर मुद्धि प्राणी कड़ा है। जैसे हुमागियों की नगन होती है, वैसे ही इन जिनाओं की हरि मार्ग पर होती है। वैज्ञान में लीन तत्व विवारस होते हैं और मांग में समय व्यतीत करते हैं । अर्ध भाष और ममता की अषता की घोर निरंतर 'रामरडम* मैं रत रहते हैं "जैर्न लगन कलागा यूं हरि मारग में हाथ । रामवरण वे प्राणियां नरबुधि ये नाय । मर तुधि कहिये पाय जान गम तत्व विचार । सत्संगति में बैठ आपणा आप तारै । राम राम रमना रटै आई ममत मन घोय । जैरे लगन माग यूं हरि मारण पैहाय । 'लगन जिनाप की लगन का वर्णन करते अविना नहीं । जैरे साम के अधीन ह कर कार्म लग्नशीन होता है जैसे पराये धन पर चोर की आपली गाय का बछड़े सेना लगाव होता है, सीप की स्वाती में जो अतुर कि होती है, परिता नगर की और जेपी लीक पड़ती है, प्यापा पानी के लिए जिप प्रकार उथम रत रहता है दुधातुर नरोजन लिए जा मैहाल रहता है, चंद्रमा के लिए जर्म। आपक्कि नकार में एक हर्ति है, लोभी काम के लिए जिस प्रकार वानरत होता है और मेह के लिए मौर जितना आतुर होता है लगन आक या वातरता आाठी पवर लगन जिजाय की रामभजनमें रहती है --
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रात रात में ये ख़बर शहर के इस कोने से उस कोने तक फैल गई कि अतातुर्क कमाल मर गया है। रेडियो की थरथराती हुई ज़बान से ये सनसनी फैलाने वाली ख़बर ईरानी होटलों में सट्टे बाज़ों ने सुनी जो चाय की प्यालियां सामने रखे आने वाले नंबर के बारे में क़ियास दौड़ा रहे थे और वो सब कुछ भूल कर कमाल अतातुर्क की बड़ाई में गुम हो गए। इस ख़याल को बाद में उस ने मुस्तफ़ा कमाल पाशा की शानदार मुस्लमानी और इस बड़ाई में तहलील कर दिया। ये बात एक राहगीर ने सुन ली, उस ने दूसरे चौक में अपने दोस्तों से कही और एक घंटे में इन सब लोगों को जो दिन को सोने और रात को बाज़ारों में जागते रहने के आदी हैं, मालूम हो गया कि सुबह हड़ताल हो रही है। अब्बू क़साई रात को दो बजे अपनी खोली में आया। उस ने आते ही ताक़ में से बहुत सी चीज़ों को इधर उधर उलट पलट करने के बाद एक पुड़िया निकाली और एक देगची में पानी भर कर उस को इस में डाल कर घोलना शुरू कर दिया। "हाँ आ गया हूँ।" ये कह कर अब्बू ने अपनी क़मीज़ उतार कर देगची में डाल दी और उसे पानी के अंदर मसलना शुरू कर दिया। "जाने मेरी बला यह बड़ा आदमी कौन है........ पर ये तू क्या कर रहा है?" बीवी ने पूछा "सोता क्यों नहीं है!" क़मीज़ को काला रंग दे रहा हूँ.... सुबह हमें हड़ताल कराने जाना है।" ये कह कर उस ने क़मीज़ निचोड़ कर दो कीलों के साथ लटका दी जो दीवार में गड़ी हुई थीं। दूसरे रोज़ सुबह को स्याह पोश मुस्लमानों की टोलियां काले झंडे लिए बाज़ारों में चक्कर लगा रही थीं। ये स्याह पोश मुस्लमान दुकानदारों की दुकानें बंद करा रहे थे और ये नारे लगा रहे थे। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद! एक हिंदू ने जो अपनी दुकान खोलने के लिए जा रहा था ये नारे सुने और नारे लगाने वालों को देखा तो चुपचाप ट्राम में बैठ कर वहां से खिसक गया। दूसरे हिंदू और पार्सी दुकानदारों ने जब मुस्लमानों के एक गिरोह को चीख़ते चिल्लाते और नारे मारते देखा तो उन्हों ने झटपट अपनी दुकानें बंद कर लीं। दस पंद्रह स्याह पोश गप्पें हांकते एक बाज़ार से गुज़र रहे थे। एक ने अपने साथी से कहा। दोस्त हड़ताल हुई तो ख़ूब ही पर वैसी नहीं हुई जैसी मोहम्मद अली के टीम पर हुई थी.... ट्रामें तो इसी तरह चल रही हैं। इस टोली में जो सब से ज़्यादा जोशीला था और जिस के हाथ में स्याह झंडा था तिनक कर बोला। "आज भी नहीं चलेंगी! ये कह कर वो इस ट्राम की तरफ़ बढ़ा जो लकड़ी के एक शेड के नीचे मुसाफ़िरों को उतार रही थी। टोली के बाक़ी आदमियों ने उस का साथ दिया और एक लम्हा के अंदर सब के सब ट्राम की सुर्ख़ गाड़ी के इर्दगिर्द थे। सब मुसाफ़िर ज़बरदस्ती उतार दिए गए। शाम को एक वसी मैदान में मातमी जलसा हुआ। शहर के सब हंगामा-पसंद जमा थे। ख़वांचा-फ़रोश और पान बीड़ी वाले चल फिर कर अपना सौदा बेच रहे थे। जल्सा-गाह के बाहर आरज़ी दुकानों के पास एक मेला लगा हुआ था, चाट के चुनूं और उबले हुए आलूओं की ख़ूब बिक्री हो रही थी। "नहीं, नहीं। कमाल सोप अच्छा रहेगा........ भाई मुस्तफ़ा कमाल इस से बड़ा आदमी है।" ये कह कर उस ने अपने साथी के कांधे पर हाथ रखा। "आओ चलें जल्सा शुरू होने वाला है।" वो दोनों जल्सा-गाह की तरफ़ चल दिए। जल्सा शुरू हुआ। आग़ाज़ में नज़्में गाई गईं जिन में मुस्तफ़ा कमाल की बड़ाई का ज़िक्र था फिर एक साहब तक़रीर करने के लिए उठे। आप ने कमाल अतातुर्क की अज़मत बड़ी बलंद बाँग लफ़्ज़ों में बयान करना शुरू की। हाज़िरीन-ए-जल्सा इस तक़रीर को ख़ामोशी से सुनते रहे। जब कभी मुक़र्रिर के ये अल्फ़ाज़ गूंजते "मुस्तफ़ा कमाल ने दर्रा-ए-दानयाल से अंग्रेज़ों को लात मार के बाहर निकाल दिया।" या "कमाल ने यूनानी भेड़ों को इस्लामी ख़ंजर से ज़बह कर डाला।" तो "इस्लाम ज़िंदाबाद" के नारों से मैदान काँप काँप उठता। ये नारे मुक़र्रिर की क़ुव्वत-ए-गोयाई को और तेज़ कर देते और वो ज़्यादा जोश से अतातुर्क कमाल की अज़ीमुश्शान शख़्सियत पर रौशनी डालना शुरू कर देता। मुक़र्रिर का एक एक लफ़्ज़ हाज़िरीन-ए-जल्सा के दिलों में एक जोश-ओ-ख़रोश पैदा कर रहा था। जब ये अल्फ़ाज़ जल्सा-गाह में बुलंद हुए तो "इन्क़िलाब ज़िंदाबाद, इन्क़िलाब ज़िंदाबाद" के नारे पाँच मिनट तक मुतवातिर बुलंद होते रहे। "ये कुफ़्र बकता है।" जल्सा-गाह में एक शख़्स की आवाज़ बुलंद हुई और फ़ौरन ही सब लोग मुज़्तरिब हो गए। "ये काफ़िर है झूट बोलता है।" के नारों में मुक़र्रिर की आवाज़ ग़ुम हो गई। पेशतर इस के कि वो अपना माफी-अल-ज़मीर बयान करता उस के माथे पर एक पत्थर लगा और वो चकरा कर स्टेज पर गिर पड़ा। जल्से में एक भगदड़ मच गई।
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डीएम सुहास ने कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने की बात पर भी ज्यादा बल दिया। उल्लेखनीय है कि सोमवार को सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गौतमबुद्ध नगर जिले का दौरा किया था। दौरे का मकसद था जिले में कोरोना की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा। समीक्षा बैठक में मौजूद जिलाधिकारी बी. एन. सिंह, नोएडा विकास प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी सहित तमाम विभागों के अफसरों को सीएम ने आड़े हाथ ले लिया था। जब अफसरों ने मुख्यमंत्री को अपने किए हुए कार्य गिनाने चाहे तो वे बिफर पड़े। सीएम ने जिले की सरकारी मशीनरी को बुरी तरह लताड़ा। गुस्साये सीएम ने यहां तक कह डाला, 'बकवास बंद करो। तुम सब यहां राजनीति करते हो। " सूबे के सीएम के इस रुख को देखकर जिला प्रशासन के आला-अफसरों की घिघ्घी बंध गई थी। सीएम की इस मीटिंग से बाहर निकलते ही जिलाधिकारी (अब पूर्व) बी. एन. सिंह ने राज्य शासन से तीन महीने के लिए अवकाश पर जाने की अनुमति मांग ली। अवकाश पर जाने की अनुमति मांगते ही उनका वह गोपनीय पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आईएएस बीएन सिंह के पत्र का मीडिया में लीक होना, हुकूमत ने सरकारी सेवा और आचार संहिता का उल्लंघन माना। लिहाज यूपी सरकार ने पूरे मामले की जांच शुरू करवा दी। साथ ही बीएन सिंह को भी तत्काल गौतमबुद्ध नगर जिले के डीएम पद से हटाकर राजस्व विभाग में भेज दिया।
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होनेके साथ ही वे माकी रामायण लेकर पढ़नेकी संयुक्ताक्षर और मात्राएँ आ पड़नेपर मासे पूछकर उच्चारण मालूम कर लेते थे। उनकी स्मरणशक्ति बहुत तेज़ थी, दूसरी बार बतलानेकी ज़रूरत न होती थी । छै वर्षकी उम्र में रवीन्द्रनाथ पाठशालामें न बिठाये गये । उसकी पढ़ाई समाप्त करके वे जिला स्कूलमें भर्ती हुए । जिला स्कूलमें पढ़ते समय रवीन्द्र के दूसरे भाई स्वर्गीय प्रकाशचन्द्र मैलेरियासे बीमार होकर इलाजके लिए कलकत्ते लाये गये । माके साथ रवीन्द्र भी कलकत्ते आये। कलकत्ते में जब कोई हवा बदलनेके लिए सारा परिवार देवघर गया । देवघरमें मैत्र परिवारको सात महीनें रहना पड़ा। पिताने रवीन्द्रको देवघरके हाई स्कूलमें भर्ती करा दिया। नया स्कूल, नई पुस्तकें और बहुत थोड़ा समय होनेपर भी रविने सालाना परीक्षा पास ही नहीं की, बल्कि दर्जेमें अव्वल भी हुए। रवीन्द्रके पिता मास्टर रखकर लड़कोंको पढ़ानेके खिलाफ थे । वे अपने बच्चोंकोअपने बच्चोंको हो नहीं, दूसरोंके लड़कोंको भी - -स्वयं ही पढ़ाते थे। पिताका यह गुण रवीन्द्र में भी आया था, और उन्होंने निस्स्वार्थ भावसे अनेकों हिन्दू-मुसलमान छात्रों को पढ़ाने में बहुत काफ़ी परिश्रम किया था । देवघर छोटा नागपुर में एक पहाड़ी स्थान है। वहाँके प्राकृतिक दृश्य सुन्दर हैं, और उसके आसपास छोटा नागपुरकी आदिम जातियाँ - सन्थाल आदि-बसी हुई हैं। यहींपर पहले पहले बालक रवीन्द्रका परिचय प्रकृतिसे हुआ था, और यहींपर पहले-पहल आदिम जातियों के सम्पर्कने उनपर प्रभाव डाला था। आगे चलकर उन्होंने अपना जीवन इन्हीं आदिम जातियोंकी सेवामें लगा दिया था ।
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रसों का राशीकरण जहाँ तक देखने-सुनने मे ग्राया, और विद्वानो से पूछने पर जान पड़ा, इस विषय पर किसी ग्रन्थकार ने विचार नहीं किया, कि यह सब रस सर्वथा परस्पर भिन्न और स्वतन्त्र हैं, अथवा इन का राशीकरण हो सकता है, 'परा' 'अपरा' जाति के सम्बन्ध के अनुसार । किसीकिसी ने रसों की संख्या घटाने चढ़ाने का यत्न तो किया है । यथा, 'वात्सल्य' रस दसवाँ है, ऐसा कोई मानते हैं । परमेश्वर की, अथवा किसी भी इष्टदेव की, नवधा 'भक्ति' के रस को भी अलग मानते हैं । कोई कहते हैं कि सब रस चमत्कारात्मक 'अद्भुत' के ही भेद है । पर विद्रलोकमत ने नौ को ही मान रक्खा है, और जो नये बताए जाते हैं, उन का वह इन्हीं मे इधर-उधर समावेश कर लेता है। पर इन नौ का जन्म कैसे ; एक से दो दो से चार, इत्यादि क्रम से, पर वापर 'सामान्यों' की, ये नौ 'ग्रपर' जाति या 'विशेष' सन्तान है या नहीं ? इन प्रश्नो पर विचार नहीं मिलता । और बिना 'विशेष' र 'अपरा जातियां' को 'सामान्य' की कवार मे संग्रह किये, चित्त को सन्तोष नहीं, शास्त्र मे शास्त्रता नहीं । यहा भूतपृथग्भावम् एकस्थम् अनुपश्यति, तत एव च विस्तारं, ब्रह्म सम्पद्यते तदा । (गीता ) पृथक्ता को एकता में स्थित, एकता को पृथक्का मे विस्तृत, जब पुरुष जान लेता है, तब उस का वह्म, अर्थात् वेद, अर्थात् ज्ञान, संपन्न, संपूर्ण, होता है, तथा तब पुरुष, अर्थात् जीव, चूह्ममय, ब्रह्मरूप, निष्पन्न हो जाता है । इस लिये इस प्रश्न पर विचार करना उचित है । 'रस' पदार्थ सब नौ रसों का 'सामान्य' स्पष्ट ही है । 'रस' के स्वरूप की भी मीमांसा करने से स्यात् पता चले, कि इस एक से सद्यः नौ की पृथक्-पृथक् उत्पत्ति हुई, अथवा एक से दो या तीन, और दो या तीन से चार या छः या नौ, इस क्रम से 'परा अपरा जाति और 'विशेष' के रूप से जन्म हुआ । 'रस' का मुख्य ग्रथं 'जल' 'द्रव' है । 'रस' का अर्थ सहस्रगुणम् उत्स्रष्टुम् श्रादत्तं हि रसं रविः । (रघुवंश ) जैसे सूर्य, जो 'रस', जल, पृथ्वी पर से सोखता है, उस का सहस्र गुना वर्षा काल मे लौटा देता है, वैसे सच्चा सदाचारी राजा, जो बलि, कर, प्रजा से लेना है, उस सत्र को उसी प्रजा की भलाई के लिये प्रजा पर ही व्यय करता है, अपनी आरामतलवी और ऐयाशी बदमाशी मे नहीं । मरकोषं मे जल के पर्यायों में 'धन-रस' है। ग्राम का रस; ईख का रस; पान का रस, अनार, अंगूर, नारंगी आदि का रस - यह सब उस के 'विशेष' है । रसक 'आस्वादन', चपण, ( फारमो मे 'चोइन' ), धीरे धीरे 'चखने' से, जो 'अनुभव' हो, उस को भी 'रस' कहते हैं । यदि भूखा बच्चा जल्दी-जल्दी श्रम खा जाय, तो उस को 'स्वाद' तो अवश्य ग्रावेगा ही, पर, भूख की मात्रा अधिक और स्वाद की मात्रा कम होने से, 'रस' नहीं, आवेगा । खा चुकने पर, जब उस के मुँह पर मुस्कुराहट और आँखों मे चमक देख पड़े, और वह कहे कि 'बढ़ा मीठा था', तब जानना चाहिये कि उस को 'रस' आया । खाते वक्त भी, कवलों को जल्दी जल्दी निगल न जाय, एक-एक लुक्रमे को ज़बान पर देर तक रख कर, चुभला कर, चना कर, चर्वण कर, उस का जायका ले र पहिचाने और कहे कि इस का ऐसा और उमदा ( या खराव ) जायका है, तो भी उस को 'रस' ( या कु-रस' ) ग्रा रहा है } ऐसे ही, दो मनुष्य, क्रोध मे भरे, एक दूसरे पर खनों से प्रहार कर रहे हों, तो दोनो का 'भाव' रौद्र वश्य है, पर उन को रौद्र का, 'रस' नहीं रहा है; किन्तु, यदि एक मनुष्य, दूसरे को गहिरा (गभीर) घाब पहुँचा कर काम करके, ठहर जाय और कहे - 'क्यों, और लड़ोगे, फिर ऐसा करोगे, तो समझ गए न ?', तो उस को रौद्र 'रस' ग्राया, ऐसा जानना चाहिये । दो लड़के कुश्ती लड़ते हैं; शोर करते हुए, हाँफते हुए, दाँत पीस कर, एक दूसरे को गिरा देने, हरा देने, के जतन मे तन मन से लगे हैं; उन को. 'वीर-रस' नहीं, 'वीर-भाव' है । पर एक लड़का दूसरे को पटक कर अलग खड़ा हो जाता है, और कहता है, 'क्यों, कैसा 'भाव' और 'रस' का भेद पटका'!; अब इस को 'वीर-रस' या दूसरे को लज्जा या क्रोध का 'भाव' हुआ; लड़ते समय दोनो को 'वीर-भाव' था; लेकिन अगर, गर, लड़ते वक्त भो, बीच बीच मे, मुस्कुराते हुए, एक दूसरे से कहें कि, 'देखो, अच तुमको पटकता हूँ', तो उस समय उन को 'वीर रस भी रहा है । किसी दुःखी दरिद्र को देख कर किसी के मन मे करुणा उपजे और उस को धन दे, वा अन्य प्रकार से उस की सहायता करे, तो दाता को करुणा का, दया का, दुःखी के शोक मे अनुकंर्पा, अनु-क्रोश, अनु शोक, ( हम्-दर्दी, अंग्रेज़ी 'सिम्-पैथी' ) का 'भाव' हुआ, पर 'रस' नहीं आया; यदि सहायता कर चुकने के बाद उस के मन में यह वृत्ति उठै - 'कैसा दुःखी था, कैसा दरिद्र था, कैसा कृपापात्र था', तो जानना कि उस को करुण रस आाया । महापुरुष की कथा को सावधान सुनना, और उस के प्रति भक्ति का 'भाव' उपजना भी, 'रस' नहीं; पर मन में यह वृत्ति उदित होना कि 'वाह, कैसे लौकिक उदार महानुभाव चरित हैं, इनके सुनने से हृदय मे तत्काल कैसी उत्कृष्ट भक्ति का संचार होता है, कैसे सात्विक भाव चित्त मे उदित होते हैं ' - यह, बहुमान और भक्ति से संबद्ध - 'अद्भुत रस' का ग्राना है । किसी को किसी दूसरे से किसी विषय मे तीव्र ईर्ष्या, मत्सर, का 'भाव' उत्पन्न हो, पर उस के वश हो कर वह कोई अनुचित कार्य न कर बैठे, और उस भाव की वर्त्तमानता मे ही, अथवा उस के हट जाने या मंद हो जाने पर, अपने से या मित्रों से कहे - 'कैसा दुर्भाव था, क्या-क्या पाप करा सकता था', तो जानना कि उस को, ईर्ष्या से सम्बद्ध, मनुष्य के चित्त की विचित्रता, 'अद्भुतता' का 'रस' या; अथवा यदि चित्त की क्षुद्रता पर अधिक ध्यान गया, और 'ग्लानि' का, 'निवेद' का, भाव बढ़ा, तो वैराग्य और 'शांत' रस वै। पहलवान अपनी भुजा को देखता, ठोंकता, और प्रसन्न होता है, अपने बल का 'रस' लेता है । सुंदर स्त्री पुरुष अपने रूप को 'दर्पण' मे ('दर्पयति इति दर्पण ) देखकर आनंदित होते हैं, 'मै ऐसा रूपवान्, ऐसी रूपवती, हूं', अपने रूप का 'रस' लेते हैं। ऐसे दर्प के भाव से सम्बद्ध तीन 'रस' कहे जा सकते हैं; 'श्रृंगार' ( 'मदन' का एक नाम 'कं-दर्प' भी है ), 'सुख-दुःख' थौर 'आनन्द 'हास्य' ( अपनी श्रेष्ठता पर. प्रसन्न होने से ), और 'वीर' भी ('इस विषय मे मैं ने दूसरों को दबा दिया है, मेरे मुक्काविले का कोई नहीं है'; "भुवनत्रयसुभ्र वां, सौ, दमयन्ती कमनीयता मदं, उदियाय यतस् तनुश्रिया, दमयन्तीति ततोऽभिधां दधौ" ( नैषध ), विदर्भ के राजा भीम की बेटी का ( जिस का विवाह निषध के राजा नल से हुआ ) नाम 'दमयन्ती' हुआ । क्यों ? इस लिये कि जन्म लेते ही उस ने अपने सर्वोत्कृष्ट सौन्दर्य से तीनो लोकों की सुन्दर से सुन्दर स्त्रियां के, कमनीयता सुन्दरता के, मद का, अभिमान का, दमन कर दिया । 'मद', 'गर्व', 'दर्प' ही, 'वीर-रस' का 'भाव' है; और वह कई प्रकार का होता है, ऐश्वर्य-मद् बल-मद, रूप-मद, धन-मद, विद्या-मद, ग्राभिजात्य-मद ( ऊंचे कुल मे जन्म का ), इत्यादि । जैसे बच्चे तीती वस्तु को चीख कर 'सी-सी' करते हैं चीखना चाहते हैं, अर्थात् यदि यति मात्रा मे तीतापन नहीं है तो उस मे दुःख मानते हुए भी सुख मानते हैं, सो दशा साहित्य के उन रसों की है जिन के 'भाव' - यथा भय, बीभत्स, आदि- 'दुःख'- द भी हैं, पर उन के 'स्मरण' मे ('सुख' मय नहीं तो 'ग्रानंद' - मय, 'रस' उठता है। 'ग्रानन्द' और 'सुख' में सूक्ष्म भेद है । क्यों सुख मे भी जीवात्मा को 'आनन्द मिलता है, और दुःख से भी ( सुख नहीं ) 'ग्रानन्द' मिलता है, तथा भयानक और बीभत्स आदि कथाओं में क्यों 'रस' मिलता है - इस का विस्तार से विचार करने का यत्न, 'दि सायंस श्राफ दि इमोशन्स' नाम की अंग्रेज़ी मे लिखी पुस्तक मे, मै ने किया है। थोड़े मे, 'मै हूँ', आत्मा को अपने अस्तित्व का अनुभव करना ही, 'ग्रानन्द' है। परमात्मा, सब सान्त भावों का, 'विद्या' द्वारा निषेध कर के, 'मै मैं ही हूँ, मै से अन्य कुछ भी नहीं हूँ', इस अनन्त 'आनन्द' का सदा एकरस खंड स्वाद लेता है। जीवात्मा, 'विद्या' द्वारा सान्त भावों कोढ़कर, 'मै यह शरीर हूँ', शरीर की सभी अवस्थाओं और क्रियाओं से अपने अस्तित्व का अनुभव करता है, चाहे वह अवस्था या क्रिया सुखमय हों या दुःखमय हों; बल्कि, दुःख मे अपने अस्तित्व का अनुभव तीव्र हो जाता है; प्रसिद्ध है कि सुख का वर्ष दिन बराबर, दुःख का 'बुद्धिपूर्वक भावों का श्रास्वादन' दिन वर्ष बरावर । तत्रापि, काम-क्रोध यादि क्षोभात्मक भावों मे अपने अस्तित्व का अनुभव अधिक तीक्ष्ण होता है । 'काममयः एवायं पुरुपः', 'चित्तं वै वासनात्मकम्', 'काममयः', 'इच्छामयः', इच्छान्तर्गत - सर्वप्रका रक-काम-क्रोध-लोमादि-प्रेम-मैत्री-त्यागादि-मयः जीवात्मा' । अत एव, इच्छा, वासना, तृष्णा, के क्षय से मोक्ष अर्थात् परमात्म-भाव सिद्ध होता है । सुख दुःख दोनो से ( विशेष अर्थ मे ) 'ग्रानन्द' होता है; ( "जो मज़ा इन्तिज़ार मे देखा, वो नहीं वस्लि यार मे देखा "; . ( " विपदः सन्तु नः शश्वत् तत्र तत्र, जगद्गुरो !, भवतो दर्शनं यत् स्याद् पुनर्भवदर्शनं" ) कुन्ती ने कृष्ण से कहा, हे जगद्-गुरो, हमारे ऊपर विपत्ति पर विपत्ति पड़े, यही अच्छा है, क्योंकि, तत्र हम आप को सच्चे हृदय से याद करेंगे, और का दर्शन पायेंगे. जिस के पीछे, फिर से, भव का, जनन-मरण का दर्शन न होगा । काव्य मे 'भयानक' 'बीभत्स' यदि केवन से आनन्दात्मक सृहणीय 'रस', दो प्रकार की विरुद्ध प्रकृतियों के, तवीयतों के, लोगों को उठता है, और वे उस को शौक़ से, ज़ौक़, जायके, रस, से, मन्त्रिपूर्वक, सुनते पढ़ते है । एक क़िस्म वह जो अपने मे भयकारक बीभत्सोत्पादक बलवान् की सत्ता का 'स्मरण', वाहन, कल्पन, कर के, वह रस चलते हैं जो खल को अपने बल का प्रयोग, दुर्बलों को पीढ़ा देने के लिये करने से होता है, विद्या विवादाय, धनं महाय, शक्लिः परेषां परिपीड़नाय, खलस्य; साधोर् विपरीतम् एतत्, ज्ञानाय, दानाय, च रक्षणाय । दूसरी प्रकृति के लोग, पीड़ित, भयभीत, बीभत्सित के भाव का, अपने मे उद्भावन चिंतन कर के, उस के साथ अनुकम्पा के करुण रस का, और दुट के ऊपर क्रोध घृणा आदि के रस का, यास्वादन करते हैं, और सचमुच दुःखी इस लिये नहीं होते, कि निश्चय से जान रहे हैं, कि यह सब मिथ्या कल्पना है, कहानी है, वास्तव में यह कष्ट हम को नहीं है । साधुसजन की विद्या, धन, बल, तो ज्ञान, दान, दुर्बल रक्षा के लिये है। निष्कर्ष यह कि बुद्धिपूर्वक अनिच्छापूर्वक, 'स्वाद' नहीं, किन्तु बुद्धिपूर्वक इच्छापूर्वक, "की अनुशायिनी चित्तवृत्ति का नाम पशु भी 'रस' लेते हैं 'रस' है । 'भाव' ( क्षोभ, संरंभ, संवेग, उद्वेग, आवेग, आवेश, जोश, जज़ूबा, अँगरेज़ी 'ईमोशन' 'पैशन') का अनुभव 'रस' नहीं है; किंतु उस अनुभव का 'स्मरण', 'रसन', रस है । 'भाव-स्मरणं रसः' । और स्वा दन का रूप यह है - 'मै क्रोधवान् हूँ' ('ग्रहं- क्रोधवान् अस्मि' ), 'मै (ग्रहं ) करुणावान् हूँ', 'मै शोकवान् हूँ', 'मै भक्तिमान् हूँ', 'मै ईर्ष्यावान हूँ', 'मै बलवान् हूँ', 'मै सुरूप हूँ' । अर्थात् 'मै हूँ' - यही रस का सार-- तत्त्व है, 'रस-सामान्य' है । ऐतरेय ब्राह्मण मे कहा है, "... पुरुषे तु एव विस्तरां आत्मा, स हि प्रज्ञानेन सम्पन्नतमः, विज्ञातं वदति, विज्ञातं पश्यति... ( पशवः ) न विज्ञातं वदन्ति, न विज्ञातं पश्यन्ति,. . . " । पशु जानते हैं, देखते हैं, पर यह नहीं जानते कि हम जान, देख, बोल रहे हैं। मनुष्य जानता, देखता, बोलता है, और साथ ही, यह भी जानता है कि हम जान, देख, बोल रहे हैं । इस लिये पुरुष मे आत्मा का आविर्भाव सब प्राणियों से अधिक है, उस मे ज्ञान भी है और प्रज्ञान भी है। आत्मज्ञान का प्रारम्भ मनुष्ययोनि मे पहुँच कर, जीव को होता है । इसी लिये "मोक्षस्तु मानवे देहे" । ऐसा ऐतरेय ब्राह्मण मे कहा तो सही है, कि पशु "न विज्ञातं वदन्ति", पर इस को भी "वैशेष्यात् तु तद्वादः", सापेक्ष उक्ति जानना चाहिए । पशु सर्वथा इस प्रकार के 'प्रज्ञान' से रहित ही हैं, ऐसा नहीं कह सकते; क्योंकि वे 'खेलते' हैं, और "खेलना', 'क्रीड़ा', 'लीला', का मर्म 'आत्मानुभव रस' ही है । मुँह से, व्यक्त वाणी से, वे यह नहीं कह सकते हैं कि हम को यह यह अनुभव हो रहा है; पर ऐसा कह सकने का बीज उन मे है अवश्य; बल्कि, व्यक्त नहीं तो अव्यक्त स्पष्ट विविध प्रकार की ध्वनियों से, ग्रावाज़ों से, कह्ते भी हैं; कुत्ते के खेलने के मिथ्या भूँकने और और सचमुच गुस्से के भूँकने और गुर्राने मे, बहुत भेद होता है। ऐसे प्रज्ञान के, कसकने के, वीज़ का पशुओं मे भी होना उचित ही है, क्योंकि वे भी तो परमात्मा, चैतन्य की ही कला है। और यह सत्र अनन्त जगत् ( 'पुनः पुनः गच्छति, जंगम्यते, सदा गच्छत्येव, इति जगत् ' ), अनन्त संसार ( 'संसरति इति', PIA KIL A
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भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाना क्षेत्र के आरा-अरवल मुख्य मार्ग पर खरौनी गांव के समीप दो बाइक की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। हादसे में सवार दंपती समेत चार लोग घायलों हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद एक की हालत को चिंताजनक देते हुए पटना रेफर कर दिया गया है। जबकि अन्य घायलों का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। घायलों में एक बाइक पर सवार टाउन थाना क्षेत्र के सी. के. रोड तरी निवासी कमलेश प्रसाद चौरसिया का पुत्र गोलू चौरसिया, नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव निवासी व उसका मौसेरा भाई सोनू कुमार एवं दूसरे बाइक पर सहार थाना क्षेत्र के नानउर गांव निवासी संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी शामिल है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि संतोष कुमार अपनी पत्नी गुड़िया देवी के साथ एक बाइक पर सवार होकर नानउर गांव से आरा की ओर आ रहे थे। वहीं, गोलू चौरसिया अपने मौसेरे भाई सोनू कुमार के साथ अपने घर सी. के. रोड चौधरियाना से नारायणपुर थाना क्षेत्र के धोबड़ी गांव जा रहा था। इसी बीच उदवंतनगर थाना क्षेत्र के खरौनी गांव के समीप दोनों बाइक में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। जिससे चारों बाइक से गिर पड़े और गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लाया गया। जहां से प्राथमिक उपचार करने के बाद सोनू कुमार की हालत चिंताजनक देखते हुए पटना रेफर कर दिया गया। जबकि गोलू चौरसिया, संतोष कुमार एवं उसकी पत्नी गुड़िया कुमारी का इलाज आरा सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सम्पत्तिमान् वैश्यों ने बढ़ाई है, वहाँ शश्वत-हिमधारी सर्वो पर्वतराज हिमालय, गुणकारी विविध औषधियों और बहु. मूल्य वनस्पतियों के वन, मनोहर मानसरोवर और शुभ्रसलिला सुरसरिता भी उस की अनुपम असीम शोभा और अद्वितीय दिव्यता के कम कारण नहीं हैं। इस समय अगणितगुणगरिष्ठा गंगामाता और उसका पुण्यक्षेत्र आर्यावर्त में अव तरण वा आगमन ही इन पंक्तियों का विषय है। यूँ तो विस्तृत भारतवर्ष में बहुत सी विपुल जल धरा सततप्रवाहा नदियाँ विद्यमान हैं, पर गंगा माता की गुणगरिमा और महिमा उन से कोसों दूर है। माता का महामहिम पद गङ्गा के लिए ही व्यवहृत है और सुरसरिता वा देवधुनी भी वही कहलाती है। यह बात बड़े हेतुओं के बिना नहीं है। वैसे तो अन्य देशों के निवासी भी अपने उपकारी जलथल आदि पदार्थों में अपने पालक पोषक सम्बन्धियों का आरोप उपचार वा लक्षणा वृत्ति से करते हैं। अरब निवासी अपने सर्वोपकारक खजूर तरुका फूफीजान कहते हैं। अंग्रेज़ Thames नदी को Father Thames वा पिता टेम्स कह कर आदर देते हैं। पर माताका सर्वातिशायी मानास्पद पद गङ्गा के लिए ही प्रयुक्त है। माता सन्तान का जो लालन पालन करती है, सुतों में उसका जो असीम स्नेह होता है, वह दूसरे सम्बन्धियों से अशक्य और दुर्लभ है। उसीप्रकार गङ्गाके अगण्यगुणगणसमन्वित सलिलसे गङ्गा-तीर-निवासी जनों का जैसा लालन, पालन और स्वास्थ्य संपादन होता है, वैसा अन्य अलाशयों से कदापि संभव नहीं है अतः गङ्गा में मातृत्व का भारोप सर्वथा समुचित और युक्तियुक्त है। मातृकृत लालन पालन के मुख्य गुणों को लेकर कविताकी भूमि भारत में पौराणिक षडानन
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पिछले अगर दो एपिसोड के मुकाबले देखा जाए तो ये रॉ का एपिसोड थोड़ा बहुत ठीक रहा। ओपनिंग सैगमेंट और मेन इवेंट मैच शानदार था। मेन इवेंट में सैथ रॉलिंस और बैरन कॉर्बिन के बीच जो मैच हुआ, इस मैच ने फैंस का दिल जीत लिया। काफी दिनों बाद ऐसा मैच देखने को मिला। इस बार शो की शुरूआत सैथ रॉलिंस ने की। सैथ ने बैरन कॉर्बिन पर कई आरोप लगाए, जिसके बाद उन्होंने मैच के लिए भी कह दिया। बैरन ने भी इसे स्वीकार कर लिया। सैथ रॉलिंस ने ब्रॉक लैसनर को भी इस बार नहीं छोड़ा और उनकी बेइज्जती कर दी। इसके अलावा भी कई सैगमेंट और मैच यहां देखने को मिल। चैड गेबल और बॉबी रूड ने रॉ टैग टीम चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। ऑथर्स ऑफ पेन को उन्होंने हराया। ये बड़ी जीत इन दोनों के लिए है। मैकइंटायर ने भी अपना खतरनाक रूप यहां पर दिखाया। जिगलर को उन्होंने मात दी। रोंडा राउजी और नाया जैक्स का भी आमना-सामना हुआ। रोंडा काफी गुस्से में आज थी। यहीं वजह थी कि नाया को उन्होंने बैरीकेट से बाहर फैंस के बीच डाल दिया। कई दिनों बाद मेन इवेंट मैच काफी अच्छा रहा। सैथ रॉलिंस और कॉर्बिन के बीच टेबल,लैडर्स, चेयर्स मैच हुआ। इस मैच में रैफरी हीथ स्लेटर थे। उन्होंने अंत में बैरन का साथ देने की कोशिश की लेकिन सैथ ने इसका मौका नहीं दिया। ये मैच इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप के लिए था। सैथ रॉलिंस ने ये मैच जीत लिया। फैंस ने भी इस रॉ को देखकर जबरदस्त रिएक्शन ट्विटर पर दिया। (सैथ रॉलिंस और बैरन कॉर्बिन का मैच शानदार था। ) (पिछले कई महीनों में सैथ और बैरन का ये मुकाबला सबसे बेहतरीन था। ) (पिछले दो हफ्ते के मुकाबले देखा जाए तो ये रॉ काफी अच्छी रहीं। ) (मंडे नाइट रॉ की शानदार वापसी। ) (इस हफ्ते की रॉ काफी अच्छी थी। ) (पिछले हफ्ते के मुकाबले ये रॉ अच्छी थी। सभी सुपरस्टार्स ने अच्छा काम किया। ) (विंस मैकमैहन और रॉ ने इस बात को मान लिया की रॉ में मजा नहीं आ रहा था। सैथ रॉलिंस ने पहले पार्ट में इस बात ही बात की। ) (मेन इवेंट काफी शानदार था। ) (डीन एंब्रोज इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियन बन जाएं तांकि सैथ रॉलिंस इसके बाद यूनिवर्सल चैंपियन बने। और वो रोज रॉ में आएं। ) (आज की रॉ इतनी अच्छी थी कि अब टीएलसी पीपीवी को अच्छे से देखा जा सकता है। )
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यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ वालेरी ज़ालुज़नी ने पर्याप्त हवाई समर्थन के बिना यूक्रेनी सेना द्वारा जवाबी कार्रवाई शुरू करने का विरोध करना जारी रखा है, सामान्य पश्चिमी लड़ाकों के आगमन की प्रतीक्षा करने और उसके बाद ही एक आक्रामक अभियान शुरू करने की मांग करता है। ज़ेलेंस्की का कार्यालय उनसे सहमत नहीं है। ज़ालुज़नी फिर से प्रेस और टीवी चैनलों की नज़रों से ओझल हो गई, किसी को यह आभास हो जाता है कि लंबी अनुपस्थिति के बाद जनरल को फिर से दिखाया गया और हटा दिया गया। वास्तव में, ज़ालुज़नी जगह में है, लेकिन चूंकि वह वास्तव में जवाबी कार्रवाई के मुद्दे पर वर्तमान सरकार के विरोध में है, इसलिए उसे पूर्ण कमान तक पहुंच से रोक दिया गया था। यूक्रेनी संसाधनों के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ स्पष्ट रूप से हवाई समर्थन के बिना जवाबी कार्रवाई शुरू करने के खिलाफ हैं, यूक्रेन के पास बस आवश्यक संख्या में विमान और हेलीकॉप्टर नहीं हैं जो अग्रिम जमीनी इकाइयों को कवर करने में सक्षम हैं, जो Zaporozhye दिशा में हाल की घटनाओं से साबित हुआ। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन के सशस्त्र बलों द्वारा खोए गए यूक्रेनी बख्तरबंद वाहनों के थोक को सेना और परिचालन सामरिक द्वारा खटखटाया गया था। विमानन. इसी समय, यह ज़ालुज़नी है जो "दबाव के बिंदु" रणनीति के लेखक हैं, जिसमें यूक्रेन की सशस्त्र सेना पूरी फ्रंट लाइन पर हमला करती है, रूसी सेना को खोजने के लिए जितना संभव हो उतना फैलाने की कोशिश कर रही है कमजोरी और इस क्षेत्र में पहले से ही हड़ताल। जनरल के आदेश से, समूहों की कमान ने भंडार तैयार करना शुरू कर दिया, जो एक सफलता बनाने के लिए लड़ाई में शामिल होने के लिए तत्परता से अग्रिम पंक्ति के पीछे स्थित हैं। इससे पहले, ज़ालुज़नी ने रूसी सशस्त्र बलों की कमान को मोर्चे के इस क्षेत्र पर सटीक रूप से आक्रामक शुरुआत करने का आभास देने के लिए खेरसॉन दिशा में एक बार में कई लैंडिंग ऑपरेशन करने की योजना बनाई थी। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ इस रणनीति को अपनाएंगे या नहीं यह अभी तक ज्ञात नहीं है।
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इस पद से बाल-मनोविज्ञान पर क्या प्रकाश पड़ता है? 'उसके अंदर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए, हामिद की आनंद भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी।'- इस कथन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि आशा का प्रकाश मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भव्य पुरुष ने कहा- 'जहाँ अंधकार है वहीं प्रकाश है।' इसका क्या तात्पर्य है? 'खानाबदोश' कहानी में आज के समाज की किन-किन समस्याओं को रेखांकित किया गया है? इन समस्याओं के प्रति कहानीकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए। 'अन्न ना भावे नींद ना आवे' का क्या कारण हैं? ऐसे स्थिति क्यों हो गयी हैं? पठित पाठ के आधार पर सूरदास के काव्य की विशेषताएँ बताइए। 'ईदगाह' कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे ईद के अवसर पर ग्रामीण परिवेश का उल्लास प्रकट होता है। फुले दंपति ने, स्त्री समस्या के लिए जो कदम उठाया था, क्या उसी का अगला चरण, 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', कार्यक्रम है? उसकी आँखों में पानी भरा था। जैसे उनमें एक शिकायत थी, पक्षपात के प्रति तिरस्कार था।' क्यों? 'मानो भ्रातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।' इस कथन के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'धर्म तोड़ता नहीं जोड़ता है।' 'सपना' कवित्त का भाव-सौंदर्य लिखिए। खेल में कृष्ण के रूठने पर उनके साथियों ने उन्हें डाँटते हुए क्या-क्या तर्क दिए? कृष्ण ने नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव क्यों दिया? उदाहरण देते हुए दोनों पदों के काव्य सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य का वर्णन करें? 'खेलने में को कोको गुसैयाँ' पद में कृष्ण और सुदामा के बीच किस बात पर तकरार हुई? खेल में रूठने वाले साथी के साथ सब क्यों नहीं खेलना चाहते? "कौन राह हैं जाई"का प्रश्न कबीर के सामने भी था इस तरह का प्रश्न समाज मे आज भी मौजूद हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें? "बालाम आओ हमारे गेह रे "मे कवि किसका आह्वान करता हैं और क्यों? "कामिन को हैं बालाम प्यारा, जो प्यासे को नीर रे" से कवि का क्या आशय हैं स्पष्ट कीजिये? कबीर निर्गुण संत परम्परा के कवि हैं और ये पद (बालम आओ हमारे गेह रे)साकार प्रेम क़ी और संकेत करता है अपने विचार प्रस्तुत करें? "अरे इन दोहून रह न पायी" साईं कवि का क्या आशय है?
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संबंधित डिग्री कॉलेज के शिक्षकों द्वारा आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में एलुमनाई मीट कार्यक्रम के दौरान पूरे विश्व विद्यालय में अपना विरोध यात्रा निकाला। इस कार्यक्रम के दौरान गुआकटा के अध्यक्ष के डी तिवारी ने कहां के वर्तमान कुलपति तानाशाह है। वह शिक्षकों का शोषण कर रहे हैं। साथ में छात्रों का भी। आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से शोषण किया जा रहा है। पुरातन छात्रों के कार्यक्रम के नाम पर धन की लूट की जा रही है। पुरातन छात्र मतलब जो गोरखपुर विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद अन्य क्षेत्र में अपना कार्य कर रहे हैं। या शिक्षा क्षेत्र में ही कार्य कर रहे हैं। यहां पर जो वर्तमान में छात्रा उनसे भी और शिक्षकों से भी इस कार्यक्रम के नाम पर धन की डिमांड की जा रही है। वहीं संघ के वर्तमान महामंत्री धीरेंद्र सिंह ने कहा कुलपति पूरी तरह से निरंकुश है। ना तो मुख्यमंत्री की बात मानते हैं। और ना ही प्रबंध समिति की। आए दिन शिक्षकों का शोषण होता रहता है। शारीरिक और मानसिक रूप से। कुलपति द्वारा दुर्व्यवहार भी किया जाता है। हम अपनी मांग से तब तक नहीं हटेंगे जब तक कुलपति के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की जाती है। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा। विश्वविद्यालय को पूरी तरह से लूटने के प्रयास में है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
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मंगलवार को इंडोनेशियाई सैन्य एयरबेस पर मृत पाए गए तीन रूसी इंजीनियरों को एक अज्ञात दवा से मार दिया गया था। यह इंडोनेशियाई पुलिस के आधिकारिक प्रतिनिधि इस्कंदर हसन ने कहा था। हसन ने कहा, "सर्गेई वोरोनिन, अलेक्जेंडर पोलटोरक और विक्टर सफोनोव एयरबेस के छात्रावास में पाए गए थे। संभवतः, उन्होंने कुछ अज्ञात दवा ली थी। " एक अन्य संस्करण के अनुसार, जिसे इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रेस सचिव ऐ वयान मिड्यो द्वारा आवाज दी गई थी, इंजीनियरों को वोदका द्वारा जहर दिया जा सकता है। ब्रिगेडियर जनरल मिडियट ने कहा, "अगर वे रूस में बहुत सारा वोदका पीते हैं तो कोई समस्या नहीं है, क्योंकि यह वहां ठंडा है, लेकिन मकासर में बहुत गर्म है। " हालांकि, जकार्ता में रूसी दूतावास के प्रतिनिधि, व्लादिमीर प्रोनिन ने इस संस्करण को अस्वीकार कर दिया। "वे वोदका से नहीं मरते हैं," रूसी राजनयिक ने कहा। जैसा कि व्यापारिक समाचार पत्र वेजग्लाद याद दिलाता है, मंगलवार को सुबह इंडोनेशिया से तीन रूसी लोगों की मौत की खबर आई। बाद में, उनकी मौत की पुष्टि इंडोनेशिया में रूस के महावाणिज्य दूत ने की थी। इंजीनियरों के लिए मृत्यु का एक प्रारंभिक कारण कार्डियक अरेस्ट है। इसके कारण वर्तमान में स्थानीय पुलिस और रूसी विशेषज्ञों के एक जटिल आयोग द्वारा स्थापित किए जा रहे हैं। Komsomolsk-on-Amur में, मृतकों के काम के मुख्य स्थान पर, एविएशन प्रोडक्शन एसोसिएशन (KnAAPO) को अभी तक उनकी मृत्यु का सही कारण नहीं पता है। "मौत का कारण अभी तक स्थापित नहीं किया गया है। एक चिकित्सा परीक्षण किया जा रहा है," इंटरफैक्स ने सर्गेई मेशचेरीकोव को पकड़े हुए सुखोई के आधिकारिक प्रतिनिधि के शब्दों का हवाला दिया। उन्होंने कुछ मीडिया में दिखाई देने वाली जानकारी पर टिप्पणी की कि इंडोनेशिया के एक अस्पताल में KnAAPO के दो और कर्मचारियों को जहर दिया जा रहा है। "हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है," मेस्चेरीकोव ने कहा। सभी मृतक सुखोई डिजाइन ब्यूरो के इंजीनियर थे और इंडोनेशिया से रूस से इस देश द्वारा हासिल किए गए लड़ाकू विमानों की सेवा के लिए आए थे। मकसर में इंडोनेशियाई एयरबेस "सुल्तान हसनुद्दीन" पर काम किया गया था।
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कानून प्रणाली की अवधारणा और संरचना प्रस्तुत की जाती हैएक कानूनी और सैद्धांतिक संरचना और मानकों, साथ ही उद्योग और संस्थाओं जो इन मानकों को एकजुट सहित श्रेणियों। सैद्धांतिक व्याख्या के अनुसार, मुख्य रचनात्मक तत्व आदर्श है। कानूनी प्रणाली की संरचना में विभिन्न प्रावधान शामिल हैं विभिन्न सामाजिक संबंधों को विनियमित करते समय उनका उपयोग किया जाता है एक ही समय में वहाँ विनियमन की विशेषताओं और रिश्ते की बारीकियों के बीच कुछ वैध संबंध रहे हैं। तो, सही संरचना है कि इसी तरह के संबंधों के नियमन आदेश के नियम हैं प्रदान करता है। तदनुसार, एक साथ उद्योग और संस्थानों में सभी नियमों के अनुशासन के भीतर। एक कानूनी संस्था मानदंडों का एक समूह हैएक आदेश जो कि समाज में एक विशिष्ट प्रकार के रिश्ते को विनियमित करता है इस प्रकार, नागरिक कानूनी संबंधों के क्षेत्र में संपत्ति की कानूनी संस्था एक प्रकार के मानदंडों के रूप में प्रस्तुत की जाती है, जो संपत्ति से संबंधित संबंधों को एकजुट करती है और विनियमित करती है। सिविल कानून और अन्य कानूनी शाखाओं के अन्य संस्थानों को भी इसी तरह परिभाषित किया गया है। उद्योग उसी क्रम के मानदंडों के एक सेट को संदर्भित करता है, जिसे एक निश्चित प्रकार के सामाजिक संबंधों को विनियमित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कानून की संरचना, इसलिए, एक ही उद्योग के भीतर संस्थाओं द्वारा व्यक्त एक प्रजाति अंतर प्रदान करता है। अंतर मानदंडों के समूह के बीच अंतर है जो अपेक्षाकृत स्वतंत्र हैं। मूल कानून की शाखाओं और मानदंडों की स्थापनाप्रारंभिक कर्तव्यों और संबंधों के नियमन के विशिष्ट क्षेत्र में विषयों के अधिकार। इसी समय, प्रक्रियात्मक प्रावधान और शाखाएं प्रक्रियाओं और प्रक्रियाओं को ठीक करती हैं, जिसके अनुसार प्रक्रिया संबंधी कानूनी संबंधों में प्रतिभागियों के भौतिक मानदंडों, कर्तव्यों और अवसरों का एहसास होता है। प्रक्रियागत प्रावधान, उप-क्षेत्र, उद्योग औरसंस्थान कानून प्रवर्तन के विभिन्न चरणों में विभिन्न अभिनेताओं के रिश्ते की आवश्यक कानूनी निश्चिन्तता प्रदान करते हैं, प्रावायुस्तोनिवेटेलनॉय और कानून प्रवर्तन गतिविधियों। इन मानदंडों के लिए धन्यवाद, कानून की संपूर्ण संरचना स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को प्राप्त करने के क्षेत्र में कानूनी गारंटी प्राप्त करती है। क्षेत्रों के भीतर उप-क्षेत्र बनते हैं उसी समय, कानून की संरचना सामग्री क्षेत्रों के भीतर उपयुक्त प्रक्रियात्मक या भौतिक उप-क्षेत्रों के गठन का अनुपालन करती है। कानूनी साहित्य में विभाजनएक सार्वजनिक और निजी दिशा पर अनुशासन इसलिए, सार्वजनिक कानून की शाखाओं को परिभाषित किया गया है इनमें संवैधानिक, प्रशासनिक, नागरिक प्रक्रियात्मक, आपराधिक, आपराधिक प्रक्रिया मानदंडों का एक जटिल शामिल है। निजी कानून की शाखाओं में शामिल हैं, उदाहरण के लिए, नागरिक। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जनता की जुदाई औरअनुशासन में एक निजी दिशा रोमन वकीलों द्वारा लिया गया था सार्वजनिक मानदंडों के जटिलता को अलग करने वाले सिद्धांत के अनुरूप था जिस पर रोमन न्यायशास्त्र आधारित था। अनुशासन के विषय विषय में (सामान्य रूप में कानून के अध्ययन के साथ) सार्वजनिक प्राधिकरण का उचित अध्ययन (राज्य की कानूनी व्याख्या और समझ)
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लाभ होता है ऐसी मान्यता छोड़कर अपने स्वभाव में एकाग्रता करना सो उसका लाभ इन्द्रियोंके विषयभूत पदार्थोंको जीतना अथवा सम्यकदर्शन है, और यही भगवानकी सच्ची स्तुति है । प्रश्नः- इसमें कहीं भी भगवानका तो नाम ही नहीं आता और मात्र आत्मा ही आत्माकी वात है, तब फिर इसे भगवानको स्तुति कैसे कहते हो ? उत्तरः - यहाँ भगवानकी निश्चय स्तुतिकी बात है । निश्चयसे तो जैसा भगवानका जात्मा है वैसा ही स्वयं है, इसलिये निश्चय में आत्माकी ही वात आती है। परकी स्तुति ( भगवानका लक्ष ) निश्चय स्तुति नहीं है, किन्तु शुभराग है। पूर्ण स्वभावकी प्रतीति करना ही भगवानको निश्चय स्तुति है, यही आत्मधर्म है । अपने लिये तो स्वयं ही भगवान है, इसलिये निश्चयसे जो अपनी स्तुति है सो वही भगवानकी स्तुति है। भगवान में और अपने में निश्चयसे कोई भी अन्तर माने तो वह भगवानकी स्तुति नहीं कर सकता । दृष्टि में असंग चैतन्य स्वरूपको स्तुति की सो वह जितेन्द्रिय हो गया । अपने अलग स्वरूपको दृष्टि करने पर सभी पर पदार्थोको और विकारको अपनेने पृथक् जानना ही जितेन्द्रियता है । यहाँ टीकामें द्रव्येन्द्रिय भावेन्द्रिय और इन्द्रियोंके । विषयभूत पर पदार्थोंको जीतने की बात क्रमशः की गई है, परन्तु उसमें कोई क्रम नहीं होता । जहाँ अपने स्वभावकी ओर उन्मुख हुआ कि वहाँ तीनोंका जोतना एक ही साथ होता है । यहाँ जीतनेका अर्थ उन पदार्थोंका दूर ढकेल देना नहीं है, और न उन पर द्रव्योंमें कोई परिवर्तन ही करना है, किन्तु अपना लक्ष अपनी ओर करके उन्हें लक्षनेंसे दूर करना है । उन सबकी ओरके लक्षको छोड़कर स्वभावका लक्ष किया हो यही उनका जीतना है । द्रव्येन्द्रियोसे खण्ड-खण्ड रूप ज्ञानसे या ज्ञेय पदार्थों श्रात्माका •सम्यकुदर्शनादि कार्य कर सकता है। ऐसी मान्यता यशावक
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दद्दाजी को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा 'मध्यप्रदेश के महान संत, आध्यात्मिक गुरु,लाखों लोगों के जीवन को दिशा देने वाले, ऐसे महात्मा जिनका सम्पूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित था, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति व आशीर्वाद से लोगों की ज़िंदगी बदल दी, ऐसे पूजनीय दद्दाजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ'। श्रद्धेय दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का एक ऐसा अभियान चलाया जिससे अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा हुई और भारतीय संस्कृति को एक ही धागे में पिरोने का पवित्र कार्य हुआ। दद्दाजी का देवलोकगमन आज हुआ है, उनका आशीर्वाद मुझे सदैव मिला और वे आज भी मुझे आशीर्वाद और प्रेरणा देते दिखाई दे रहे हैं। वे भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन वे सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे, आशीर्वाद देते रहेंगे और हमें सन्मार्ग दिखाते रहेंगे। उनके चरणों में प्रणाम। रविवार को संत देवप्रभाकर शास्त्री के दर्शन करने कई दिग्गज नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रमेश मेंदोलो, सहित कई दिग्गज नेता और अभिनेता निवास पर पहुंच के गुरु के स्वास्थ्य की जानकारी ली । दद्दा जी द्वारा पूरे भारत के कई स्थानो पर शिवलिंग निर्माण एवं भागवत यज्ञ करवा चुके है।
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इस मैच में वो सब कुछ था जो एक फैन देखना चाहता था, इस मैच की शुरुआत फिन बैलर के डीमन किंग अवतार से हुई, जैसे ही फिन बैलर ने रिंग में एंट्री ली प्रसंशको ने डीमन किंग का जोरदार स्वागत किया. फिन बेलर के डीमन किंग अवतार के बाद ब्रे वायट की रिंग में एंट्री हुई, उनके एंट्री लेते समय पुरे एरिना में अँधेरा व्याप्त था और उनके हाथ में एक लालटेन थी, जैसे ही अँधेरा खत्म हुआ ब्रे वायट रिंग में पहुँच चुके थे. दोनों रेसलर के रिंग में पहुँचने के बाद जैसे ही बेल बजी शुरू हुआ महामुकाबला, फैन्स का पूरा समर्थन फिन बैलर के नाम रहा, एरिना में मौजूद फैन्स फिन बैलर के नाम की चैंट करते रहे, पुरे मैच के दौरान दोनों ने फैन्स का पूरा मनोरंजन किया, कभी फिन बैलर, ब्रे वायट पर हावी रहे, तो कभी ब्रे वायट फिन बैलर पर हावी होते नजर आये. इस मैच का अंत काफी नाटकीय अवतार में हुआ, इसी दौरान एक पल ऐसा आया जब ब्रे वायट रिंग में उल्टा होकर पैर उपर कर हाथ के बल चलना शुरू कर दिया, लेकिन तभी फिन बैलर खड़े हुए और ऐसा देख ब्रे वायट डर गये, जिसका फायदा उठा फिन बैलर ने स्लिंग ब्लेड मारा और फिर ब्रे वायट को एक जोरदार किक मार यह मैच अपने नाम किया.
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Ranchi: रांची के पंडरा ओपी क्षेत्र के बजरा के रहने वाले ओम प्रकाश सिंह उर्फ विजय सिंह ने पत्नी से झगड़ा के बाद मायके जाने की वजह से फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली. उनका शव सोमवार बजरा स्थित घर से बरामद किया गया. मृतक ओम प्रकाश एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में चालक था. वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला था. बताया जा रहा है कि विजय सिंह अत्याधिक शराब का सेवन करता था. शराब पीने के बाद प्रतिदिन पत्नी से झगड़ा कर मारपीट किया करता था. जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्ट का माल लेकर ओम प्रकाश को कहीं जाना था, लेकिन वह कंपनी पहुंचा नहीं. मालिक व अन्य कर्मी उसे लगातार फोन कर रहे थे. जवाब नहीं मिलने पर उन्हें संदेह हुआ. इसके बाद कंपनी के लोगों ने उसके भाई ललन सिंह से बात की. वह विजय के घर गया. दरवाजा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला. इसके बाद ललन ने दरवाजा तोड़ा तो देखा कि विजय फंदे से झूल रहा था. सूचना मिलने के बाद पंडरा ओपी की पुलिस मौके पर पहुंची. शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया. मामले में ललन के बयान पर यूडी केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. पुलिस के अनुसार विजय सिंह शराब के नशे में अक्सर पत्नी के साथ झगड़ा किया करता था. बीते शनिवार की रात भी उसने पत्नी के साथ झगड़ा किया. इस दौरान उसने पत्नी की पिटाई भी कर दी. इसके बाद रविवार को पत्नी अपने बच्चों के साथ बेड़ो स्थित मायके चली गई. इसकी जानकारी विजय को भी दी थी. मायके जाने की वजह से फोन पर विजय ने पत्नी को गाली-गलौज भी किया. शाम में वह घर पहुंचा. फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली.
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आलिया भट्ट ने वरुण धवन को भले ही कई बार अपना नज़दीकी दोस्त माना हो लेकिन उन्होंने अपने दिल की पसंद साफ़ ज़ाहिर कर दी है. करण जौहर के चैट शो 'कॉफ़ी विद करण' में आलिया भट्ट ने कहा कि वो रणबीर कपूर की दीवानी हैं. आलिया भट्ट ने कहा, "मैं रणबीर कपूर को बहुत पसंद करती हूं. उनकी दीवानी हूं. मैं तो उनसे शादी भी करना चाहती हूं. " इसी एपिसोड में आलिया के साथ आई थीं अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा. परिणीति ने अपनी पसंद बताते हुए कहा, "मुझे सैफ़ अली ख़ान बहुत पसंद हैं. मैं उनके लिए कुछ भी कर सकती हूं. " परिणीति ने ये भी बताया कि वो तो करीना कपूर से भी इस बात का ज़िक्र कर चुकी हैं कि उन्हें, करीना के पति से प्यार है. इस पर करीना ने कहा, "इट्स ओके. " 'मनोज कुमार को मिले सम्मान' इस साल भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फालके के लिए मनोज कुमार, जीतेंद्र, माधवी मुखर्जी, वहीदा रहमान और कमल हासन के नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं. लेकिन लेखक सलीम ख़ान ने इसके लिए मनोज कुमार के नाम की वकालत की. सलीम ख़ान कहते हैं, "मनोज कुमार इस सम्मान के सबसे बड़े हक़दार हैं. देशप्रेम पर फ़िल्में बनाना आसान नहीं है. उन्होंने न सिर्फ़ ऐसी फ़िल्में बनाईं बल्कि वो बेहद कामयाब भी रहीं. उनकी फ़िल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले. " संजय लीला भंसाली की सुपरहिट फ़िल्म 'गोलियों की रास लीला राम-लीला' के बाद अब रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की जोड़ी फिर से लौट रही है संजय लीला भंसाली की ही अगली फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' में. 'राम-लीला' के बाद रणवीर और दीपिका की कथित नज़दीकियों के काफ़ी चर्चे हुए. दोनों ने खुले-आम एक दूसरे के प्रति अपनी चाहत ज़ाहिर तो नहीं की लेकिन ये ज़रूर कहा कि वो एक दूसरे को पसंद करते हैं. इनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने जो प्यार दिया उसी की वजह से भंसाली इस जोड़ी को रिपीट करना चाहते हैं. (बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
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पा ? या यह मेद बास पदार्थों में तो नही मेरी मानसिक अवस्था म है ? किमी वस्तु को सुन्दर रहने का अर्थ यह है कि उसके सम्पर्क में माने पर हमें प्रम भमा होती है। प्रसनवा यो अन्दर की बबस्था है बाहरी पदार्थों का गुण नही। भारम में बच्चा अन्दर-बाहर का मेद कर नही सत्ता मानबगावि भी अपने बचपन में ऐसा करने के योग्य होती है। गुमो के साथ हम उमो को भी बाहर से यस्ता समझ है। सेंटायना के विचार में सौर्य-अनुभव में हम बोडे काल के लिए, के फिर उसी मारभिक अवस्था में जा पहुंचते है। 'सौवर्य बह ये है जिसे हम अपन बन्दर नही अपितु बाहर देखते है। यह भान्ति जोड़ी बेर रहती है, परन्तु जिवनी शेर रहती है बहुत मुखर होती है। बुद्धि में बायर्स रचना की शक्ति है। इस * प्रयोग से बह गध के नीरस जयत् के साथ बविता के जमी भी रचना कर देती है। नसा एक ऐसी रचता है । बुद्धि प्राकृत प्रवृत्तियों की नही यह उन्हें मेल-मिलाप र साम्प बनाती है। बुद्धि प्रवृत्तियो और विजय पा समोम है इन दोना में बोई एवं जा जीवन को सफल नहीं बना सकता । वज्ञान म सायना डिमानाइटस का मनुमायी था। जयत् में जो कुछ हो रहा है परमाणु प्राकृत नियम म्याप है। ना मी रिमो तरह प्रगट हो गयी है परन्तु यह प्रकृति में व्यवहार में किसी प्रकार नही दे मरती । भवना किमी शिया का सामन मही यह पता से रोष चित्र बनाती है और उगम प्रगमता बूम सेती है। माजविराम का माम है। विकासबाद के अनुसार वो वस्तुमा शक्ति प्रस्ट नहीं होती बम से मनायम मही रहती जबरनि उमसे बिराम म महामना न मिळती हो । यदि चेतना कुछ भी पानी नहीं तो नी प्रश्न हुई? और स्पर्म हामे पर भी सभी मवारी होनाम लगयता बातिर ही नहीं यूनानीमा और महुजा था। उसे मन में विश्वाग
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राजस्थान के राजसमंद जिले में कुछ अज्ञात आसामाजिक तत्वों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया। शरारतियों रात के अंधेर में पत्थर मार बाबा साहिब की उंगलियों को तोड़कर नीचे गिरा दिया। इस घटना का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा है। लोगों में इसको लेकर जमकर आक्रोश है। राजसमंद (राजस्थान). राजसमंद में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बाबा साहब की मूर्ति को खंडित करने पर ग्राम वासियों में जबरदस्त आक्रोश है, जिसको लेकर ग्राम वासियों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। आपको बता दें कि राजस्थान के राजसमंद जिले के रेलमगरा थाना इलाके में स्थित चावंडिया चौराहे पर लगी बाबा साहब की मूर्ति को किसी अज्ञात द्वारा पत्थर मारकर खंडित किया गया है। गांव के लोगों का कहना है कि रात के समय में बाबा साहब की मूर्ति पर पत्थर मारकर खंडित की गई है, जिसमें बाबा साहब के हाथ की उंगलियां टूट कर नीचे गिर गई है। तो वहीं इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है और रेलमगरा थाने में अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अंदर लिखा गया है कि यह कृत्य करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। तो वही लोगों को शांत करवाते हुए रेलमगरा थाना पुलिस ने कहा है जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही राजसमंद जिले के श्रीनाथजी की नगरी नाथद्वारा में विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा स्थापित हुई है। जिसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेश से भी टूरिस्ट आ रहे हैं। हर तरफ खुशियों का माहौल है, लोग जश्न मना रहे हैं। वहीं सत मुराबी बापू की कथा सुनने के लिए भी लोगों की भीड़ लग रही है। लेकिन कुछ आसामाजिक तत्वों ने बाबा साहिब की मूर्ति को खंडित कर माहौल खराब करने की कोशिश की है। जिसको लेकर लोगों में जमकर गुस्सा है।
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गीता जयंती महोत्सव की शुरुआत हवन-यज्ञ और मंत्रोच्चारण से हुई। सांसद नायब सिंह सैनी व विधायक लीलाराम ने हवन-यज्ञ में पूर्ण आहूति डाली और मंत्रोच्चारण के बीच हमारी सामाजिक और आध्यात्मिक परंपरा का निर्वाह करते हुए प्रवचनों को भी सुना। हवन-यज्ञ के बाद सांसद और विधायक ने सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंंभ नारियल तोड़कर किया। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति द्वारा लगाए गए आध्यात्मिक पंडाल में ज्योति प्रज्वलित की और इसी के साथ ही उन्होंने एक-एक करके सभी स्टॉलों का अवलोकन किया। सांसद नायब सिंह सैनी ने इस मौके पर अपनी अभिव्यक्ति में कहा कि गीता जयंती महोत्सव हमारी संस्कृति और सभ्यता को उजागर करता ही है और साथ ही हमारे पुरखों और पूर्वजों ने हमें जो सीख दी है उसको आगे बढ़ाने की जरूरत है। विधायक लीला राम ने कहा कि कुरूक्षेत्र गीता की जन्म स्थली है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सांसद नायब सिंह सैनी और विधायक लीला राम ने ज्योति प्रज्वलित करके की। जिला प्रशासन द्वारा सांसद और विधायक को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। मलिक, कार्यकारी अधिकारी हिमांशु लाटका, राहुल शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। गीता जयंती समारोह स्थल पर यज्ञ-हवन की व्यवस्था डॉ. मनोज शर्मा द्वारा करवाई गई। आचार्य रामकुमार शर्मा, राधेश्याम, मुकेश, राजेश, विनायक, शुभम सहित समाजसेवी संस्थाओं और ऐच्छिक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य विद्वान भी मौजूद रहे। नगाड़ा पार्टी, कच्ची घोड़ी, लौंग मैन, बीन-बांसुरी, हरियाणवी आर्केस्ट्रा, शिव नृत्य ने दर्शकों को खूब मंत्र मुग्ध किया।
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मेष- आज ऑफिस में शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा। व्यापार में थोड़ी सी लापरवाही करना भारी पड़ सकता है। छात्रों को सफल होने के लिए कई मौके मिलेंगे। युवा अपने लक्ष्य के बजाय दूसरी चीजों पर ज्यादा ध्यान देंगे। परिवार के साथ हंसी-खुशी के पल बिताएंगे। वृषभ- आज नया काम शुरू करने के लिए स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी। कार्यक्षेत्र में मेहनत के मुताबिक फल न मिलने से मन उदास रहेगा। छात्रों की शिक्षा के क्षेत्र में कोई बाधा उत्पन्न हो सकती है। पारिवारिक मामलों में टांग अड़ाना मुश्किल में डाल देगा। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन- आज ऑफिस के किसी काम से बाहर जाना पड़ सकता है। व्यापार में मुनाफे के योग बन रहे हैं। छात्रों के लिए अच्छा समय आने की भी संभावना है। युवा रुके हुए कामों को निपटाने की कोशिश करेंगे। परिवार की सहमति के बिना कोई भी कदम न उठाएं। कर्क- आज कार्यक्षेत्र में अपने काम की गोपनीयता बनाएं रखना ही बेहतर होगा। बिजनेस के लेन-देन के मामले में बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सकारात्मक समाचार मिलेंगे। घर में किसी महत्पूर्ण काम को लेकर भाग-दौड़ लगी रहेगी। सिंह- आज कार्यक्षेत्र में काम में मदद करने के लिए विरोधी भी हाथ मिलाते हुए नजर आएंगे। व्यापार में नए लोगों से संपर्क बढ़ना काम को आगे ले जाने में सहायक होगा। युवा अपनी मेहनत पर विश्वास रखें और प्रयास करते रहें। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में सफल होंगे। कन्या- आज कार्यक्षेत्र में सब काम सही से कर लेंगे, प्रशंसा मिलेगी। नया बिजनेस शुरू करने का विचार बना सकते हैं। युवाओं को करियर के रास्ते में थोड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। घर की साज-सज्जा में धन खर्च होगा। सेहत से खिलवाड़ करना सही नहीं है। तुला- आज नए लोगों के संपर्क की वजह से आपका प्रमोशन होने की संभावना है। बिजनेस में कर्मचारियों के साथ बढ़िया ताल-मेल बना रहेगा। युवाओं को अपनी मेहनत का परिणाम अवश्य मिलेगा। परिवार की किसी छोटी सी बात को मन पर लगा कर बैठ जाएंगे। वृश्चिक- आज ऑफिस में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम होंगे। बिजनेस में किसी काम को लेकर आना-कानी करते हुए नजर आएंगे। छात्र भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभी से मेहनत शुरू कर देंगे। परिवार वालों का सहयोग हिम्मत बनकर काम करेगा। धनु- आज प्राइवेट नौकरी कर रहे लोग अपने काम से खुश रहेंगे। सांझेदारी वाले बिजनेस में बहुत ही संभल कर काम करने की जरूरत है। टेक्निकल पढ़ाई कर रहे छात्रों के परिणाम अनुकूल रहेंगे। परिवार के साथ किसी फंक्शन में जाने का मौका मिलेगा। मकर- आज व्यवसाय की विपरीत परिस्थितियों में भी खुश रहने की कोशिश करेंगे। ऑफिस में किसी की नकारात्मक बातों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दें। युवा वर्ग अपने करियर पर ध्यान देंगे। परिवार के साथ समय बिताकर मानसिक तनाव में सुकून मिलेगा। कुम्भ- आज व्यापार में भविष्य संबंधी योजनाओं को लागू करने के बारे में विचार करेंगे। कार्यस्थल पर कोई भी विचार सबके सामने रखने से पहले सोच लें। छात्र पढ़ाई की टेंशन लेने की बजाय उसकी तैयारी करें। परिवार के सामने अपनी परेशानियों को जाहिर करेंगे। मीन- आज बड़ी मुश्किलों के बाद व्यापार में मंदी ऊपर चढ़ती हुई नजर आएगी। सरकारी नौकरी कर रहे लोग मौज-मस्ती में अपना समय बिताएंगे। छात्र शिक्षा में अच्छे फल प्राप्त करने के लिए अनुभवी की सलाह लेंगे। काम और परिवार में सही से तालमेल बनाने में सक्षम रहेंगे।
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PATNA : बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने बाम दलों द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में शिक्षक नियमावली का सदन में विरोध करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके द्वारा नियमावली का विरोध का निर्णय मात्र दिखावा है। सिन्हा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सी पी आई, सी पी एम औऱ सी पी आई(एम एल) की चुप्पी को सरकार ने उनकी मौन सहमति के रूप में ग्रहण किया। अब ये कह रहे हैं कि नियमावली लागू करने से पूर्व उनसे बिचार विमर्श नहीं किया गया। यदि वे वास्तव में इसका विरोध करते हैं तो आगामी सत्र में इस नियमावली को निरस्त करने हेतु प्रस्ताव लायें, भाजपा इसका समर्थन करेगी। सिन्हा ने कहा कि बाहर में तो कांग्रेस भी कभी कभी नियमावली के विरोध में वयान देती है लेकिन इस दल के मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने कैबिनेट की बैठक में नियमावली का विरोध नहीं किया। यदि महागठबंधन के लोग चाहें तो इस नियमावली में संशोधन करने हेतु सरकार मजबूर होगी। सिन्हा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नियोजित शिक्षकों औऱ पात्रता परीक्षा उतीर्ण शिक्षक अभ्यर्थियों को सीधी नियुक्ति और राज्यकर्मी का दर्जा देने का आश्वासन दिया था। लेकिन सरकार में आने पर इनकी नीयत में खोट आ गई और इन्होंने छलावा किया। विडम्बना यह है कि इन्हीं के दल के पास शिक्षा विभाग है और फिर भी ये कुछ नहीं कर रहें हैं। शिक्षा मंत्री औऱ विभागीय अपर मुख्य सचिव की लड़ाई से न तो शिक्षकों का भला होगा न ही राज्य के छात्रों का। सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भी इस विवाद को हल करने में कोई रुचि नहीं ली है। मुख्यमंत्री से मिलने के वाद शिक्षा मंत्री को वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी के कार्यालय में वुलाया गया, यह शिक्षा मंत्री का अपमान है क्योंकि मंत्रियों का दर्जा एक समान है। मंत्रियों को अपमानित करने की सरकार की यह कार्यशैली पुरानी है। सिन्हा ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था अस्तव्यस्त हो गई है। पटना में अवस्थित महाविद्यालयों में छात्र नामांकन लेने से परहेज कर रहे हैं औऱ सीट खाली रह जा रही है। बिभाग में रोज नया नया विवाद के कारण शिक्षा का माहौल विगड़ते जा रहा है। बिहार के छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवड़ किया जा रहा है। राज्य में शिक्षा को रसातल में ले जाने के लिए राज्य की बर्तमान सरकार को राज्य की जनता माफ नहीं करेगी। सिन्हा ने कहा कि नौकरशाही द्वारा विधायिका को अपमानित करने की परंपरा बिहार में शुरू हो गई है। सरकार इसमें भरपूर प्रोत्साहन दे रही है। राज्य की जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में पदाधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह लोकतंत्र का अपमान है। मुख्यमंत्री जी को इसपर संज्ञान लेना चाहिए और जनप्रतिनिधियों के अधिकार को बहाल करने हेतु कार्रवाई करनी चाहिए।
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सिहुंता - ग्राम पंचायत गरनोटा में रविवार को हल्के के विधायक विक्रम जरयाल के सम्मान में नागरिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पधारने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विधायक का फूलमालाओं से लादकर जोरदार वेलकम किया। उन्होंने विधायक को शाल व टोपी पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया। इस दौरान इलाकावासियों ने विधायक के समक्ष जनहित से जुड़ी समस्याओं को पेश कर जल्द हल भी मांगा। समारोह में मौजूद पूर्व भाजपा मंडलाध्यक्ष नानक चंद वर्मा ने विधायक से आईटीआई गरनोटा के मैदान को पंचायत के सुपुर्द करने और गरनोटा आईटीआई के चंबा में चल रहे सात ट्रेडों को स्थानांतरित करने के अलावा रेन शेल्टर के निर्माण की मांग उठाई। उन्होंने गरनोटा में बैंक शाखा खोलने के अलावा गरनोटा स्कूल व आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में स्टाफ की कमी को पूरा कर राहत प्रदान करने को भी कहा। उन्होंने खगल कूहल का मरम्मत कार्य करवाने की मांग भी विधायक के समक्ष प्रमुखता से उठाई। विधायक विक्रम जरयाल ने अपने संबोधन में उपस्थित जनसमूह का चुनावों में सहयोग कर दोबारा से हलके की कमान सौंपने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी इन मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करवाया जाएगा। समारोह में उपमंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा भाजपा एससी मोर्चा के अध्यक्ष प्यारेलाल डोगरा, बृजलाल शर्मा, महामंत्री बलदेव सिंह, थुलेल पंचायत के प्रधान कांशी राम, नायब तहसीलदार सिहुंता देवेंद्र कुमार, दिव्य चक्षु, वीरभान, आईटीआई प्रिंसीपल राजेश पुरी, रेंज आफिसर मनोज कुमार शर्मा, वरयाम सिंह व लक्ष्मण कौशल समेत करीब एक हजार लोग मौजूद रहे।
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अखियाँ है, छवि की चमकनि वह, हम तौ चाहति सवै पियौ री । सुनि सजनी यह करनी अपनी अपने ही सिर मानि लियौ री ।। हम तौ पाप कियौ, भुगतै को, पुन्य प्रगट क्यौँ जात छियो री । सूरदास प्रभु रूप-सुधा निधि, पुट थोरौ, बिधि नहीं बियौ री ॥ सुनि री सखी बचन इक मोसौ रोम-रोम प्रति लोचन चाहति, द्वै सावित हूँ तोसौँ ॥ में विधना सौ कहाँ कछू नहि, नित प्रति निमि को कोसो । येऊ जो नीकें दोउ रहते निरखत रहती हौं साँ ॥ इक इक अंग-अंग छवि धरती, मैं जो कहती तोसौं । सूर कहा तू कहति यानी, काम परचौ सुनि ज्यौ सौ ।। कह काहू को दोष लगावें । निमि सौ कहा, कहति, कह विधि साँ, कह नैननि पछितावें ।। स्याम हितू कैसे करि जानति, औरो निठुर कहावें । छिन मैं और और अॅग सोभा, जोवें देखि न पावें ॥ जबहीँ इकटक करि अवलोकति, तवहीँ वै झलकावें । सूर स्याम के चरित लखै को, येई वैर बढ़ावें । लहनी करम के पाछै । दियो अपनी लहै सोई, मिलै नहि च ॥ प्रगट ही हैं स्याम ठाढ़े, कौन अंग किहि रूप । लह्यौ काहूँ, 'कहौँ मोसौँ, स्याम हैं ठग भूप ॥ प्रेम-जाचक धनी हरि साँ, नैन पुढ कह लेइ । अमृत-सिंधु हिलोरि पूरन, कृपा दरस न देइ ।। पाइयै सोई सखी री, लिख्यौ जोई भाल । सूर उत कछु कमी नाहीं, छवि समुद गोपाल ।
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किसी भी समस्या के समाधान के लिए उसके पीछे छिपे कारण को ढूंढना अनिवार्य होता हैं. समस्या की जड़ का पता चले बिना रिश्तों की टूटी डोर को जोड़ना संभव नहीं हैं. ये समस्या की जड़ आप के भूतकाल में छिपी हो सकती हैं या फिर आप के वर्तमान से भी जुडी हो सकती हैं. आखिर आप से किस मोड़ पर गलती हुई? क्यों हुई? अपने प्रेम सम्बन्ध का शुरुवात से अंत तक तक विष्लेषण करिए. एक बार सही समस्या का पता चलने पर उसे सुलझाना काफी आसान हो जाता हैं. एक बार आप पता लगा ले की सम्बन्धो में गलती कहाँ हुई हैं? और किस से हुई हैं? तो दूसरा कदम होता हैं उन गलतियों को सुधारने का. और इसका सब से अच्छा तरीका हैं अपनी गलती को स्वीकार कर माफ़ी मांगना. विश्वास कीजिए यदि माफ़ी दिल से मांगी जाये तो वो कठोर से कठोर पत्थर को भी पिघला देती हैं. यदि गलती आप के प्रेमी की हैं तो उसे माफ़ कर अपने प्रेम सम्बन्धो को पनपने का एक और मौका दीजिये. प्रेम सम्बन्धो की गाड़ी पटरी पर फिर से आते ही उसमे वादों का ईंधन डाले. आप अपने प्रेमी से जो भी वादा करे उस पर पूरी तरह से कायम रहे. कई लोग वादा करने के बाद जल्द ही उन्हें भूल जाते हैं. जो आगे चल कर एक और ब्रेकअप का कारण बन सकता हैं. इसलिए अपने किए गए वादों को नोट कर के रखना और उन्हें समय समय पर ध्यान में लाते रहना एक अच्छी आदत होगी.
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Dhanbad Transporter Murder Case: चासनाला निवासी सेलकर्मी सह ट्रांसपोर्टर प्रवीण राय की गोली मार कर हत्या करने वाले शूटर बोकारो के रहने वाले हैं. इसे लेकर पुलिस की एक टीम बोकारो में लगातार छापामारी कर रही है. सूत्रों के अनुसार एक शूटर के पकड़े जाने की भी सूचना है, हालांकि पुलिस कुछ बताने से इंकार कर रही है. वहीं, दूसरी ओर इस मामले में नामजद आरोपी जनता मजदूर संघ के नेता धीरज सिंह के भाई धर्मेंद्र सिंह को पुलिस ने बोकारो से हिरासत में ले लिया है. बता दें कि हिरासत में लिये गये धीरज सिंह के बहनोई की निशानदेही पर धर्मेंद्र सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया है. इस संबंध में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाले दोनों शूटर बाहरी हैं. दोनों का चेहरा सीसीटीवी में साफ दिख रहा है, उसी के आधार पर कई लोगों को उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक कुछ सत्यापित नहीं हो पाया है. पुलिस के अनुसार इस मामले में पुलिस को कुछ पुख्ता सबूत मिले हैं और उसी दिशा में पुलिस काम कर रही है. पुलिस धर्मेंद्र सिंह से पूछताछ कर रही है. इधर, सिंदरी डीएसपी अभिषेक कुमार ने सुदामडीह थाना में पुलिस अंचल के थानों के प्रभारियों के साथ बैठक की. इस दौरान डीएसपी ने तीन टीमों का गठन किया है. तीनों टीम पश्चिम बंगाल, बिहार व झारखंड के विभिन्न इलाकों में छापेमारी के लिए रवाना हो गयी है. वहीं दूसरी ओर इलाके में चर्चा है कि किसी पांडेय ने शूटरों को बुलाने में आर्थिक मदद की है. पुलिस भी इस एंगल को देख रही है. अपराधियों की गोली से घायल होटल संचालक राजकिशोर सिंह का ऑपरेशन रांची के एक अस्पताल में गुरुवार की देर रात हुआ. घायल राजकिशोर सिंह के पुत्र अंकित ने बताया कि डॉक्टर ने बताया कि गोली किडनी के पास फंस गयी थी, पर अब स्थिति खतरे से बाहर है. कोल ट्रांसपोर्टर प्रवीण राय की हत्या में निरसा एसडीपीओ पीतांबर सिंह खरवार, धनबाद डीएसपी, पाथरडीह इंस्पेक्टर सुभाष सिंह व निरसा थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर दिलीप यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने निरसा थाना क्षेत्र के पीठाकियारी के आसपास के इलाके से राहुल नामक एक युवक को हिरासत में लिया है. उससे पूछताछ की जा रही है. अन्य तीन युवकों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस टीम के साथ टेक्निकल सेल के अधिकारी भी मौजूद है. शुक्रवार शाम से पुलिस निरसा में छापेमारी कर रही है. इतना ही नहीं अपराधियों की तलाश में धनबाद की पुलिस टीम, हटिया मोड़, निरसा चौक सहित आसपास के इलाके में सादे लिबास व अलग-अलग टोलियों में अपराधियों पर नजर रख रही है. जिस युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है, उसका संबंध साइबर अपराध से जुड़ा हुआ है.
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पुलिस की कार्रवाई की जद में एफसीआई गोदाम के सरकारी कर्मचारी भी आ रहे हैं। आईकार्ड दिखाकर गोदाम तक जाने वाले कर्मचारियों से पुलिस ने अभद्रता करते हुए चालान काट दिए। ऐसे में एफसीआई कर्मियों में रोष बढ़ गया है। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि यदि उन्हें पास उपलब्ध नहीं कराए गए तो गोदाम बंद कर देंगे। आला अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। परतापुर में एफसीआई गोदाम के इंचार्ज विकास शर्मा हैं। विकास शर्मा बुधवार को अपने वाहन से गोदाम जा रहे थे। चेकिंग के दौरान उन्हें पुलिस ने दिल्ली रोड पर रोक लिया। पुलिस टीम को विकास शर्मा ने आईकार्ड दिखाया और बताया कि वह गोदाम जा रहे हैं। बताया कि केंद्र सरकार का निर्देश है कि खाद्य सामग्री और एफसीआई गोदाम लगातार खुलेंगे। बावजूद इसके पुलिसकर्मी नहीं माने और विकास शर्मा का चालान कर दिया। पुलिस ने कह दिया कि बिना वाहन पास आगे जाने नहीं दिया जाएगा। विकास शर्मा जैसे तैसे गोदाम पहुंचे तो पता चला कि दो अन्य कर्मचारियों के भी चालान पुलिस ने किए हैं। कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि उन्हें पास जारी नहीं किए गए तो काम रोक दिया जाएगा। एफसीआई गोदाम से राशन लेकर एक ट्रक परीक्षितगढ़ क्षेत्र गया था। राशन उतारने के बाद ट्रक वापस आ रहा था। अब्दुल्लापुर क्षेत्र में भावनपुर पुलिस ने ट्रक रोक लिया। चालक ने कागजात दिखाया। बावजूद इसके पुलिस ने चालक से गाली गलौज कर दी। चालक की ओर से आईजी मेरठ प्रवीण कुमार का सीयूजी नंबर कई बार मिलाया गया, लेकिन कॉल नहीं उठी। इसके बाद एफसीआई से कॉल कर एसओ भावनपुर संजय कुमार से बात की गई। बाद में सीओ के हस्तक्षेप के बाद ट्रक को छोड़ा गया।
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ALLAHABAD: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी में तीन दिनी तकनीकी उत्सव अपरोक्ष का समापन हो गया। इस दौरान एमआईटी मीडिया लैब इंडिया के सह अध्यक्ष अनिरुद्ध शर्मा ने अपने व्याख्यान में नवीनतम परिस्थितिकी तंत्र विधि के बारे में जानकारी दी। उनका व्याख्यान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों एवं कलाकारों को एक साथ लाने एवं आविष्कार के क्षेत्र में कुछ नया करने की कोशिश के लिए अनुशासनात्मक अनुसंधान पर केन्द्रित रहा। कार्यशाला में गूगल डेवलपर्स के विक्रम तिवारी एवं निशांत श्रीवास्तव ने क्लाउड कम्यूटिंग की इम्पार्टेस एवं गूगल की विभिन्न सेवाओं के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर फ्लेगशिप कोडिंग तथा साहित्यिक चोरी की जांच के लिए हुई प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई। इसमें गौथम, आशुतोष, सिंगला, अमित सहरान, अभय, मंगल एवं करन अग्रवाल ने ख्म् हजार रुपए का पुरस्कार जीता। इलेक्ट्रानिक्स प्रतियोगिता वुल्फ-ख्फ्क्क् में मनीषा, श्रेया एवं जगराती तोमर को प्रथम, मेधावी, पंकज एवं यश को द्वितीय तथा अनमोल, जीशन एवं दीप प्रकाश को तृतीय पुरस्कार मिला। प्लेटजेन के विजेता नलिन तथा बायोमेडा के विजेता हिमांशु कुमार रहे। वहीं क्विज प्रतियोगिता रिड्डलोनिक्स में विभोर, दिनेश, वेदप्रकाश, दिपांशु, संजय, मीना एवं अनुपम विजेता बनें। इस दौरान रोबोट रेसिंग एवं वैकबोन वेब विकास के विजेताओं की भी घोषणा की गई।
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अक्सर महिलाओं को लगता है कि पुरुष सिर्फ उनकी खूबसूरती पर ही ध्यान देते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पुरुष महिलाओं में खूबसूरती के अलावा भी कई चीजों पर गौर करते हैं। तो अगर आपको किसी पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करना है तो ये टिप्स आपके काम के हो सकते हैं। लड़कियों को लगता है कि लड़कों को स्लिम या जीरो फिगर वाली लड़कियां पसंद होती हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। बल्कि लड़कों को मोटी लड़कियां और कर्व्स फिगर वाली लड़कियां ज्यादा भांती हैं। अगर कोई लड़का आपको पसंद करता है और आप भी उसे पसंद करती हैं तो उससे किसी भी तरह की बात करने में झिझके नहीं। शुरू में ऐसी बातें करने में थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन लड़कों को वे लड़कियां पसंद होती है जो बिंदास होकर उनसे अपनी बातें शेयर करें। लड़कों को शर्माने वाली लड़कियां खास पसंद नहीं होतीं। इसलिए अगर किसी लड़के को आप पसंद करती हैं तो उससे आई कॉन्टेक्ट बनाएं और दिखाएं कि आप किसी से डरती नहीं हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर लड़कों को बिना मेकअप वाली लड़कियां पसंद आती है। इसलिए अगर आप किसी लड़के को आकर्षित करना चाहती हैं तो मेकअप पर पैसा खर्च ना करें और जैसी हैं वैसी ही उसके सामने जाएं।
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Kumkum Bhagya zee tv show : ZEE TV शो 'कुमकुम भाग्य' में पिछले कुछ हफ्तों में काफी ड्रामा देखा गया है. कहानी के मुताबिक, प्राची को फिरौती का नोट मिलता है जिससे मिहिका की जान को खतरा है. प्राची सिड से शादी करने के लिए दृढ़ है और भविष्य में उसके साथ क्या होगा, इस पर नियति के खेल का भी परीक्षण करना चाहती है. प्राची दुल्हन के रूप में तैयार हो जाती है. रणबीर उसे मंडप में ले जाता है और उसे सिड के पास बैठाता है. शाहाना और आर्यन ने शादी रोकने की योजना बनाती है. वे मंडप को धक्का देने की कोशिश करते हैं ताकि वह गिर जाए. जल्द ही मंडप गिर जाता है और रिया घायल हो जाती है. प्राची रिया की मदद के लिए दौड़ती है और शादी रुक जाती है. परिजन रिया को अस्पताल भी ले जाते हैं. अब आने वाले एपिसोड में, अस्पताल में सहाना, प्राची और सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने का फैसला करते हैं ताकि वह रिया को डीएनए रिपोर्ट करने के लिए मजबूर कर सके. जल्द ही, वे इसे निष्पादित करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ते हैं. सिद्धार्थ रणबीर को उकसाने में कामयाब हो जाता है और वह रिया को एक और डीएनए टेस्ट कराने के लिए कहता है, जिससे उसे और आलिया को चिंता होती है.
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Jamshedpur : शहर में बढ़ते अपराध को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस लगातार एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चला रही है. इसके अलावा रैश ड्राइविंग करनेवालों तथा नशे के लिए चोरी-छिनतई करनेवालों की धर-पकड़ के लिए भी एक मोबाइल दस्ता बनाया गया है. यह दस्ता ऐसे बाइकर्स को चिन्हित करते हुए कार्रवाई करता है. मंगलवार को भी ऐसे बाइकर्स और सड़क किनारे तथा चौक-चौराहों पर अड्डाबाजी करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी. सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट भी खुद सड़क पर उतरे औऱ ऐसे लोगों को पकड़ा. बता दें कि बिष्टुपुर के सर दोराबजी टाटा पार्क के पास भी शाम होते ही काफी संख्या में बाइकर्स जमा हो जाते हैं और रैश ड्राइविंग करते हैं. मंगलवार को सिटी एसपी ने खुद यहां से पांच वाहनों को जब्त किया. उन्हें इस बात का ताज्जुब हुआ जब सभी बाइकर्स नाबालिग निकले, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. सिटी एसपी ने सभी वाहनों को जब्त कर थाने भिजवा दिया. सिटी एसपी ने बताया कि शहर में नशेड़ियों, रैश और ड्रंक एंड ड्राइव करनेवालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. ऐसे ही लोगों द्वारा शहर में लगातार छिनतई और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऐसे बाइकर्स को चिन्हित कर उनकी धर-पकड़ की जा रही है. सिटी एसपी ने बताया कि अब तक पूरे शहर में कार्रवाई करते हुए दो दर्जन से ज्यादा बाइक्स को जब्त किया गया है. उन्होंने बताया कि धर-पकड़ का यह अभियान अभी जारी रहेगा.
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एक्ट्रेस नेहा मलिक ( Neha Malik ) का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। एंटरटेनमेंट डेस्क, Neha Malik created a ruckus in a black net bra : भोजपुरी एक्ट्रेस नेहा मलिक अपने बोल्ड एंड हॉट वीडियो शूट और ग्रेसफुल डांस मूव्स की वजह से सोशल मीडिया सनसनी बन चुकी हैं। नेहा मलिक ने हाल फिलहाल दो ग्लैमरस वीडियो शेयर किए हैं। इसमें वे बहुत हॉट अंदाज़ में डांस मूव्स दिखा रही हैं। इस एक्ट्रेस ने इस वीडियो के लिए पिंक ब्लिंग हॉट एंड सेक्सी आउटफिट चुना है। इस वीडियो में उन्होंने बदन से चिपका हुआ ऑफ सोल्डर वेस्टर्न ड्रेस पहना हुआ है। पिंक कलर का ये ड्रेस बेहद आकर्षक है। इसके साथ सेम कलर की फैंसी चप्पल पहनी हुई हैं। एक्ट्रेस ने इस ड्रेस के साथ कानों में व्हाइट कलर के बड़े स्कवायर कैरी किए हैं। एक्ट्रेस का न्यूड मेकअप वाला लुक बेहद पसंद किया जा रहा है। अभी इस वीडियो को शेयर किए कुछ ही देर हुई है वहीं इस पर सैकड़ों लोगों ने लाइक औऱ कॉमेन्ट किया है। पिंक ड्रेस में ओपन हेयर और न्यूड मेकअप के साथ एक्ट्रेस नेहा मलिक का लुक काफी ग्लैमरस नजर आ रहा है। उन्होंने अपने इंस्टा अकाउंट पर इसी ड्रेस में फोटोशूट भी कराया है। वहीं इससे पहले नेहा ने एक औऱ वीडियो शेयर किया है, जिसमें होला कैप्शन देते हुए इस सांग पर डांस मूव्स दिखाए हैं। इसमें उन्होंने ब्लैक नेट वाली ब्रा के ऊपर लाइट सेफ्रॉन कलर का कोट पहना है, जिसमें वे बेहद सेक्सी नज़र आ रही हैं।
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राजकीय सेवानिवृत्त अध्यापक संघ जिला सिरमौर ने कहा है कि जिला मुख्यालय नाहन में कच्चा टैंक नाहन से कोर्ट तक जाने के लिए पूर्व की भांति संचालित बस सेवा को बहाल किया जाए, ताकि बुजुर्गों को नाहन शहर के तंग गली वाली सड़कों व यातायात से भरी सर्कुलर रोड इत्यादि पर पैदल निकलने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। राजकीय सेवानिवृत्त अध्यापक संघ जिला सिरमौर की बैठक संघ प्रधान दिलीप सिंह वर्मा की अध्यक्षता में नाहन में आयोजित हुई, जिसमें संघ ने पांच विभिन्न समस्याओं के प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन से समाधान की मांग की। राजकीय सेवानिवृत्त अध्यापक संघ जिला सिरमौर के पदाधिकारियों ने कहा है कि नाहन शहर में आवारा कुत्तों व बंदरों लंगूर ने आतंक मचा रखा है। वहीं यह आवारा कुत्ते रोग ग्रसित हैं जिसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा नसबंदी व उपचार कार्यक्रम संचालित किए जाएं। संघ ने नाहन डे केयर सेंटर में चिकित्सक द्वारा जांच सुविधा को दोबारा से आरंभ किए जाने का प्रशासन से आग्रह किया है, ताकि समय-समय पर सीनियर वर्ग के लोगों के स्वास्थ्य की जांच हो सके। सेवानिवृत्त अध्यापक संघ सिरमौर के महासचिव देवी चंद शर्मा ने बताया कि नाहन शहर की मुख्य समस्याएं जो कि नाहन के वरिष्ठ नागरिकों व बुजुर्गों को पेश आ रही में पानी के बिलों के भुगतान के लिए ऑनलाइन सेवा आरंभ करने की मांग की गई है, जबकि एसबीआई बैंक, मेडिकल कालेज नाहन में पर्ची बनाने के लिए सीनियर सिटीजन को अलग काउंटर से सेवाएं देने का भी आग्रह किया गया है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त अध्यापकों के मेडिकल बिलों के बकाया लंबित हैं जिसका शीघ्र भुगतान किया जाए।
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देहरादून के श्रीदेवसुमन नगर मित्रलोक कालोनी में सात दिनों बह रही श्रीमद्भागवत की ज्ञान गंगा ने आज विश्राम ले लिया। आचार्य दिनेश उनियाल ने बहुत ही सुंदर और तार्किक ढंग से जीवन में भगवान और भक्ति का महत्व श्रद्धालुओं को समझाया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने व्यास आचार्य दिनेश उनियाल को शाल ओढ़ाकर स्वागत व अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धस्माना ने कहा कि श्रीमद्भागवत एक ऐसा अदभुत ग्रंथ है जो मनुष्य को यह सिखाता है कि कैसे मर्यादित जीवन जीने के पश्चात मनुष्य को सद्गति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य के जीवन में वास्तव में मृत्यु का भय समाप्त करती है जिस प्रकार राजा परक्षित का अन्तोगत्वा उद्धार श्रीमद्भागवत सुनने से हुआ और वे बैकुंठधाम पहुंचे श्रीमद्भागवत सुनने के पश्चात। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्यारेलाल उनियाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, पार्षद श्रीमती संगीता गुप्ता, अनिल नंदा, राजेश उनियाल आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उनकी डाइट पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है और इस काम में पौष्टिक खाद्य पदार्थ आपकी काफी मदद कर सकते हैं। माता-पिता को यह बात बखूबी मालूम होनी चाहिए कि बच्चे की डाइट में कौन-कौन से पोषक तत्वों को शामिल करना बहुत जरूरी है और उनकी अहमियत क्या है। चलिए फिर जानते हैं कि बच्चे का संपूर्ण विकास करने में कौन से पोषक तत्व अहम भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों के विकास के लिए उनकी डाइट में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को खासतौर से शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि कैल्शियम बच्चों के शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से बच्चों की लंबाई रुक सकती है और शरीर की हड्डियों और दांतो पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए बढ़ते बच्चों की डाइट में दूध और हरी सब्जियों जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करें। जिस प्रकार से बड़ों की डाइट में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का शामिल होना जरूरी है, ठीक उसी प्रकार बच्चों के खाने में भी एक सही मात्रा में फाइबर होना आवश्यक है। दरअसल, आजकल बच्चों में भी मोटापा एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और फाइबर मोटापे को नियंत्रित करने का काम करता है। फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों के लिए बच्चों की डाइट में ओट्स, ब्रोकली, सेब, नाशपाती, एवोकाडो और सूखे मेवे आदि शामिल किए जा सकते हैं। आयरन भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक अहम पोषक तत्व है क्योंकि इससे भी उनका शारीरिक विकास होता है। वैसे भी आजकल बच्चे ठीक से खाना नहीं खाते हैं और आयरन युक्त चीजें उनकी भूख बढ़ाती हैं जिससे वे एक सही डाइट ले पाते हैं। आयरन युक्त खाद्य पदार्थो की बात करें तो बच्चों की डाइट में बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, साबुत अनाज और सूखे मेवे आदि को शामिल करना अच्छा विचार हो सकता है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज रियाद में एल एंड टी कार्मिकों के आवासीय परिसर का दौरा किया। एल एंड टी रियाद में मेट्रो के एक खंड का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में काम कर रहे कार्मिकों के द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आपका कठिन परिश्रम ही मुझे यहां लाया है। उन्होंने कहा कि विदेश में भारतीय श्रमिकों के द्वारा किए जा रहे कार्य से न सिर्फ धन अर्जित होता है, बल्कि भारत की महत्ता भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि विश्व के बहुत से हिस्सों में भारतीय श्रमिकों को याद किया जाता है जहां उन्होंने बहुत सी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को पूर्ण किया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रियाद मेट्रो के लिए भी भारतीय कार्मिकों के इसके निर्माण हुए योगदान को इसी प्रकार से याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेश में काम कर रहे भारतीयों को उनके परिजनों से प्राप्त होने वाले पत्रों से अकसर जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह इन पत्रों के माध्यम से अपने सुख-दुख दोनों ही बांटते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अहसास होता है कि वे उनके परिवार का ही एक हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ई-प्रवास पहल का उल्लेख किया जिसके माध्यम से विदेश में कार्य करने की इच्छा रखने वाले लोगों को सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि और अधिक 'श्रमिक संसाधन केंद्र' खोले जाएंगे और मदद पोर्टल के माध्यम से केंद्र सरकार तक शीघ्रता से संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमता है कि वह आवश्यकता के अनुरूप मानव श्रम को दुनिया को प्रदान कर सके। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान, आयोजन स्थल पर उपस्थित हजारों श्रमिकों ने बहुत बार उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। अपने संबोधन के पश्चात प्रधानमंत्री ने श्रमिकों से मुलाकात करते हुए उनके साथ जलपान भी किया।
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जब हम प्यार में होते हैं तो हमेशा ये कोशिश करते हैं कि हम कुछ ऐसा करें जिससे हमारे पार्टनर को स्पेशल महसूस हो. हालांकि इस दौरान कई बार ऐसा भी होता है कि हमें यह याद भी नहीं रहता कि हम क्या कर रहे हैं और इन बातों का क्या असर हो सकता है. कई बार हमारी ये हरकतें बहुत गलत साबित हो जाती हैं. ये वो बात है जो कोई शख्स सामने वाले में सबसे पहले नोटिस करता है. आप जो भी बोलें, वह स्पष्ट हो. अगर आपके शब्द सही नहीं होंगे और आप अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त नहीं कर पाएंगे तो हो सकता है कि सामने वाले शख्स को अच्छा न लगे. हो सकता है कि आपसे इस मुलाकात के बाद वह आपसे बात करना ही बंद कर दे. आपका बिना मतलब किसी बात पर हंसना या ठहाके लगाना, आपके पार्टनर को बुरा लग सकता है. साथ ही यह आपकी समझदारी पर भी शक पैदा कर सकता है. जब आप किसी से बात कर रहे हैं तो बेहद जरूरी है कि आप उसकी बातें सुनें और सुनने के बाद ही उस पर अपनी प्रतिक्रिया दें. माना कि आप उन्हें पसंद करते हैं लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि जब वह आपके सामने आए, तो आप उसे घूरते ही रहें. इससे आपकी इमेज अच्छी नहीं बनेगी. सामने खड़े शख्स के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना आपके हित में होगा.
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Sara Ali Khan: बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान आए दिन सोशल मीडिया पर चर्चा में बनी रहती हैं। कभी वह कार्तिक आर्यन के साथ अफेयर को लेकर तो कभी अपनी तस्वीरों को लेकर इंटरनेट पर छाई रहती हैं। सारा अली खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। दरअसल, हाल ही में सारा अली खान ने कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जो सोशल मीडिया पर सनसनी मचा रही हैं। बता दें सारा अली खान इन दिनों प्रकृति की गोद में अपनी जिंदगी का हर पल बिता रही हैं। पिछले दिनों मालदीव और लद्दाख में छुट्टियां मनाने के बाद अब लगता है एक्ट्रेस कश्मीर निकल पड़ी हैं। सारा ने कश्मीर की घाटी में मौजूद शेषनाग झील से कई तस्वीरें साझा की है। इन तस्वीरों में सारा के चेहरे पर अलग ही रौनक झलक रही है। बर्फीले पहाड़ों के बीच कैंप लगाते और दोस्तों संग खाना खाते उन्होंमे एक के बाद कई फोटोज शेयर किए हैं। बेहद खूबसूरत वादियों की ये तस्वीरें किसी को भी पसंद आ जाएगी। जन्नत के नजारे के बीच सारा की यह खुशी देखते ही बन रही है। उन्होंने कविता लिखकर अपनी खुशी को बयां किया है। इस तस्वीर को शेयर कर सारा ने लिखा, 'धूप की चटकीली रोशनी और तारों वाली रातें...रोशनी के लिए चांद की चमक और कैंप फायर...जब तक आप ऊंचाई को छू सकते हैं...और यहां बस जरूरत से ज्यादा खाना ही आपकी लड़ाई है।
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नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में आठ वर्ष पूरे किए। इसमें दो वर्ष वैश्विक कोरोना महामारी का प्रकोप रहा। इसने दुनिया के विकसित देशों को भी हिला कर रख दिया। सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव हुआ। इससे अभी संभलने का प्रयास चल रहा था, तभी रूस यूक्रेन संकट सामने आ गया। इन सभी कारणों से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी है। अमेरिका व यूरोप के विकसित देशों में कई दशक कर बाद ऐसी मंहगाई देखी जा रही है। मोदी सरकार ने तो इस अवधि में दुनिया की सबसे बड़ी निशुल्क राहत वितरण योजना का संचालन किया। दुनिया का सबसे बड़ा निशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया। इसके अलावा राहत के अनेक कार्य किये गए। जाहिर है कि परिस्थितियां प्रतिकूल रही है। मंहगाई बढ़ी है। दुनिया का कोई देश इससे बचा नहीं है। किंतु भारत का विपक्ष नकारात्मक राजनीति से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। निष्पक्षता के नाम पर नकारात्मक प्रचार करने वाले पत्रकार भी इसमें शामिल है। वह बता रहे है कि आठ वर्षों में महंगाई की दर सर्वाधिक है। किंतु उनके विश्लेषण में दुनिया की परिस्थिति शामिल नहीं है। यूपीए सरकार तेल उत्पादक देशों व कम्पनियों का कई लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ गई थी। इसकी भरपाई भी वर्तमान सरकार को करना पड़ रहा है। इन आठ वर्षों में अनेक संवेदनशील समस्याओं का समाधान हुआ। यह सभी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण ही संभव हुआ। यदि कोई अन्य सरकार होती तो इन मसलों पर चर्चा तक मुनासिब ना होती। कांग्रेस के अनेक दिग्गज नेता श्री रामजन्म भूमि सुनवाई को टालने के लिए जमीन आसमान एक कर रहे थे। श्री रामजन्म भूमि का विवाद पांच शताब्दी पुराना था। कहा जा रहा था कि दोनों पक्ष सहमति से इसका समाधान निकालें या कोर्ट का फैसला माने। सहमति से समाधान असंभव था। मंदिर के विरोध में बाकायदा एक्शन कमेटी बनी थी। अपने को सेक्युलर घोषित करने वाले भी मंदिर निर्माण के विरोधी थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने कोर्ट में शीघ्र का मार्ग प्रशस्त किया। इससे सदियों से लंबित समस्या का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। छब्बीस मई को मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। तीन तलाक पर प्रतिबंध भी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण संभव हुआ। अनेक मुस्लिम देश इस पर रोक लगा चुके है। लेकिन भारत में रोक की बात को ही साम्प्रदायिक करार दिया जाता था। लेकिन मोदी सरकार ने इसकी कोई चिंता नहीं की। उसने पहल की, अंततः तीन तलाक व हलाला की कुप्रथा समाप्त हुई। मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए का विरोध करना भी साम्प्रदायिकता माना जाता था। सेक्युलर दिखने के लिए इन अलगाववादी प्रावधानों का समर्थन जरूरी था। संसद में इस पर चली बहस से यह प्रमाणित भी हुआ। इसके हटने पर गम्भीर परिणाम की चेतावनी तक दी गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसको हटा कर ही दम लिया। देश में सत्तर वर्ष बाद एक विधान एक निशान लागू हुआ। इसी प्रकार पाकिस्तान, बांगलादेश, अफगानिस्तान के उत्पीड़ित हिन्दू,बौद्ध, सिख,पारसी को न्याय मिला। नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ। इसका जिस प्रकार विरोध किया गया उससे जाहिर हुआ कि मोदी सरकार ना होती तो इन उत्पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं था। आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी है। इसलिए देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मोदी ने अपनी दूरदर्शी नीतियों,समर्पण और टीम इंडिया की भावना के साथ देश के लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है। सरकार के प्रत्येक निर्णय लोक कल्याण व राष्ट्रीय हित के अनुरूप है। मोदी ने दशकों से लंबित फैसलों को लागू किया। कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारत में दुनिया को चकित और प्रेरित करने का सामर्थ्य है। लेकिन इसके लिए पहले देश को आत्मनिर्भर बनाना होगा। बीस लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के सहारे भारत आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत आत्मनिर्भर बनेगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई गति मिली है। सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन किया गया। आपदा के इस दौर में उत्पीड़ित लोगों को भारतीय नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके विरोध में जम कर हंगामा हुआ था। हंगामे के समर्थन करने वाले दलों व इसे लागू ना करने वाली राज्य सरकारों को शर्मिंदा होना चाहिए। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश उत्पीड़ित हिन्दू बौद्ध सिख आफ शरणार्थियों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। ये शरणार्थी गुजरात राजस्थान,छत्तीसगढ़ हरियाणा तथा पंजाब के तेरह जिलों में हैं। गृह मंत्रालय ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। सीएए के कारण ही उनके भारतीय नागरिक बनने का रास्ता साफ हुआ था। आजादी के बाद सात दशकों में देश के केवल साढ़े तीन करोड़ ग्रामीण घरों में ही पानी के कनेक्शन थे। लेकिन पिछले पिछले महीनों में ही साढ़े चार करोड़ घरों को साफ पानी कनेक्शन दिए गए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान लागू की गई। इसके दायरे में पचास करोड़ लोग है। आठ सालों में भारत ने डिजिटल लेनदेन में दुनिया को नई दिशा दिखाने का काम किया है। रिकॉर्ड सैटेलाइट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं। रिकॉर्ड सड़कें बनाई जा हैं। दशकों से लंबित अनेक योजनाएं पूरी की गई। अनेक पुराने विवाद भी पूरी शांति और सौहार्द से सुलझाए गए हैं। पूर्वोत्तर से लेकर कश्मीर तक शांति और विकास का एक नया भरोसा जगा है। करोड़ों की संख्या में गरीबों के लिए आवास,शौचालय बनाये गए,निशुल्क गैस सिलेंडर दिए गए। स्वरोजगार के लिए मुद्रा बैंक ने बड़ी संख्या में लोगों को लाभान्वित किया। स्वनिधि योजना से भी गरीब व्यवसायियों को लाभ मिल रहा है। अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज दिया गया। कोरोना काल में अस्सी करोड़ लोगों को निशुल्क राशन की व्यवस्था की गई। जन औषधी दवा केन्द्र की संख्या अस्सी से बढ़कर पांच हजार हो गई। करीब सवा सौ नये मेडिकल कालेज खुले है। यूपीए के दस वर्ष में भारतीय रेल ने मात्र चार सौ तेरह रेल रोड ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण किया। मोदी सरकार ने इससे तीन गुना अधिक निर्मांण किया। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के पन्द्रह करोड़ से ज्यादा लाभार्थी है। यह दुनिया की सबसे सस्ती योजना है। बिजली उत्पादन चालीस प्रतिशत वृद्धि हुई। सोलर ऊर्जा में आठ गुना वृद्धि हुई। फसल बीमा योजना का लाभ पहले पचास प्रतिशत नुकसान पर मिलता था। अब किसान को तैतीस प्रतिशत पर भी मिल जाता है। युरिया को नीम कोटेड किया कलाबाजारी खत्म हुई। देश मे युरिया की कोई कमी नहीं है। बारह करोड़ लोगों को मुद्रा योजना से ऋण मिला। इतने ही किसानों को सम्मान निधि दी जा रही है। पिछली सरकारों के समय बावन सेटेलाईट लाँच किये थे। मोदी सरकार ने अब तक देशी विदेशी करीब तीन सौ सेटेलाईट लाँच कर चुकी हैं। यूपीए के समय ग्रामीण सडक से जुडी बस्ती मात्र पचपन प्रतिशत थी। अब करीब पंचानबे प्रतिशत हैं।
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मनोरंजन जगत के मशहूर गायक मीका सिंह ने घोड़ी चढ़ने की पूरी तैयारी कर ली है। मीका अपने स्वयंवर में अपनी दुल्हनिया की खोज कर रहे हैं। मगर अब लगता है मीका को उनकी पसंद की लड़की मिल गई है। अब ये लड़की कौन है, जिसपर मीका सिंह का दिल आया है, आइए बताते हैं। मीका सिंह के स्वयंवर- मीका दी वोटी में यूं तो कई खूबसूरत एवं टैलेंटेड लड़कियां मीका सिंह से शादी करने का ख्वाब लेकर आई हैं। सभी मीका को इंप्रेस करने का पूरा प्रयास कर रही हैं। लड़कियां तो खुलेआम मीका के लिए अपने प्यार का इजहार कर रही हैं। मगर सबसे बड़ा सवाल ये था कि आखिर मीका किस लड़की से सबसे अधिक इंप्रेस हुए हैं। अब इस प्रश्न का उत्तर भी मीका सिंह ने स्वयं ही दे दिया है। मीका के स्यवंयर के नए एपिसोड में फराह खान ने ग्रैंड एंट्री ली। फराह खान मीका सिंह को अपना भाई मानती हैं। ऐसे में फराह खान ने सभी लड़कियों से मिलकर उनका टेस्ट लिया तथा ये जानने का प्रयास किया कि आखिर उनके भाई मीका के लिए कौन सी लड़की सबसे बेस्ट रहेगी। शो के एक प्रोमो वीडियो में दिखाया गया है कि लड़कियों से मिलने के पश्चात् फराह खान मीका सिंह को सभी लड़कियों की खूबियां एवं खामियां बताती हैं। फराह खान प्रांतिका (स्वयंवर में आई प्रतियोगी) के बारे में बात करते हुए कही हैं कि वो छोटी बच्ची की भांति है। इसपर मीका बोलते हैं- मुझे अभी तक प्रांतिका सबसे बेस्ट लगी है। ये सुनकर फराह खान भी खुश हो जाती हैं।
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बुखार के बिना बच्चों में खांसीः कारण क्या है? ऐसे लक्षणों के कारण हो सकते हैंअलग। अक्सर, बुखार के बिना बच्चों में खांसी शुरू होती है, क्योंकि एलर्जी का परिणाम है कड़ाई से बोलते हुए, यह एलर्जी की स्थिति का सबसे हद तक संकेतक है। चिकित्सक द्वारा निर्धारित एंटीरॉर्गन लेने से अवशिष्ट घटनाएं समाप्त हो जाती हैं। कारणों की सूची में दूसरे स्थान पर है जो कारण हैबुखार के बिना बच्चों में खांसी, छोटे आइटम निगल लिया जाना चाहिए। हालांकि, वहाँ अन्य लक्षण गायब हो सकता है आवाज, चेहरा हैं और नाखून नीले छेद, मुश्किल साँस लेने की बारी है, बच्चे सुस्त हो सकता है, या यहाँ तक कि चेतना खो देते हैं। बाल पुराना है और वह माता-पिता कि गलती से कुछ निगल लिया बता देंगे, लेकिन बहुत कम यह नहीं कर सकते करने के लिए, तो यह हर छोटी बात अखाद्य अभी भी उनसे दूर साफ करने के लिए बुद्धिमान हो जाएगा। और अगर इस तरह के एक आपदा हुआ है और अपने दम पर विषय मिल काम नहीं करता है - तत्काल अस्पताल में बच्चे को ले आओ। इसके लिए एक और संभावित कारणकीड़े के साथ संक्रमण - बुखार के बिना बच्चों में खांसी। एक सूखी खाँसी - लार्वा मंच पर, वे फेफड़ों, जो जलन का कारण बनता है और एक परिणाम के रूप पाए जाते हैं। इस कारण स्थापित करने और हटाने के लिए आसान है - मल किसी भी क्लिनिक में किया है, लेकिन आधुनिक कृमिनाशक दवाओं के बीच, वहाँ छोटे बच्चों में भी उपयोग के लिए अनुमति दी जाती है। लेकिन अगर घर में जानवरों, और भी अधिक अगर वे सड़क में बाहर जाना तो, परजीवी की रोकथाम वे एक नियमित आधार पर करने के लिए कर रहे हैं। बुखार के बिना बच्चों में खांसी भी हो सकती हैटीकाकरण का प्रभाव। फिर भी, टीकाकरण के दौरान शरीर में विदेशी पदार्थ पेश किए जाते हैं। यदि यही कारण है, तो ऐसी खांसी समय के साथ ही गुजर जाएगी, हालांकि यह एक बुरा संकेत हो सकता है, इसलिए टीका के लिए इतनी तीव्र प्रतिक्रिया के बारे में डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है। अक्सर ऐसा होता है कि बिना बच्चों में खांसीतनाव को तनाव से, एक कठिन परिस्थिति से मानसिक तनाव द्वारा तापमान समझाया जाता है। अगर कोई बच्चा स्थिति से निपट नहीं सकता है, तो कुछ डरता है, लगातार दबाव का अनुभव करता है, तो उसे एक आवाज़ गायब हो सकती है। तो यदि पिछले सभी संस्करण समाप्त हो गए हैं, तो माता-पिता से पूछना होगा कि वंश कैसे बाल विहार या स्कूल में कर रही है।
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दुल्हन को घर में प्रवेश करते समय दहलीज क्यों लांघनी पड़ती है? हिंदू धर्म में शादी को चार महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। इसके चलते इससे जुड़ी कुछ रस्में निभाई जाती हैं। शादी से पहले, शादी के दौरान और शादी के बाद भी कुछ रस्में पूरी होने के बाद शादी संपन्न होती है। ऐसे में हम आपको शादी के बाद होने वाली एक महत्वपूर्ण परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं। आप सभी ने दुल्हन को घर में एंट्री करते देखा होगा. फिर वह अपने दाहिने पैर से नाप को पार करती है और घर में प्रवेश करती है। लेकिन आइए जानते हैं इसके पीछे के सटीक महत्व के बारे में। दरअसल नवंधु को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस तरह यह परंपरा घर में प्रवेश के समय निभाई जाती है। चावल से भरी मटकियों को लांघकर घर में प्रवेश करने की बहुत पुरानी परंपरा है। हिंदू धर्म में चावल को बहुत शुभ माना जाता है और यह स्थिरता का प्रतीक है। इसलिए चावल से भरा नाप रखा जाता है। जब वह उस उपाय को पार कर घर में प्रवेश करती है तो ऐसा माना जाता है कि घर में जीवन भर के लिए सुख-समृद्धि आती है। नवविवाहितों के घर में प्रवेश करने पर घर की कुंवारी कन्याओं को धन या उपहार दिया जाता है। माना जाता है कि यह प्रतीक इस बात का संकेत देता है कि देवी लक्ष्मी घर में प्रवेश कर चुकी हैं। साथ ही वह अपने साथ दौलत भी लाई है।
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पार्टनर का बर्थडे साल का सबसे खास दिन होता है। अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड या पति-पत्नी से प्यार करते हैं तो आपका भी मन करेगा कि उनके इस बर्थडे पर कुछ खास किया जाए जिससे वो स्पेशल फील कर सकें और आप दोनों का रिश्ता बेहतर और मजबूत हो सके। अगर आपके रिलेशनशिप को बहुत साल बीत गए हैं या शादी की भी कई सालगिरह निकल चुकी हैं तो आपको अपने पार्टनर को बर्थडे पर कुछ बढिया सा सरप्राइज़ देने के बारे में जरूर सोचना चाहिए। आज हम आपको कुछ ऐसे आइडियाज़ के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आप अपने पार्टनर को बर्थडे पर सरप्राइज़ दे सकती हैं। सरप्राइज़ में जो भी मिले उसे देखकर मन एक दम खुश हो जाता है और अगर सरप्राइज़ बर्थडे पर मिले तो उसकी खुशी दोगुनी हो जाती है। आप उनके बर्थडे पर सरप्राइज़ पार्टी रख सकते हैं। उन्हें बिना बताए उनके दोस्तों और परिवार के सदस्यों को इंवाइट कर लें और फिर उन्हें अचानक से सरप्राइज़ कर दें। ये सब देखकर उन्हें वाकई में बहुत स्पेशल फील होगा और आपके लिए प्यार और इज्जत देानों ही काफी बढ़ जाएंगीं। हर किसी की कोई ना कोई फेवरेट डिश तो जरूर होती है। जन्मदिन के मौके पर आप उनके लिए उनकी को पसंदीदा डिश बना सकते हैं। जब मौका खास है तो खाना भी खास बनना ही चाहिए। अगर वो आपसे किसी डिश को खाने की लंबे समय से फरमाईश कर रहे हैं तो आप उनके जन्मदिन पर वो डिश भी बना सकते हैं। इसे देखकर उनका दिल एक दम खुश हो जाएगा। उनकी पंसद का कोई तोहफा देकर भी आप उनके जन्मदिन को खास बना सकते हैं। उन्हें आप बर्थडे पर कोई बढिया सी ड्रेस, घड़ी या उनकी पंसद का कोई भी तोहफा दे सकते हैं। गिफ्टस मिलना हर किसी को अच्छा लगता है, आपको बस अपने पार्टनर की पसंद पता होनी चाहिए। अगर आपकी शादी हो चुकी है तो आप अपनी शादी के शुरुआती दिनों को फिर से याद कर सकते हैं। उनके जन्मदिन पर अपने कमरे को फूलों से सजा दें। बिलकुल वैसे ही जैसे शादी की पहली रात पर सजाया गया था। इसे देखकर वाकई में बहुत खुश हो जाएंगें और आपको चूम लेंगें। अपने पार्टनर के स्पेशल दिन को और खास बनाने के लिए ये सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके साथ कैंडल लाइट डिनर और रोमांटिक कपल डांस बिलकुल ना भूलें। आपकी कुछ खास करने की चाहत उनके दिल में जरूर जगह बना लेगी। प्यार से आप इस दुनिया में सब कुछ जीत सकते हैं। अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उनके जन्मदिन पर आपका कुछ खास करना आपके रिश्ते के लिए बहुत कुछ कर जाएगा। अगर लंबे समय से आप दोनों एक-दूसरे को वक्त नहीं दे पा रहे थे तो भी आप जन्मदिन के बहाने अपने रिश्ते में नई जान भर सकते हैं। जन्मदिन के बहाने ही सही आप दोनों के बीच की दूरियां खत्म हो जाएंगीं और आपका रिश्ता फिर से प्यार से महकने लगेगा।
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PATNA: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने उर्दू अनुवादक व अन्य उर्दू कर्मियों को नियुक्ति- पत्र दिया। संवाद में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय चौधरी समेत अन्य मंत्री व अधिकारी शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में लाखों भाईयों के चेहरे पर मुस्कान लायेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम ने नवनियुक्त उर्दू अनुवादकों को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ईने वाले दिनों में लाखों भाइयों के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे. हमारे मुख्यमंत्री यह काम कर रहे हैं. देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. नौजवानों को काम नहीं मिल रहा है. बेरोजगारी देश का दुश्मन है. बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हम लोगों का प्रयास है कि जितने भी विभाग हैं, उनमें जो रिक्त पद हैं उनको जल्द से जल्द भरा जाए. रिक्त पद जब भरी जाती हैं उससे विभाग और मजबूत होता है, उसको बल मिलता है . इस काम में हम लोग लगे हुए हैं. नियुक्ति पत्र वितरण हर डिपार्टमेंट में किया जा रहा है. इसकी शुरुआत हो गई है. इतना हम जरूर कहेंगे कि नीतीश जी और महागठबंधन सरकार के रहते हुए भाईचारा, अमन चैन और शांति कायम रहेगा.
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Adnan Sami On YS Jagan Mohan Reddy: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने फिल्म RRR के 'नाटू-नाटू' गाने को ऑस्कर मिलने पर ट्वीट कर खुशी जताई। ट्वीट में सीएम रेड्डी ने लिखा, 'तेलुगू झंडा ऊंची उड़ान भर रहा है'। इस ट्वीट पर सिंगर अदनान सामी ने सीएम रेड्डी की आलोचना की है और कहा है कि ये उनकी छोटी मानसिकता को दिखाता है। 'हमें गौरवान्वित महसूस कराने के लिए धन्यवाद. . . ' ट्वीट में आगे जगन मोहन रेड्डी ने लिखा,"एसएस राजामौली, जूनियर एनटीआर, राम चरण, एम एम कीरावानी, चंद्रबोस और RRR फिल्म के सभी टीम को धन्यवाद। पूरी टीम का धन्यवाद, जो उन्होंने मुझे और दुनिया भर के करोड़ों तेलुगू और सभी भारतीयों को गौरवान्वित महसूस कराया। भारतीयों को अविश्वसनीय रूप से गर्व है। " अदनान सामी ने कहा- 'ये तलाब के मेंढक हैं जो. . . ' जगन मोहन रेड्डी के ट्वीट पर अदनान सामी ने प्रतिक्रिया देकर उनके 'तेलुगू सोच' की आलोचना की है। अदनान सामी ने ट्वीट करते हुए लिख, "ये छोटी सोच वाले तलाब के मेंढक हैं, जो समुद्र के बारे में सोच ही नहीं सकता है. . . क्योंकि यह उनकी इज्जत वाली छोटी नाक से परे है. . . ! ! आपको क्षेत्रीय विभाजन को बढ़ावा देने के लिए शर्म आनी चाहिए। आप राष्ट्रीय गौरव को गले लगाने और इसका प्रचार करने में असमर्थ होने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए! जय हिंद! " अदनान सामी का ये ट्वीट वायरल हो गया है। कुछ यूजर्स ने उनको इस ट्वीट के लिए ट्रोल भी किया है। एक यूजर ने ट्वीट कर कहा, "आखिर नॉर्थ इंडिया वाले साउथ इंडिया की तरह उनकी भाषा क्यों नहीं सीखते हैं, जैसे साउथ इंडिया वाले हिंदी बोलना सीखते हैं। " अदनान सामी ने इस ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, "ठीक है, ऐसी स्थिति में आपको अपनी फिल्मों को हिंदी में डब नहीं करना चाहिए। जिसकी वजह से उनकी फिल्में बड़ी हिट होती है। इन्हें क्षेत्रीय भाषा में ही रखें ! ! जबकि हर भाषा कीमती है और सभी प्यार और सम्मान के योग्य है, आपको इस हास्यास्पद बकवास को रोकने और बहुसंख्यकों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। " 'मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा. . . ' अदनान सामी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, "मेरा मुद्दा कभी भी भाषा को लेकर नहीं रहा है। मेरा मुद्दा बहुत सरल रहा है . . . सभी भाषाएं, चाहे उनकी उत्पत्ति और बोली कुछ भी हो, आखिरकर, हम सब एक भारतीय हैं और उसके बाद कुछ और हैं। बस इतना ही! मैंने सभी भाषाओं के लिए समान दिखाया है और सम्मान के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में असंख्य गीत गाए हैं। "
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है, क्या कहा ? सुना कि नहीं। केवलज्ञान प्राप्त करने के लिए केवल घातिया कर्मा के का नाश करना होता है, घातिया कर्मा मे, चाहे मूल प्रकृति हो या उत्तर प्रकृति, कोई भी प्रकृति प्रशस्त प्रकृति नहीं होती। इसलिए जैनाचार्या का कहना है कि सर्वप्रथम पाप कर्मों की निर्जरा करके नवीन कर्मा को तू रोक ले पुण्य तेरे लिए कोई विपरीत काम नहीं करेगा, वाधक नहीं होगा। पुण्य को रखने की बात नहीं कही जा रही है, लेकिन निर्जरा का क्रम तो यही होगा कि सर्वप्रथम पाप का सवर कर, नवीन पापास्रव को रोके, पूर्ववद्ध कर्मों की निर्जरा करे और वर्तमान वन्ध को मिटा दे तो नियम में वह केवलज्ञान प्राप्त कग टेगा। यह भी ध्यान रखना कि जब तक साता का आस्रव होता रहेगा तब तक उसे मुक्ति का कोई ठिकाना नहीं है। केवलज्ञान होने के उपरान्त भी आठ वर्ष अन्तर्मुहूर्त कम पूर्वकोटि वर्ष तक भी वह रह सकता ह। वैभाविक पर्याय में और केवल साता का आस्रव होता रहता है। उस आस्रव का रोकने के लिए आचार्य कहते हैं कि तृतीय व चतुर्थ शुक्ल ध्यान आवश्यक है, वे ही भीतर वैठे हुए अघातिया कर्मों का नाश करने में समर्थ है। अघातिया कर्मा की निर्जरा करने का नम्वर वाट में आता है, लेकिन घातिया कर्मो की निर्जरा करने का प्रावधान पहले है। सवर के क्षेत्र मे, वन्ध के क्षेत्र में भी इसी क्रम की बात आती है। इसलिए "जिन पुण्य पाप नहीं कीना" इस ढोहे का अर्थ- मर्म सही-सही वही व्यक्ति समझ सकता है जो कर्म सिद्धान्त के बारे मे सही-सही जानकारी रखता है। यदि इस प्रकार की सही-सही जानकारी नहीं रखता हुआ भी वह कहता है कि सम्यग्दृष्टि पाप-पुण्य दानो प्रकार के कर्मास्रव को राक देता है, वह भी चतुर्थगुणस्थान मे रोक देता है, ता उमं तो अपने आप ही वन्ध हांगा ओर कोई छोटा वन्ध नहीं, वहुत वडा वन्ध माना जायेगा, क्योंकि सामन वाला सोचेंगा कि विकल्प तो मिटे नहीं फिर भी यह कह रहे है कि पुण्य नहीं होना चाहिए और हो रहा है तो इसका अर्थ है कि मेरे पास सम्यग्दर्शन नहीं है और धर्मात्मा भी नहीं हो सकता जब तक, तब तक कि पुण्य वन्ध को न रोकू। ऐसा करने वाले व्यक्ति के पास जब खुद के सम्यग्दर्शन का पतियारा (ठिकाना ) नहीं है, तो चारित्र की बात करना ही गलत हो जाएगी। इस प्रकार यदि श्रद्धान वना लेता है तो दोनो ही ससार की ओर वढे चले जा रहे है - उपदश सुनने वाला भी और उपदेश देने वाला भी। जैसा कि कहा है"केचिठामादान्नष्टाः केचिच्चाज्ञानान्नष्टाः केचिन्नष्टैरपि नष्टाः" लोग प्रमाद के द्वारा नष्ट हो जाते है, कुछ लोग अज्ञान के द्वारा नष्ट हो
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आपके किसी काम में दोस्त बहुत मददगार रहेगा। आप के खर्चे एक एक बढ़ेंगे, जिन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होगा। सेहत में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है, कुछ लोग बाहर जाने की खबर सुनकर खुश हो सकते हैं। शादीशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन में आज का दिन खुशियां खोलेगा और आपका जीवन साथी बहुत प्यार भरा बातें करेगा। व्यवसाय के लिए आज कुछ नई सोच का समय होगा। आपको भी लाभ होगा। आप किसी महत्वपूर्ण यात्रा पर जा सकते हैं, जिसके परिणामजे आपके हाथ में होंगे। प्रेम जीवन बिता रहे लोग रिश्ते में बढ़ते हुए गलतफहमी और विरोधाभास से दुखी हो सकते हैं, जबकि शादीशुदा लोगों का गृहस्थ जीवन किसी गलतफहमी का शिकार हो सकता है। आप काफी हंसी मजाक के मूड में होंगे और अपने आसपास की ओर से लोगों को खुश रखने की कोशिश करेंगे। परिवार का माहौल टेंशन से भरा हो सकता है, इसलिए आपको अपने हल्के अंदाज से सब को खुश रखने की कोशिश करनी होगी। आपके काम को लेकर स्थितियां आज बहुत कुछ अच्छा दिखा रही हैं, इसलिए इस समय का पूरा फायदा उठाएं। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज का दिन बहुत ही खुशनुमा होगा और अपने जीवन साथी के साथ अपने संबंधों में घनिष्ठता आएगी और संतान से प्रेम जताएंगे। आपकी किस्मत भी साथ देगी। यदि आप शादीशुदा हैं, तो आज आप काफी गंभीर मुद्रा में रहेंगे और अपने आसपास की ओर जाने वाली चीजों पर आपका पूरा ध्यान रहेगा। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, तो आज का दिन आपको उनका इंतजार करना पड़ेगा, संभव है कि उनसे बात आज ना हो पाए। आज का दिन आप को बड़ा अच्छा महसूस होगा, लेकिन मानसिक रूप से कुछ ऐसी बातें आपके दिमाग में चलती रहेंगी, जो आपका काफी समय और ऊर्जा नष्ट करेगे, इसलिए अपने काम पर ध्यान जरूर दें क्योंकि उसको लेकर आपको विनम्र होना जरूरी है। आपका इनकम आज अच्छी तरह से होगा। कुछ ऐसे काम होंगे, जो आप अपने आप को इनकम को बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। विवाहशुदा लोगों के गृहस्थ जीवन को देखें, तो आज थोड़ी सावधानी रखें। बनाएगे। शादीशुदा जीवन को लेकर आपकी जो धारणाएं हैं। आज वह संशोधितगी और आप अपने जीवनसाथी से काफी निकटता महसूस करेंगे। आप समझेंगे कि दांपत्य जीवन वास्तव में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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को स्वीकार किया है। माधुर्य :मम्मटाचार्य के अनुसार चित्त के द्रवीभूत का कारण तथा आह्लादस्वरूप से सम्भोगश्रृंगार में रहने वाला गुण माधुर्य गुण है। सामान्यतः तो माधुर्य गुण सम्भोग श्रृंगार में ही स्थित रहता हैं, किन्तु करूण रस, वियोग श्रृंगार तथा शान्त रस में माधुर्य गुण अपने अतिशय चमत्कार को प्राप्त करता है। अर्थात् अत्याधिक • आह्लाद स्वरूप को धारण करता है। संयोग श्रृंगार की अपेक्षा करूण रस में माधुर्य गुण का उत्कर्ष हुआ करता है। करूण रस की अपेक्षा वियोग श्रृंगार में माधुर्य का प्रकर्ष देखा जाता है। तथा शान्त रस में वियोग श्रृंगार से भी प्रकृष्ट रूप में माधुर्य गुण पाया जाता है। मम्मट ने चित की द्रुति की मात्रा के आधार पर ही उपरोक्त रसों में माधुर्य के उत्कर्ष का निर्धारण किया है मम्मट है इस सन्दर्भ में आन्नदवर्धन से सहमत नहीं है क्योंकि आनन्दव नि जहाँ विप्रलभ श्रृंगार की अपेक्षा करूण रस में चित्त की द्रुति अधिक मानते हैं, वहीं मम्मट करूण की अपेक्षा विप्रलम्भ में चित्त को अधिक द्रुतिशक्ति युक्त मानते है । साथ ही आनन्दवर्धन शान्त रस में माधुर्य की सत्ता नहीं मानते किन्तु मम्मट शान्त रस में ही चित्त का प्रकृष्ट द्रवीभाव स्वीकार करते हैं । ओज गुण :ओज चित के दीप्ति रूप विस्तार का हेतु है । जिसकी स्थिति वीर रस में है। जिस प्रकार संयोग श्रृंगार ही माधुर्य का मुख्य आधार है, ठीक उसी प्रकार वीररस में स्थित रहने वाला आत्मा
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कैलाश विजयवर्गीय के दिल में ये कसक कैसी, नड्डा से बातचीत का पब्लिक में खुलासा क्यों? लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने जेपी नड्डा को फोन किया. नड्डा ने उनसे कहा कि वो उन्हें बनाना तो कुछ और चाहते थे, लेकिन अभी यही ठीक है. ये बात खुद विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने कही. आखिर इस बात को सार्वजनिक करने की जरूरत क्या थी? एक महीने के भीतर अमित शाह के तीन दौरे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की तैनाती. ये वो बिंदु हैं, जो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में मध्य प्रदेश की अहमियत प्रदर्शित कर रहे हैं. मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में सबसे ऊपर आता है, जहां राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की पकड़ और बीजेपी का संगठन सबसे मजबूत माना जाता है. लेकिन चुनावी सर्वे, पिछले नतीजे और राज्य से आ रही खबरों ने पार्टी नेतृत्व के चेहरे पर शिकन पैदा कर दी है. हालिया सर्वे बता रहे हैं कि बीजेपी की हालत इस बार के विधानसभा चुनावों से पहले चिंताजनक है. मध्य भारत के महत्वपूर्ण राज्य को बीजेपी हरगिज भी अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहती. ऐसे में खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वो लगातार मध्य प्रदेश में दौरे कर रहे हैं. अपने करीबियों और विश्वासपात्र नेताओं को राज्य में जिम्मेदारी दे रहे हैं. इसी लिस्ट में एक नाम कैलाश विजयवर्गीय का भी है. बीजेपी ने शनिवार को केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची जारी की. इस सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम ठीक उसी जगह पर मौजूद था, जहां पिछले लगभग एक दशक से वो काबिज हैं. उन्हें पार्टी ने फिर एक बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाया. वो लगातार चौथी बार इस पद पर हैं. उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में कोई भी मंत्री इतने लंबे समय तक महामंत्री के पद पर नहीं रहा है. शाम होते-होते मध्य प्रदेश बीजेपी ने चुनाव प्रबंधन समिति का भी ऐलान कर दिया. इस समिति में भी संयोजक नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी प्रदेश प्रमुख वीडी शर्मा के बाद तीसरा नाम कैलाश विजयवर्गीय का था. वहीं लगभग एक महीने पहले पार्टी ने उन्हें पांचों चुनावी राज्यों के पॉलिटिकल फीडबैक विंग की कमान भी सौंपी थी. पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद से कैलाश विजयवर्गीय को लगातार किसी बड़े काम की तलाश थी. पार्टी ने चुनावों से पहले चुनाव प्रबंधन समिति में जगह दे और एक बार फिर से राष्ट्रीय महामंत्री बना, उनकी इस मांग को पूरा किया, लेकिन फिर भी कैलाश विजयवर्गीय के दिल में शायद कसक रह गई है. नड्डा से बातचीत को सबके सामने रखने की जरूरत क्या? राजनीति के जानकारों का कहना है कि विजयवर्गीय को ये बात बताने की कोई विशेष जरूरत नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया. इसका मतलब ये निकाला जा सकता है कि वो राजनीतिक गलियारों में एक मुद्दा छोड़ना चाहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व उन्हें कुछ बड़ा या कुछ अलग देने के मूड में है. सवाल उठता है कि ऐसा क्या था जो नड्डा उन्हें देना चाहते थे? राजनीतिक गलियारों में बहुत पहले से चर्चा हैं कि मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह चौहान के विकल्प के तौर पर लिए जाने वाले नामों में कैलाश विजयवर्गीय का भी नाम है. शायद विजयवर्गीय इसी के बारे में कहना चाहते हों! इसपर वरिष्ठ पत्रकार डॉ सत्य प्रकाश शर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाना राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा का काम नहीं है. हां, वो विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष जरूर बना सकते थे. क्योंकि मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले काफी समय से अध्यक्ष पद को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. मौजूदा अध्यक्ष वीडी शर्मा की संगठन में कमजोर दिखती पकड़ और सीएम शिवराज सिंह चौहान के साथ हल्की ट्यूनिंग उन्हें इस पद से हटाए जाने के कयासों की वजह बनते रहे हैं. ऐसे में अगर बीजेपी अध्यक्ष बदलती तो विजयवर्गीय को चुन सकती थी. सत्य प्रकाश शर्मा आगे बताते हैं कि ऐसा करने से चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के पद पर विजयवर्गीय की दावेदारी मजबूत हो जाती, क्योंकि चुनाव संयोजक, चुनाव प्रबंधक और राज्य प्रमुख के पद पर काबिज व्यक्ति का चुनावी कामकाज मे अहम रोल रहता है. इस पद पर काबिज शख्स मुख्यमंत्री पद पर मजबूत दावेदारी ठोक सकता है, क्योंकि चुनाव उसी की निगरानी में हुआ है. शर्मा ये भी बताते हैं कि चुनावों में चार महीने शेष हैं और ऐसे में अगर पार्टी सीएम या सीएम फेस बदलती है, तो इसका जनता में गलत संदेश जाएगा. ऐसे में बीजेपी अभी भी केंद्रीय नेतृत्व में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर ही आगे बढ़ रही है. इसलिए सीधे-सीधे विजयवर्गीय को सीएम बनाने का तो सवाल ही नहीं है. हां अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी इस पद पर दावेदारी मानी जा सकती है. हालांकि ये भी साफ है कि बीजेपी आगामी चुनावों के लिए अब तक कोई चेहरा तय नहीं कर सकी है. एक और वरिष्ठ पत्रकार का इस मसले पर कहना है कि विजयवर्गीय राज्य और संगठन के लगभग सभी पद पर रह चुके हैं, बस सीएम बनना बाकी है, जिसको लेकर उन्होंने नड्डा के साथ हुई बातचीत को सार्वजनिक किया. ताकि कम से कम राजनीतिक गलियारों में तो ये हवा उड़ा ही दी जाए.
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फारबिसगंज कांवरिया सेवा समिति का टंकेश्वर में दो माह तक लगने वाले शिविर का उद्घाटन स्थानीय सांसद प्रदीप कुमार सिंह, नप की मुख्य पार्षद वीणा देवी, उप मुख्य पार्षद नूतन भारती, पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण मेहता, समाजसेवी समर सिंह, पार्षद मनोज सिंह, बुलबुल यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं फीता काटकर किया। इस मौके पर सांसद प्रदीप सिंह ने सेवा समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस बार दो माह तक सेवा शिविर लगेगा। कहा कि शिव भक्तों की सेवा करने का कार्य बड़े ही सौभाग्य से लोगों को मिलता है। उन्होंने सच्चे मन से भक्तों की सेवा करने की बात कही। वहीं मुख्य पार्षद वीणा देवी ने कहा कि फारबिसगंज के लोग हमेशा से ही समाजसेवा से जुड़े रहते हैं। सावन माह के दौरान हज़ारों, लाखों शिव भक्तों की सेवा में फारबिसगंज वासी लीन रहते है। कावड़ियों को निःशुल्क सेवा प्रदान करने के लिए उन्होंने सेवा समिति के सदस्यों को हर संभव सहयोग देने की बात कहीं। इससे पूर्व समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश केशरी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष विनोद धनावत, मुरली प्रसाद साह, सचिव अशोक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय रांका, डोमन भगत, डा. उमेश वर्मा, महावीर बैद, हेमंत सिखवाल, परमेश्वर भगत, सुशील अग्रवाल, सुरेश केशरी, मांगीलाल वायंवाला, विनोद पटेल, श्रीप्रकाश जी, लालू यादव, आकाश राज, अमन राज, टंकेश्वर के मुखिया नारायण यादव, शंभू यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। इधर सेवा समिति के प्रवक्ता पूनम पांडिया ने बताया कि दो माह तक लगने वाले सेवा शिविर में शिव भक्तों के लिए निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, मेडिकल सेवा, डाक बम के लिए विशेष फल - पानी आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही रात्रि विश्राम में गर्म - ठंडा पानी और कलाकारों द्वारा मधुर भजनों की प्रस्तुति, शौचालय, स्नानागर आदि की भी व्यवस्था है।
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नई दिल्लीः धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के खिलाफ पटना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला दर्ज कर लिया गया है। दरअसल, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रयागराज के संगम में कैबिनेट मंत्रियों के साथ सीएम योगी के स्नान करने पर तंज कसा था। शशि थरूर ने तंज कसते हुए ट्वीट किया था कि, 'गंगा भी स्वच्छ रखनी है और पाप भी यहीं धोने हैं। इस संगम में सब नंगे हैं! जय गंगा मैया की! ' कई यूजर्स ने थरूर के इस ट्वीट को लेकर उन्हें जमकर ट्रोल किया था और कांग्रेस नेताओं की पुरानी तस्वीरें साझा की थी। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को प्रयागराज में सीएम योगी ने अपने मंत्रिमंडल के साथ संगम तट पर स्थित किले में अक्षयवट का दर्शन कर पूजा अर्चन की थी। सीएम योगी ने सरस्वती कूप के भी दर्शन किए थे, इसके बाद सीएम योगी ने अपने मंत्रियों के साथ संगम में डुबकी लगाई थी। इस दौरान उनके साथ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और अन्य साधु-संतों ने भी संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी। आपको बता दें कि शशि थरूर के इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने तल्ख़ प्रतिक्रिया दी थी। यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि थरूर को कुंभ का महत्व कैसे पता होगा, जिस परिवेश और संस्कृति में उनका रहना है, वे लोग ये कुम्भ को नहीं समझ सकते हैं। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि आप लोगों ने बहुत से पाप किए हैं, आप भी कुंभ में एक पवित्र डुबकी लगाइए और हो सकता है कि भागवान आपके गुनाहों को क्षमा कर दें।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने आज खुलासा किया कि सुप्रीम कोर्ट में एक मेंशनिंग अधिकारी होने का कारण यह सुनिश्चित करना था कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को मेंशन करने पर प्राथमिकता न मिले, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा, "हम वरिष्ठों को कोई विशेष प्राथमिकता नहीं देना चाहते हैं, और कनिष्ठों को उनके अवसरों से वंचित नहीं करना चाहते हैं। इसलिए यह प्रणाली बनाई गई थी, जहां सभी मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के समक्ष मेनशन कर सकते हैं। " CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मेंशनिंग अधिकारी द्वारा इस तरह के अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वकील उनके समक्ष मामलों को मेनशन कर सकते हैं। "यदि इसे अस्वीकार कर दिया जाता है, तो आप स्वतः उल्लेख कर सकते हैं। एक विशिष्ट मामला पेश करें, मैं इस पर गौर करूंगा। " यह टिप्पणी अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा मेनशन प्रणाली नोटिंग के बारे में शिकायत करने के बाद आई है। "अत्यावश्यक ज्ञापन दायर किए जाने के बाद भी, मामले ठंडे बस्ते में हैं। " मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें हमेशा पहले मेनशन करने वाले रजिस्ट्रार के पास जाने का निर्देश दिया, और केवल तभी जब इस तरह के अनुरोध को खारिज कर दिया जाए, तो वकीलों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करता है कि किसी को भी विशेष प्राथमिकता न मिले"। हालांकि, भूषण ने शिकायत की कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब रजिस्ट्रार अनुरोध को अस्वीकार नहीं करता है और हरी झंडी देता है, लेकिन मामला सूचीबद्ध नहीं होता है। CJI ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि ऐसा कोई उदाहरण सामने आता है, तो इसका उल्लेख न्यायालय के समक्ष किया जा सकता है।
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कोरोना काल में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन ज्यादा पैसे नहीं है तो आप घर की छत का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फार्मिंग से लेकर कई बिजनेस शुरू किए जा सकते हैं. कोरोना संकट में एक बार फिर रोजगार पर खतरा मंडराने लगा है. कई लोगों की तो जॉब भी जा चुकी है. ऐसे में अगर आप खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन पर्याप्त जमीन नही है और न ही दुकान लेने के लिए ज्यादा पैसे, तो टेंशन न लें. आप घर की खाली पड़ी छत को अपनी कमाई का जरिया बना सकते हैं. इसमें कम लागत के आप उद्यम शुरू कर सकते हैं और तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. तो क्या हैं ये बिजनेस आईडियाज (Business Ideas) आइए जानते हैं. अगर आप बिना निवेश किए अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप अपनी छत पर होर्डिंग्स लगवा सकते हैं. इसके लिए आप घर की छत को किराये पर दे सकते हैं. अगर आपका घर मेन रोड पर है तो बड़ी - बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड के प्रचार के लिए विज्ञापन के लिए छत का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके बदले कंपनी आपको अच्छा किराया देगी. होर्डिंग्स जितने बड़े होंगे कीमत उतनी ही अच्छी मिलेंगी. ये बिजनेस करने के लिए विज्ञापन एजेंसियों से आप संपर्क कर सकते हैं. अगर आपकी घर की छत खाली है तो आप इसे मोबाइल कंपनियों को किराए पर दे सकते हैं. कंपनियां यहां मोबाइल टावर लगाकर आपको हर महीने बढ़िया किराया देंगी. चूंकि मोबाइल कंपनियों ने कॉल ड्रॉप की बढ़ती समस्या को खत्म करने के लिए जगह-जगह टावर लगाने का निर्णय लिया है, इससे आपकी कमाई की संभावना बढ़ गई है. हालांकि इसके लिए आपको न केवल पड़ोस के लोगों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा, बल्कि आपको स्थानीय नगर निगम से भी अनुमति लेनी होगी. भारत में टेरेस खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसके लिए बिल्डिंग की छत पर ग्रीनहाउस बनाना होगा. जहां पॉलीबैग में सब्जी के थैले लगाए जा सकते हैं और ड्रिप सिस्टम के जरिए लगातार सिंचाई की जा सकती है. तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए, उपकरण स्थापित करना होगा. पॉलीबैग में कीचड़ और कोकोपिट भरना पड़ता है. इसके लिए जैविक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरीके से आप आर्गेनिक सब्जियां उगा सकते हैं. इनकी मार्केट में काफी मांग है. सौर ऊर्जा से संचालित उपकरण इन दिनों काफी चलन में है. सरकार भी सोलर पैनल को लगाए जाने को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में आप अपने घर की छत पर सोलर प्लांट लगवाकर इससे बिजली का बिल बचा सकते हैं. आप चाहे तो अतिरिक्त बिजली को बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं. इसके लिए आपको अपने क्षेत्र में DISCOM से संपर्क करना होगा. वो आपके घर पर एक मीटर लगाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि आपने DISCOM को कितनी बिजली बेची है.
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परामर्श ठीक हो जानेपर, दुर्योधन ने अपने पिता अन्धराज धृतराष्ट्रको भी राजी कर, जुआ खेलनेके लिये युधिष्ठिरके पास निमन्त्रण भेजवाया। दुर्भाग्यवश राजा युधिष्ठिरने यह अनुचित आमन्त्रण स्वीकार कर लिया और यह जानते हुए भी, कि जुआका दुर्व्यसन अत्यन्त गर्हित है, हस्तिनापुर जाकर जुआ खेलने लगे । इसका परिणाम यह हुआ कि समस्त धनधान्य और राजपाट हार गये ! यहांतक, कि मूर्खतावश भाइयोंको और अन्त में द्रौपदीको भी दांवपर रख दिया। दुर्योधनकी ओरसे धूर्त्तधुरन्धर शकुनी पासा फेंक रहा था। उसने छलसे सब बाजो जीत ली। युधिष्ठिर अपना सर्वस्व खोकर चुपचाप बैठ गये ! राजा युधिष्ठिरके राजसूय यज्ञके समय, मय दानव की बनाई हुई सभामें, दुर्योधन भ्रमवश जलको स्थल और स्थलको जल समझकर गिर पड़ा था। उस समय भीमसेन आदिने उसकी खूब हँसो उड़ाई थी। द्रौपदीने तो यहांतक कह डाला था, कि अन्धेकी सन्तान भी अन्धी ही होती है। दुर्योधन अपने उस अपमानको भूला न था । इस समय बदला लेनेका अच्छा अवसर देखकर उसने भरी सभामें द्रौपदीको घसीट लानेकी आज्ञा दी और जहां तक बन पड़ा, अपने अपमानका खूब बदला लिया। द्रौपदी की लाञ्छना देखकर भीमसेन आदिको बड़ा क्रोध हुआ। परन्तु युधिष्ठिरके रोकनेसे ये कुछ भी न कर सके। अन्तमें निश्चय हुआ, कि इस हारके बदले युधिष्ठिर आदि बारह वर्ष
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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) के इंदौर शहर (Indore) में फ्रेंडशिप डे (Friendship day) के नाम पर एक बार फिर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई, भले ही पुलिस ने पहले ही फ्रेंडशिप के नाम पर अश्लीलता परोसने वाले होटल और आयोजकों को चेतवानी दे दी थी। लेकिन उसका कोई असर नजर नहीं आया, यही कारण है कि बीते रविवार को फ्रेंडशिप डे के नाम पर एक बार फिर शहर के होटेल्स में जमकर शराब के जाम छलके और अश्लीलता की सारी हदें पार हुई। शहर के सयाजी होटल से भी ऐसे नज़ारे सामने आए जिसमें ना सिर्फ मर्यादा को तार-तार कर रख दिए बल्कि सवाल भी खड़े कर दिए कि पुलिस की चेतावनी के बावजूद भी आखिर यह आयोजन कैसे किए गए। बताया जा रहा है कि फ्रेंडशिप डे के नाम पर कल इंदौर शहर के सयाजी होटल में हाईप्रोफाइल लोगों की पार्टी आयोजित की गई। जिसमें लोगों द्वारा नशाखोरी और आपत्तिजनक हरकते की है। दरअसल, स्वच्छ इंदौर की छवि को बरकरार रखने के लिए पार्टी के एक दिन पहले ही इंदौर कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने आदेश देते हुए कहा था कि फ्रेंडशिप डे के दिन नशाखोरी और अश्लील पार्टियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी, जो भी नियमों की अनदेखी करेगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, पुलिस की टीम ऐसे स्थानों की चेकिंग करेगी। इसके बावजूद भी हाई प्रोफाइल लोगों ने पार्टी कर ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस कमिश्नर के इस आदेश की तो धज्जियां उड़ा दी गई, लेकिन अब वहीं इन इलाकों के पुलिस अधिकारी जांच की बात कह रहे है। जानकारी के मुताबिक, फ्रेंडशिप डे के दिन हाईप्रोफाइल लोगों की पूल पार्टी में अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी गई। दरअसल, कुछ लोगों ने इस पार्टी में नशाखोरी की तो कुछ कपल्स ने सेल्फी पॉइंट पर एक दूसरे को लिप किस किया। इतना ही नहीं लोगों ने इसके फोटो और वीडियो भी बनवाए। बताया गया है कि पुल में भी कई कपल नशे की हालत में आपत्तिजनक हरकत करते हुए नजर आए। इस दौरान कई युवक युवती नशे में धुत दिखी। बता दे, इस पार्टी का आयोजन बीते दिन कवाब विले पूल साइड में किया गया था। ये पार्टी दिन से शुरू हुई और देर रात तक चली। इसके अलावा कल यानी फ्रेंडशिप डे के दिन कनाड़िया थाना क्षेत्र के बायपास स्थित ऐडम्स एलए पब में भी ऐसी पूल पार्टी का आयोजन होने वाला था लेकिन इसको लेकर काफी विरोध होने के बाद यहां की पार्टी को निरस्त कर दिया गया।
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उसके आगे दौड़ गया - परदेश में वह अकेलो-पास पैसा नहीं, और उससे टिकट तलब किया जा रहा है और वह नहीं जानती कि पति को कैसे सूचित करें कि वह कहाँ है । लेकिन क्षण ही भर मे इस डर का स्थान एक दूसरे डर ने ले लिया । कहो वे उस तेज चलती हुई गाड़ी पर सवार होने के लिए कूदे और ~... यह डर उससे नहीं सहा गया । वह जितना बाहर झुक सकती थी, झुककर रामलाल को देखने लगी- उसके पैरों का गति को देखने लगी... और उसके मन में यह होने लगा कि क्या उसने पति से प्यास की बात कही - यदि कुछ देर बैठ ! रहता तो मर न जाती... एकाएक रामलाल गाड़ा के कुछ और निकट आकर कूदा। इन्दु जरा और भुकी कि देखे, वह सवार हा गया कि नहीं और निश्चिन्त हो जाय। उसने देखा - अन्धकार-कुछ डूबता-सा - एक टीस-जॉध और कन्धे मे जैसे भीषण आग - फिर एक दूसरे प्रकार का अन्धकार । गाड़ी मानो दिवश क्रोध से चिचियाती हुई रुकी कि अनु भूतियों से बँधे हुए इस क्षुद्र चेतन संसार की एक घटना के लिए किसी ने चेन खीचकर उस जड़, निरीह और इसलिए अडिग शक्ति को क्यो रोक दिया है । गाड़ी के रुकने का कारण समझने उतरने से पहले ही राम लाल ने डिब्बे तक आकर देख लिया कि इन्दु उसमें नहीं है । रेल का पहिया जाँघ और कन्धे पर से निकल गया था .
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जैसा कि पार्टी वीक और फेस्टिव स्पिरिट में होता है, कुछ वैसा ही दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा सर्दियों के इस मौसम में अपने पहनावे को लेकर कुछ ज्यादा ही स्टाइलिश नजर आ रही हैं. जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जैसा कि पार्टी वीक और फेस्टिव स्पिरिट में होता है, कुछ वैसा ही दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा सर्दियों के इस मौसम में अपने पहनावे को लेकर कुछ ज्यादा ही स्टाइलिश नजर आ रही हैं. अपने फैशन को वो एक लेवल और ऊपर लेकर चली गई हैं. अपने गॉर्जियस लुक के साथ उन्होंने एक और एक्सपेरिमेंट कपड़ों को लेकर किया है. सोमवार को सोनाक्षी ने ब्लू को काले और लाल रंग में बदल दिया है. हम इस सर्द दिसंबर के स्तर को तो कम नहीं कर सकते लेकिन फैशन के लेवल को और ऊपर लेकर जा सकते हैं, जैसा कि सोनाक्षी ने किया है. मोहित राय के स्टाइल किए हुए ड्रेस को सोनाक्षी सिन्हा ने पहना हुआ है. ब्लैक ड्रेस में वो बेहद खूबसूरत लग रही हैं. सोनाक्षी की ये ड्रेस एक पार्टी ड्रेस से कम नहीं है. आप चाहें तो इसे किसी भी तरह की पार्टी में पहनकर जा सकते हैं. ये काले रंग का लेदर ड्रेस आपके लुक को और भी निखार देगा. सिल्हूट को हाईलाइट करने के लिए उसे ऐसा डिजाइन किया गया है. एक साधारण सा दिखने वाला लेदर ड्रेस भी अच्छा हो सकता था लेकिन सोनाक्षी ने जो ड्रेस पहन रखी है उससे उनका फिगर साफ तौर से पता चल रहा है. ये ड्रेस काफी टाईट लग रही है. सोनाक्षी ने इस तस्वीर में अपने सिग्नेचर साइड-पार्टेड लहराते बालों को खुला छोड़ दिया और न्यूड शेड के मेकअप के साथ न्यूड शेड की लिपस्टिक लगाई, जिससे ड्रेस अच्छी लग सके. नो एक्सेसरी लुक देने का ऑप्शन चुनते हुए, सोनाक्षी ने फुटवियर ब्रांड, पब्लिक डिजायर से एक जोड़ी ब्लैक हील्स के साथ अपनी रीगल ड्रेस पूरी की. इसमें कोई रहस्य नहीं है कि पिछले कुछ सीजन में कैटवॉक में चमड़े की ड्रेसेज हावी रही हैं और निश्चित रूप से बॉलीवुड सितारे भी लंबे समय तक इससे दूर नहीं रह सकते हैं. एक दूसरी तस्वीर में सोनाक्षी एक सफेद शीर मैक्सी में नजर आ रही हैं. वो ऑफ-शोल्डर ड्रेस में ट्यूल ट्रेन के साथ आई और उसके कर्व्स को अच्छी तरह से फ्लॉन्ट किया. सोनाक्षी सिन्हा ने अपने इंस्टाग्राम पर ऐसी तस्वीरें शेयर की हैं जो इन दिनों पार्टी सीजन के लिए एकदम सही हैं और वो इन दिनों ट्रेंड भी कर रही हैं. इस सर्दी के मौसम में आप भी कुछ ऐसा ट्राई कर सकते हैं और खुद को दूसरों से अलग दिखने में अपनी ही मदद कर सकते हैं.
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द्रोपदी ने सच्चे हृदय से प्रार्थना की। भगवान् कृष्ण उसका दुःख दूर करने के लिए द्वारका से दौड़ पड़े। गजेन्द्र ने सङ्कट में पड़ कर असहाय हो कर प्रभु को पुकारा । भगवान् हरि उसकी रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र ले कर चल पड़े । प्रार्थना के प्रभाव से प्रह्लाद के शिर पर डाला गया गरम-गरम तेल वर्फ के समान शीतल हो गया। मीरा की प्रार्थना ने कोलों की सेज को फूलों का विस्तर और काले नाग को हार में बदल दिया । जवप प्रार्थना करते हैं तो आप अनन्त भगवान् से अपना तार मिलाते हैं, हिरण्यगर्भ के साथ (जो शक्ति का खण्ड भण्डार है) एक हो जाते हैं और इस प्रकार प्रभु से शक्ति, प्रकाश और बल प्राप्त करते हैं । प्रार्थना के लिए तीव्र बुद्धि या वाक् चातुरी की आवश्यकता नहीं है । भगवान् तो प्रार्थना करते समय आपका हृदय चाहता है । विनीत, शुद्ध ग्रात्मा से निकले हुए दो-चार ही शब्द पण्डित या विद्वान् के प्रगल्भ शब्द- प्रवाह से अधिक भगवान् को प्रिय होंगे। जब डाक्टरों की समिति किसी रोगी को असाध्य बता देती है तो प्रार्थना उसकी सहायता करती है और वह आश्चर्यपूर्वक निरोग हो जाता है। इस प्रकार की अनेक घटनाएँ हुई हैं। मालूम भी होगा। प्रार्थना के द्वारा रोग निवारण कर देना वड़ा विस्मयजनक है । जिसने नियमपूर्वक प्रार्थना शुरू कर दी है उसने नित्य सुख और स्थायी शान्ति के प्रदेश के लिए अपनी यात्रा प्रारम्भ कर दी है । जो मनुष्य प्रार्थना नहीं करता उसका जीवन व्यर्थ है । र्थना का अतुल प्रभाव है । मुझे इसका यथेष्ट अनुभव है हृदय से निकली हुई कपट-रहित प्रार्थना तुरन्त ही भगको द्रवित कर देती है। कसी स्वार्थमय भाव की पूर्ति के लिए या संसारी पदार्थों प्ति के लिए प्रार्थना मत करें । भगवान् की कृपा के लिए करें । दिव्य प्रकाश, पवित्रता और आध्यात्मिक मार्गन के लिए प्रार्थना करें । निरन्तर कहें - "हे प्रभु ! मैं को सर्वदा याद करता रहूँ । मेरा मन आपके चरण-कमलों गा रहे । मेरे बुरे स्वभाव को दूर कर दें । " प्रार्थना अच्छी आध्यात्मिक वृत्तियों को बनाती है और मन शान्ति देती है । यदि नियमपूर्वक प्रार्थना करेंगे तो -धीरे आपका जीवन बदल जायेगा और नये साँचे में ढल गा । प्रार्थना स्वाभाविक होनी चाहिए । यदि प्रार्थना स्वभाव वन जायेगा तो आपको ऐसा ज्ञात होगा केविना रह नहीं सकते । प्रार्थना पर्वतों को भी हिला सकती है। प्रार्थना बड़े आश्चर्य - कार्य कर सकती है । एक ही बार अपने अन्तर्हदय से कहें "हे भगवान् ! मैं आपका हूं । आपकी इच्छा पूरी हो । ऊपर दया करें । मैं आपका दास हूँ। क्षमा करें । मार्ग यें । रक्षा करें । प्रकाश दें । त्राहि माम् । प्रचोदयात् ।" मन भाव को विनयपूर्ण और ज्ञान प्राप्ति के लिए उत्सुक रखें । हृदय में भाव की वृद्धि करें । प्रार्थना तुरन्त ही सुनी यगी और उसका उत्तर भी मिलेगा। जीवन के दैनिक वर्षों में ऐसा करें और स्वयं प्रार्थना की परम सामर्थ्य को चानें। आपको दृढ़ आस्तिक बुद्धि रखनी चाहिए । भगवान् से स्वार्थपूर्ति के लिए प्रार्थना मत करें। यह कभी मत माँग - 'हे भगवान् ! मुझे धनी वना दें । मुझको सन्तान, पशु और सम्पत्ति दें । मेरे शत्रुओं का नाश करें। मुझे स्वर्ग में दीर्घ काल तक भोगों की प्राप्ति हो ।" इस प्रकार का प्रार्थना कभी मत करें । भगवान् से दुकानदारी मत करें । इससे पहले कि आप भगवान् से कोई वस्तु माँगने का विचार करते हैं वह स्वयं की आवश्यकताओं को जान लेता है। वह तो अन्तर्यामी हृदय के अन्दर निवास करने वाला है । जो सारे संसार का पालन करने वाला है वह क्या आपको भूल जायगा । प्रातःकाल उठें और थोड़ी-सी प्रार्थना किसी भी ढङ्ग से अवश्य करें । बालक के समान सरल बन जायें । अपने हृदय को खोल दें । कुटिलता और चतुराई को त्याग दें। आपको सबकुछ मिलेगा । सच्चे भक्तों को प्रार्थना की शक्ति भली प्रकार विदित है । गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने चार प्रकार के भक्त वताये हैं- ग्रा, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी । ये चारों ही अच्छे हैं; परन्तु इन सबमें ज्ञानी भक्त श्रेष्ठ माना गया है। उदाहरणस्वरूप देखिए आर्त भक्त द्रौपदी ने अपने सङ्कट निवारण के लिए भगवान् से प्रार्थना की । जिज्ञासु भक्त उद्धव ने भगवान् से ज्ञानोपदेश सुनने के लिए प्रार्थना की । अर्थार्थी भक्त ध्रुव ने राज्य प्राप्ति की कामना से भगवान् का भजन किया । ज्ञानी भक्त प्रह्लाद ने भगवान् का सच्चा स्वरूप समझ कर विना किसी स्वार्थ के भगवान् की भक्ति की । इन चारों की प्रार्थना का सारांश दिया जाता है ।
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Corona: किसानों के नाम पर चल रहे आंदोलन में अब आपसी लड़ाई की जमीन पर भी राजनीति शुरू हो गई है। टोहाना में जुटी किसानों की भारी भीड़ कोरोना की सुपर स्प्रेडर बन सकती है। नई दिल्ली। किसानों के नाम पर कोरोना के फैलाव में लगे तत्व अभी भी अपनी हरकतों से बाज नही आ रहे। कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों की मौतों से भी इन पर कोई फर्क नही पड़ा है। आज संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने हरियाणा के टोहाना में भीड़ लगाकर जमकर प्रदर्शन किया। किसानों के नए नवेले मसीहा बने राकेश टिकैत ने इनकी अगुवाई की। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता टोहाना में गिरफ्तारियां देने के लिए पहुंचे। यहां विधायक देवेंद्र सिंह बबली और किसानों के बीच बवाल हुआ था। ये घटना एक जून की है। टोहाना के नागरिक अस्पताल में जजपा के विधायक देवेंद्र सिंह बबली ने एक एक्स-रे मशीन का उद्घाटन किया था। इस दौरान उनका विरोध करने के लिए किसान नेताओं की अगुवाई में एक जत्था भी पहुंच गया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले पहुंचे इन किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायक की गाड़ी पर हमला हुआ। कुछ लोगों को चोटे आईं। इसी मसले पर हरियाणा की पुलिस किसानों की गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। कानून व्यवस्था से जुड़े इस सवाल पर किसानों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। नेतागिरी के चक्कर में राकेश टिकैत भी इसमें कूद पड़े। किसानों के नाम पर चल रहे आंदोलन में अब आपसी लड़ाई की जमीन पर भी राजनीति शुरू हो गई है। टोहाना में जुटी किसानों की भारी भीड़ कोरोना की सुपर स्प्रेडर बन सकती है। राकेश टिकैत की अगुवाई में आम लोगों की जान के साथ ये खिलवाड़ तब हो रहा है जबकि कोरोना की तीसरी लहर की आहट है। विशेषज्ञ सावधान रहने की चेतावनी दे रहे हैं। मगर निहित राजनीतिक स्वार्थों के लिए एक बड़ी त्रासदी को आमंत्रण दिया जा रहा है।
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पहिला पाठ भोजन लड़कियो ! तुम जानती हो कि रेलगाड़ी में एक इञ्जिन होता है । यही इञ्जिन उसे खींचता है। क्या तुम यह भी जानती हो कि यह इञ्जिन किस चीज़ से चलता है ? इञ्जिन भाफ़ से है चलता है। यह भाफ़ कोयले और पानी से तैयार की जाती है । इसी से इञ्जिन को कोयला और पानी दिया जाता है । यदि उसे कोयला और पानी न मिले तो वह न चल सके । हम क्यों खाते हैं ? हमारा शरीर भी एक प्रकार का इञ्जिन है । इञ्जिन की तरह इसे भी खाना चाहिए । खाना खाने से हमारे शरीर में शक्ति आती है, जिससे हम काम करते और चलते फिरते हैं । काम करने, चलने फिरने अथवा बोलने से शक्ति खर्च होती है । यह शक्ति खाना खाने से फिर पैदा हो जाती है। बात यह है कि खाने में शरीर के लिए पोषण तत्व होता है । इसी पोषण तत्व से हमारे शरीर का पोषण होता है और उसमें बल आता है । इसलिए सदा ऐसा खाना खाना चाहिए जिसमें शरीर का पोषण करने वाला तत्व अधिक हो और जिसके खाने से शरीर को बल मिले । खाना कैसा होना चाहिए - शरीर का पोषरण स्वास्थ्यकर और अच्छा खाना खाने से होता है तुम पूछागी कि अच्छा खाना कौन सा है ? क्या मिठाई, हलवा, पूड़ी, रबड़ी वगैरह अच्छा खाना है ? नहीं, कभी नहीं । मिठाई, रबड़ी या पूड़ी वग़ैरह स्वादिष्ट भोजन भले ही हों, लेकिन इनसे लाभ कम होता है । हाँ, इनके खाने से हानि ज़रूर होती है। ये सब देर में हजम होने वाले और कब्ज़ करने वाले पदार्थ हैं। अच्छा और स्वास्थ्यकर खाना वह है जो जल्द हज़म होने वाला हो और जिसके खाने से शरीर में बल बढ़े। तुम्हें यह याद रखना चाहिए कि खाना स्वाद के लिए नहीं खाया जाता वह स्वास्थ्य के लिए खाया जाता है। इसलिए अगर कोई खाना ऐसा हो जो खाने में तो स्वादिष्ट हो लेकिन शरीर को हानि पहुँचाता हो तो तुम उसे कभी न खाओ । ऐसा खाना खाने से जीभ के जायके के सिवा लाभ कुछ नहीं होगा। हाँ, जाओगी । बीमारी से बचने के लिए तुम्हें सदा सादा और बलकारक भोजन करना चाहिए । ऐसा भोजन करने से थकान दूर होती है और शरीर में बल बढ़ता है। शरीर में बल होने से बीमारियाँ भी पास नहीं फटकतीं । कमजोरी ही बीमारियों का घर है और वही उनकी जननी है। इसलिए यदि तुम नीरोग रहना चाहती हो तो बलवान बनो और बलवान बनने के लिए अच्छा और जल्द हज़म होने वाला खाना खाओ । तुम पूछोगी कि यदि मिठाई और पकवान भी अच्छा खाना नहीं है तो अच्छा खाना फिर क्या है ? हम तुम्हें बता चुके हैं कि बल देने वाला और जल्द हज़म होने वाला खाना स्वास्थ्य के लिये लाभकर है । यही अच्छा खाना है । रोटी, दाल, भात, तरकारी, फल, दूध वगैरह सच भोजन के अच्छे पदार्थ हैं । ये सब जल्द हजम होते हैं और शरीर को ताक़त देते हैं । दूध पीना - स्वास्थ्य के लिए दूध सब से अच्छी चीज़ है । यह हमारे लिए अमृत के समान है। दूध में शरीर के लिए पोषण तत्व अधिक होता है। इसलिए इसके खाने से शरीर में बल बढ़ता है और मस्तिष्क भी ताक़तवर होता है; जिससे बुद्धि बढ़ती है। लड़कियों को बचपन ही से दूध पीने की आदत डालनी चाहिए और यदि मिल सके तो खूब दूध पीना चाहिए । पीने के लिए गाय ओर बकरी का दूध अच्छा होता है। इनका दूध हल्का और नीरोग होता है। भैंस का दूध ताक़तवर किन्तु भारी होता है। कमजोर और रोगी आदमियों का भैंस का दूध नहीं पीना चाहिए। दूध किसी का हो सदा उबाल कर पोना चाहिए । फल खाना-- फल खाना भी स्वास्थ्य के लिए हितकर है। फल खाने से शरीर में नया खून पैदा होता है, जिससे बल और बुद्धि बढ़ती है। फल खाने से सौन्दर्य की भी वृद्धि होती है । जिनको क़ब्ज की शिकायत रहती हो उन्हें सदा फलों का प्रयोग करना चाहिए । फल खाने से शरीर पर ही अच्छा प्रभाव
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डांसिंग क्वीन नोरा फतेही आज दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। नोरा ना सिर्फ डांस और एक्टिंग बल्कि अपने ग्लैमरस अवतार के लिए काफी मशहूर हैं। नोरा आए दिन अपने बोल्ड लुक्स से फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं। वैसे तो नोरा इन दिनों रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' को भी जज कर रही हैं। नोरा ऑनस्क्रीन तो फैंस का दिल जीत ही रही है लेकिन वो ऑफस्क्रीन भी सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं। नोरा ने फैंस के साथ अपना एक डांस वीडियो साझा किया है जिसमें वो किलर डांस मूव्स करती दिख रही है। यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और फैंस इसे खूब पसंद भी कर रहे हैं। नोरा फतेही ने इंस्टाग्राम पर अपना एक डांस वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो अपने नो-मेकअप लुक में नजर आ रही हैं। इस वीडियो में नोरा अपने दोस्तों कोरियोग्राफर रजित देव और मेकअप आर्टिस्ट मार्से पेड्रोज़ो के साथ मॉरीशस बीच पर डांस कर रही हैं। वीडियो में नोरा क्रिस ब्राउन के सॉन्ग कॉल मी एवरी डे पर थिरकती दिख रही हैं। अपने इस लेटेस्ट वीडियो को शेयर करते हुए नोरा ने कैप्शन में लिखा, "वाइबिंग. . . कॉल मी एवरी डे। " वीडियो में टाई हेयर बन स्टाइल के साथ पिंक बिकिनी टॉप के साथ हॉट पेंट्स में नोरा का लुक भी बेहद अट्रैक्टिव लग रहा है। वीडियो में स्लो मोशन में उनके कर्वी बॉडी के साथ डांस स्टेप्स देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है। फैंस को अपनी पसंदीदा नोरा का ये डांस वीडियो बहुत पसंद आया है। नोरा के वीडियो पर यूजर्स जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं एक यूजर ने कॉमेंट कर लिखा, 'टू मच फायर नोरा'। दूसर यूजर ने लिखा, 'किलर'। वर्क फ्रंट की बात करें तो हाल ही में अजय देवगन और सिद्धार्थ मल्होत्रा स्टारर थैंक गॉड में अपने आइटम नंबर के लिए नोरा ने खूब तारीफें बटोरी थी। वहीं अब नोरा जल्द ही जॉन अब्राहम संग एक कॉमेडी फिल्म में अहम किरदार में नजर आएंगी।
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आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। नारायण रेकी सत्संग परिवार एक सामाजिक संस्था है। जो हर बुधवार कृष्णावतिका मंदिर गोरेगांव में अपना नारायण रेकी सत्संग का आयोजन करते है। हर सोमवार और मंगलवार को नारायण रेकी क्लास और हर गुरूवार और शुक्रवार करुणा रेकी की क्लास का आयोजन किया जाता है। मासिक दौर पर यशोधम स्कूल में पारिवारिक सत्संग का आयोजन किया, ताकि परिवार का हर सदस्य इसका लाभ उठा सके। उक्त विचार राजेश्वरी मोदी ने पानीपत में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहे। नारायण रेकी सत्संग परिवार रेकी क्लास से आने वाली पूरी धनराशि का उपयोग ज़रूरतमंद बच्चों की पढाई, लड़कियों के विवाह और बच्चो के चिकित्सा के लिए करते है। इसके साथ, अनाथाश्रम, वृद्वाश्रम, रेस्क्यू फाउंडेशन में नारायण रेकी परिवार के सेवा के कार्य नियमित रूप से होते रहते है। मुंबई के अलावा अहमदाबाद, बरोदा, सूरत, नॉएडा, नासिक, जयपुर,भीलवाड़ा, इंदौर, कोलकोता, बेंगलुरू, आसाम, में नारायण रेकी सत्संग परिव्वर के रेकी हीलिंग के केंद्र है। अंतर-राष्ट्रीय स्टार पर भी बैंगकॉक और अमरीका के न्यू जर्सी व शिकागो शहरों में रेकी सेमीनार का आयों किया गया है। इतना ही नहीं, मुंबई के कई उपनगरों में रेकी क्लास व हीलिंग प्रेयर्स होती है जिसका लाभ बहुत लोग उठाते है। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका के परिचय के बिना संस्थान जा परिचय अधूरा है। राजेश्वरी मोदी जिन्हें लोग प्यार से राजदीदी कहते हैं। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका है। कॉमर्स ग्रेजुएट राजदीदी उसुई व करुणा रेकी की ग्रैंडमास्टर है। इसके आलावा वे एक उच्चकोटी की काउंसलर व एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट भी है। दीदी का आभा मंडल सकरात्मक सोच व आपसी संबंधों की दृढ़ता से भरपूर देवीयता का साक्षात स्वरुप हैं। बचपन से ही समाज सेवा के प्रति उनका रुझान था, जिसे उन्होंने दाम्पत्या जीवन व दो बच्चों की मां बनने के साथ बखूबी निभाया। क्योंकि घर परिवार उनकी सर्वप्रथम प्राथमिकता थी, इसलिए घर पर दोपहर में रेकी और एक्यूप्रेशर की क्लास शुरू की। धीरे धीरे उनकी सोच लोगों की समझ में आने लगी और तेज़ी से इसका प्रचार- प्रसार हुआ, तो दीदी ने राजस्थानी मंडल गोकुलधाम के कार्यालय में अपनी सेवा देना शुरू कर दिया। गहन साधना व सोच के बाद उन्होंने यह पाया कि सकारातमक तरीके से संबंधों को दृढ़ बनाकर समाज को सुधरा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने नारायण जीवन चक्र का प्रतिपादन किया और बड़े ही साधारण शब्दों में लोगों को मानव जीवन का उद्देश्य बताया और समझाया कि रेकी के माध्यम से हम सकारात्मक होकर जीवन विकास कैसे कर सकते है। क्योंकि उनका मानना है की सेवा का यह भाव सकारात्मकता व संबंधो की दृढ़ता उन्होंने अपने परिवार से ही सीखी है। दीदी के जीवनसाथी रमेशजी मोदी एक सफल व्यवसायी व समाजसेवक है। उनके बड़े सुपुत्र ईएनटी स्पेशलिस्ट है, बड़ी बहू स्किन स्पेशलिस्ट हैं, छोटा बेटा रेटीना स्पेशलिस्ट व छोटी बहू कॉर्निया स्पेशलिस्ट है। पूरा परिवार समाज सेवा का उदाहरण है। समय समय पर उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए विभिन पुरस्कार व उपाध्यों से सम्मानित किया गया है, जैसे मेयर अवार्ड, नारी रत्न, समाज रत्न। दीदी का जीवन सेवा का अनोखा उदाहरण है।
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ठंडी के मौसम में कुछ लोगों को बहुत ज्यादा ठंड लगती है, तो कुछ को बहुत कम. जिन लोगों को ज्यादा ठंड लगती है, वो लोग रात में सोते समय सिर से लेकर पैर तक खुद को पूरा कवर कर लेते हैं, पैरों में मोजा पहन लेते हैं. ताकि Body के किसी पार्ट को ठंड न लगे. आप भी अगर इनमें से एक हैं और रात में पैरों में मोजा पहन कर सोते हैं, तो ये आपके लिए खतरनाक हो सकता है. क्योंकि पूरी रात पैरो पर मोजा होने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, तो कई बार इंफेक्शन का खतरा भी हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि रात को मोजा पहन कर सोने से और किस तरह से नुकसान हो सकता है. टाइट मोजे पहनकर सोने से आपके पैरों की नसों में गांठ पड़ने का खतरा रहता है. दरअसल, टाइट मोजे से जब खून का दबाव इन नसों पर पड़ता है, तो वो खून को आगे बढ़ाने के लिए जगह बनाने की कोशिश करती हैं. जिसके चलते नसों में मुड़ाव आ जाता है और गांठ पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. सोते समय सॉक्स पहनना या ज्यादा देर तक मोजा पहनने से आपके शरीर का तापमान बढ़ जाता है. पैरों में पसीना आना शुरु हो जाता है, जिससे फंगल इंफेक्शन होने का डर बन जाता है. साथ ही नियमित तौर पर सॉक्स पहनने के लिए कॉटन सॉक्स को चुनें, जो आपके पैर में होने वाले पसीने को सोख लेता है और इंफेक्शन से बचाता है. सर्दियों के मौसम में लोग दिनभर सॉक्स पहनकर इधर-उधर घूमते हैं, जिससे धूल और मिट्टी चिपक जाती है. यदि आपके सॉक्स साफ नहीं हैं तो इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और दुर्गंध आने लगती है. ऐसे में इन मोजो को पहन कर सोने से संक्रमण का खतरा अधिक रहता है.
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पुडुचेरी, (भाषा)। पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बनाने का लक्ष्य तय करते हुए उप राज्यपाल किरण बेदी ने आज सरकार से कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान केंदित करने को कहा और शहर की छवि बदलने के लिए स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान देने का मुद्दा उ"ाया। विधानसभा को उसके बजट सत्र के पहले दिन अपने पारंपरिक संबोधन में बेदी ने कहा, `` हमें कानून एवं व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि निगरानी और पुलिस बल के आधुनिकीरण के जरिए हम पुडुचेरी को शून्य अपराध वाला केंद शासित प्रदेश बना सकें। हम इसे तेजी से हासिल कर सकते हैं। "उन्होंने कहा, `` यह नागरिकों और सैलानियों में सुरक्षा की भावना लाएगा। "पुडुचेरी द्वारा उल्लेखनीय विकास करने खास तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, `` फिर भी सुधार की काफी गुंजाइश है। "उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर ध्यान केंदित करे ताकि पुडुचेरी देश में पहला खुले में शौच मुक्त केंद शासित प्रदेश बन सके। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए सार्वजनिक स्थानों और प्रत्येक घर में शौचालय बनाने के साथ ही लोगों को जागरूक करना चाहिए। किरण ने कहा, `` हमें एक मिशन की तरह कूड़ा संग्रह, टैंको, नालियों और सीवर की सफाई को भी व्यवस्थित करने और केंद शासित प्रदेश की छवि में बदलाव करने की जरूरत है। "पुडुचेरी अपने वित्तीय संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय में खर्च करता है और विकास कार्यों के लिए सिर्फ सीमित हिस्सा होता है। किरण बेदी ने कहा कि इसलिए उचित प्रणाली के माध्यम से आवंटित संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नीतियां बनाना अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार वित्तीय मुद्दों से प्राथमिकता से निपटेगी। उन्होंने कहा कि सरकार केंद शासित प्रदेश को स्मार्ट सिटी की सूची में लाने के लिए प्रयासरत है। उपराज्यपाल ने कहा कि पुडुचेरी नगरपालिका के लिए स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा और केंदीय शहरी विकास मंत्रालय को जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्गों, अल्पसंख्यकों, निशक्तों और समाज के अन्य कमजोर तबकों का विकास करने और उन्हें सशक्त करने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकार को ``प्रगतिशील नेतृत्व" प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी को मुबारकबाद भी दी।
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सहरसा रमन ठाकुर : सदर थाना के सराही रोड स्थित दुर्गा नर्सिंग होम पर गोलीबारी और एक डॉक्टर से मांगी गयी दस लाख रूपये की रंगदारी मामले को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। घटना के अड़तालीस घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी नही होना इसी बात को दर्शाता है। जबकि केस दर्ज करने वाले डॉक्टर सहित नर्सिंग होम के स्टाफ का कहना है कि इस मामले में नामजद बनाये गये दोनों अभियुक्त शहरी इलाके में खुलेआम घूम रहा है। अभियुक्तों द्वारा नर्सिंग होम पर किये गए गोलीबारी के अभी तक निशान मौजूद हैं। जिसमे प्रवीण कुमार सिंह उर्फ चुनचुन सिंह और सिद्धार्थ कुमार उर्फ गोविंदा को नामजद बनाया गया है। आम डॉक्टरों से अलग दुर्गा नर्सिंग होम में आज तक किसी मरीज को पैसे के अभाव में बिना इलाज लौटना नही पड़ा है। स्टाफ के मुताबिक करीब दो सप्ताह पूर्व भी नामजद अभियुक्त ने क्लीनिक पर जाकर गाली गलौज किया था जिसका प्रतिकार स्थानीय लोगों ने जमकर किया था। इस दौरान काफी संख्या में जुटे लोगों ने अपराधियों को खदेड़ खदेड़ कर दौड़ा दिया । लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस लापरवाही के चलते दान पेटी चोरी के एक माह बाद माता चंडिका देवी की मूर्ति चोरों ने चुरा ली तो कहीं पुलिस किसी बड़ी वारदात का तो इंतजार नहीं कर रही है।
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सामना में लिखा है कि ट्रंप के भारत आने पर उन्हें सीधे गुजरात ले जाकर सरकार कौनसा सन्देश देना चाहती है. ट्रंप के अहमदाबाद दौरे के लिए बड़ी-बड़ी दीवारें बनाई जा रही है, जिससे गरीबी को छुपाया जा सके, झुग्गी झोपड़ियों पर ट्रंप की नजर ना पड़े. शिवसेना के मुखपत्र सामना में एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बारे में लिखा गया है. सामना में लिखा है कि ट्रंप के भारत आने पर उन्हें सीधे गुजरात ले जाकर सरकार कौनसा सन्देश देना चाहती है. ट्रंप के अहमदाबाद दौरे के लिए बड़ी-बड़ी दीवारें बनाई जा रही है, जिससे गरीबी को छुपाया जा सके, झुग्गी झोपड़ियों पर ट्रंप की नजर ना पड़े. इसके साथ ही लिखा गया है कि ट्रम्प के दौरे के लिए सरकारी खजाने से करोड़ो रुपये खर्च हो रहा है और गरीबी हटाओ की घोषणा अब गरीबी छुपाओ में तब्दील होती दिख रही है. सामना में ट्रम्प के भारत दौरे को आजादी से पहले अंग्रेजों के आने से जोड़ा गया है. सामना ने लिखा है कि गुलाम हिंदुस्तान में इंग्लैंड के राजा या रानी आते थे, तब उनके स्वागत की ऐसी ही तैयारी होती थी और जनता की तिजोरी से बड़ा खर्च किया जाता था. वहीं, अमेरिका के राजनीति पर सामना ने लिखा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में 'मजबूत'माने जाते हैं, उसी तरह ट्रंप भी हैं. ट्रंप ये कोई बड़े बुद्धिजीवी, प्रशासक, दुनिया का कल्याण करनेवाले विचारक हैं क्या? निश्चित ही नहीं लेकिन सत्ता पर बैठे व्यक्ति के पास होशियारी की गंगोत्री है. यह मानकर ही दुनिया में व्यवहार करना पड़ता है. सत्ता के सामने होशियारी चलती नहीं बाबा! 'मौका पड़े तो गधे को भी बाप कहना पड़ता है.
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जितना धोनी की हेयरस्टाइल चर्चा में रहती थी उतनी ही उनकी हेयरस्टाइलिस्ट सपना भवनानी भी, धोनी की बहुत क्लोज फ्रेंड कही जाने वाली सपना ने माही के लंबे बालों का सीक्रेट शेयर किया है। सपना ने बताया कि जब वह धोनी के लंबे बाल काट रही थी, तो उन्हें काफी डर लग रहा था कि अगर उनके बाल काटने में थोड़ी सी भी गलती हुई तो देश वाले उन्हें ही इस बात का दोष देंगे। सपना ने कहा मुझे पहली बार किसी के बाल काटते वक्त काफी डर लगा था, मुझे लगा कि अगर मुझसे कहीं कुछ भी गलत हुआ तो माही के फैंस मुझे बहुत पीटेंगे। बहुत अजीब ढंग से घूर रहे थे. . सपना ने अपने और धोनी की पहली मुलाकात भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि धोनी से उनकी मुलाकात जॉन अब्राहम और बिपाशा बसु ने करवाई थी। जब वो पहली बार धोनी से मिली थीं तो उनके बीच में कोई बातचीत नहीं हुई थी लेकिन हम दोनों ही एक-दूसरे को बहुत अजीब ढंग से घूर रहे थे। शायद धोनी इस बात पर हैरान थे कि मेरी जैसी कोई महिला हेयरड्रेसर कैसे हो सकती है और मैं उनके ऑरेंज बालों देखकर सोच रही थी कि कोई इस रंग के बाल कैसे रख सकता है। मैंने धोनी से कहा कि हम अभी तुम्हारे बाल नहीं काटेंगे लेकिन इन्हें ऑरेंज से काले जरुर करेंगे, उन्होंने कहा कि जब हम अगली बार मिले तो मैं किशोर कुमार के गाने सुन रही थी, तब धोनी को यकीन हुआ कि ये लड़की थोड़ी नॉर्मल भी है। सपना धोनी के अलावा उनकी पत्नी साक्षी की भी बहुत अच्छी दोस्त हैं। वो बिग बॉस में भी नजर आ चुकी हैं और अपने पिछले कुछ बोल्ड पोस्टर्स और बोल्ड हरकत के लिए वो काफी चर्चित भी रह चुकी हैं।
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पाकिस्तान ने सोमवार को कहा कि उसने दो भाजपा नेताओं द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की अपनी स्पष्ट अस्वीकृति और निंदा करने के लिए भारतीय प्रभारी डी'एफ़ेयर को तलब किया है। विदेश कार्यालय (एफओ) ने एक बयान में कहा कि भारतीय राजनयिक को बताया गया कि ये टिप्पणियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और इससे न केवल पाकिस्तान के लोगों बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को गहरा ठेस पहुंची है। एफओ ने पाकिस्तान सरकार की स्पष्ट अस्वीकृति और भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। एफओ ने कहा, "भारतीय राजनयिक को आगे बताया गया कि पाकिस्तान भाजपा सरकार द्वारा उक्त अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की निंदा करता है, जो मुसलमानों के दर्द को कम नहीं कर सकता है," एफओ ने कहा। नई दिल्ली में, भाजपा ने रविवार को अपने राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा को निलंबित कर दिया और पैगंबर के खिलाफ उनकी विवादास्पद टिप्पणी के बाद दिल्ली के मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को निष्कासित कर दिया। टिप्पणी पर मुस्लिम समूहों के विरोध के बीच, पार्टी ने अल्पसंख्यकों की चिंताओं को दूर करने और इन सदस्यों से खुद को दूर करने के उद्देश्य से एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी भी धार्मिक व्यक्तित्व के अपमान की कड़ी निंदा करता है। एफओ ने कहा कि भारत में मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा और नफरत में खतरनाक वृद्धि से पाकिस्तान बहुत चिंतित है। एफओ ने कहा कि भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अल्पसंख्यकों को मानवाधिकारों के उल्लंघन से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने, उनकी सुरक्षा, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने और उन्हें शांति से अपने विश्वासों को मानने और अभ्यास करने की अनुमति देने के लिए अपने दायित्वों की याद दिलाई जाती है। एफओ के अनुसार, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत में खतरनाक रूप से बढ़ते हिंदुत्व से प्रेरित इस्लामोफोबिया का संज्ञान लेने और रोकने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए भारतीय अधिकारियों पर हावी होने को कहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को इस्लाम के पैगंबर के खिलाफ 'आहत करने वाली' टिप्पणी की निंदा की। भाजपा नेताओं की विवादास्पद टिप्पणी ने अरब जगत में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए एक ट्विटर ट्रेंड को जन्म दिया। सऊदी अरब, कतर, ईरान और कुवैत ने भी विवादित टिप्पणी की निंदा की है।
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Quick links: बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर अपने व्यस्त लाइफ में भी सोशल मीडिया अकाउंट को अपडेट रखती हैं। अक्सर उनकी नई-नई तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाया रहता है। हाल ही में एक्ट्रेस ने अपनी फैमिली के साथ एक प्यारी सी तस्वीर को शेयर किया है, जिसमें माता-पिता रणधीर कपूर और बबीता के साथ बड़ी बहन करिश्मा कपूर सभी हैप्पी मूड में नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट को शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने लिखा है 'मेरी दुनिया' । इस तस्वीर को करीना कपूर ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिसमें एक्ट्रेस की मां बबीता, पिता रणधीर कपूर और बहन करिश्मा कपूर के साथ बैठे हुए दिख रहे हैं। पोस्ट को शेयर करते हुए करीना ने लिखा है 'मेरी दुनिया' और साथ ही दिल का इमोजी बनाया है। बता दें इस तस्वीर में सभी खुश दिख रहे हैं। हर किसी ने कलरफूल ड्रेस पहना हुआ है। इसमे रणधीर कपूर और बबीता को सोफे के बीच में बैठे हुए नजर आएं हैं, जबकि उनके आस-पास करीना और करिश्मा कपूर बैठी हुई हैं। इस फैमिली फोटो को अब तक लाखों लोगों का प्यार मिल चुका है। अधिकतर लोगों ने हैप्पी फैमिली और लवली फैमिली लिख कर लव रिएक्ट दिया है। फैंस के अलावा कई बॉलीवुड हस्तियों ने भी इसे लाइक किया है। एक्ट्रेस करीना कपूर ने अपने बेटे तैमूर के साथ भी एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें वह अपने बेटे तैमूर के साथ बैठ मस्ती करती हुई नजर आईं। इस तस्वीर में व्हाइट कलर का टॉप पहनी हुई दिखीं। जिस पर "हार्ट ब्रेकर" लिखा हुआ है। वहीं तैमूर अपनी मॉम के गोद में बैठ मस्ती कर रहे हैं। इस पोस्ट को भी फैंस ने भरपूर प्यार दिया है। खास कर तैमूर की फोटो को देखते हुए अधिकतर लोगों ने क्यूट कहा है। बता दें करीना कपूर जल्द ही आमिर खान के साथ मोस्ट अवेटेड फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' में नजर आएंगी। फैंस को इस फिल्म का इंतजार है।
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छूने के लिए तैयार नहीं थी । जैसा कि गांधी जी ने कहा है, चिकित्साधिकारी ने 'हमारे पहुंचने को उन बेगुनाह लोगों के लिए ईश्वरीय वरदान समझा, और उसने हमें पट्टियों, कीटाणु मारने की दवाओं आदि से लैस किया, और हमें कामचलाऊ अस्पताल में ले गया। जुलू हमें देखकर खुश हुए। गोरे सिपाही उन जंगलों से झांका करते थे जो हमारे और उनके बीच थे, और हमें घायलों की तीमारदारी से दूर रखने की कोशिश करते थे । और जब हम उनकी बात पर ध्यान नहीं देते तो वे क्रोधित हो उठते और जुलू लोगों को अकथनीय गालियां देने लगते ।' एक दुर्गम इलाके से कभी कभी एक दिन में चालीस मील चलना, स्ट्रेचर ढोना और घुड़सवारों के पीछे पीछे भागना और अंत में देखना कि शांतिपूर्ण बस्तियों पर हमले हुए हैं, बेगुनाह लोगों को घसीटा, लातों से मारा और कोड़ों से पीटा गया है - यह सब एक भयानक और कचोटनेवाला अनुभव था । लेकिन मैंने इस कड़वे घूंट को पी लिया, खासकर इसलिए कि मेरे कार्ल्स का काम केवल घायल जुलूओं की तीमारदारी करना था।' इंसान के साथ इंसान की दरिंदगी का यह रोजमर्रा का दृश्य, कठिन अभियान और तनहाई के लंबे दौरों ने गांधी जी के अपने मन में संकट पैदा कर दिया । वे पिछले कई सालों से जीवन के अर्थ और उद्देश्य पर तथा समाज में मनुष्य के कर्तव्य पर मनन करते आए थे और धीरे धीरे अपने साथियों की सेवा के आदर्श के मुताबिक अपनी जीवन शैली को ढाल चुके थे। अब इंसान की बदहाली के इन दुखद और विविधापूर्ण अनुभवों के बीच, पहले जो कुछ अंदर ही अंदर धीरे धीरे पक रहा था वह अनिर्णय का खोल फाड़कर बाहर आ गया और एक दृढ़ संकल्प बन गया । पहले जो एहसास बहुत धुंधला था वह अब एक चकाचौंध के साथ स्पष्ट हो गया कि 'मैं शरीर और आत्मा, दोनों का ध्यान नहीं रख सकता था । अगर उनका जीवन संगी मनुष्यों की सेवा के लिए समर्पित है और अगर आध्यात्मिक बोध उनके प्रयासों का लक्ष्य है तो उन्हें शरीर सुख को हमेशा के लिए त्याग देना होगा और कठोरता के साथ संयम का पालन करना होगा जिसे हिंदू धर्मग्रंथों ने ब्रह्मचर्य का नाम दिया है। ऐसा सोचते हुए मैं आखिरी संकल्प लेने के लिए थोड़ा-बहुत बेचैन हो उठा । इस संकल्प की संभावना ने मुझे एक प्रकार का आनंद दिया।' जैसे ही 'विद्रोह' कुचल दिया गया और कार्प्स को भंग कर दिया गया, गांधी जी देर लगाए बिना फोनिक्स बस्ती की ओर चल पड़े जहां रहने के लिए पहले जुलू विद्रोह और उसके बाद वे अपनी पत्नी और बच्चों को भेज आए थे। जो मुसीबतें उन्होंने उठाई थीं उनके बारे में उन्होंने कस्तूरबाई और अपने प्रमुख सहयोगियों को जानकारी दी और उनको अपना फैसला सुनाया जो उन्होंने किया था। इस प्रकार उनको विश्वास में लेने और अपनी समझ में उनकी सहर्ष अनुमति प्राप्त करने के बाद उन्होंने 'आखिरी फैसला' किया जिसे उन्होंने 'जीवन भर ब्रह्मचर्य के पालन का व्रत' कहा है ।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण से एक दिन पहले ही आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया । फडणवीस ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उनके इस घोषणा से पहले उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था । फडणवीस ने रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। फडणवीस ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास विधानसभा में बहुमत नहीं है इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। भाजपा के इन नेताओं ने महाराष्ट्र में अपनी सरकार बचाने के लिए विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट को लेकर विचार-विमर्श किया। इस बीच अजित पवार को लेकर अटकलों का बाजार गर्म होने लगा है। रिपोर्ट्स की मानें तो अजित पवार एनसीपी की ओर वापसी कर सकते हैं। बता दें कि कल अजित पवार मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ एक बैठक से गायब रहे थे, तो वहीं आज सुबह वह मुंबई अटैक के शहीदों को श्रद्धांजलि के मौके पर नहीं दिखे। एनसीपी की ओर से अजित पवार को मनाने की हर कोशिश हो रही है। एनसीपी नेता भुजबल उनसे कल मुलाकात कर चुके हैं।
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